मुंबई में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनसे जुड़े मुद्दों को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को Animal Birth Control यानी ABC कार्यक्रम को प्रभावी और तेजी से लागू करने की सलाह दी है. अदालत ने कहा कि अगर इस कार्यक्रम को आक्रामक तरीके से लागू किया जाए तो आवारा कुत्तों की आबादी की आगे होने वाली बढ़ोतरी को रोका जा सकता है. मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है. सुनवाई के दौरान उन्होंने राज्य सरकार से कहा कि प्रशासन को यह बात समझनी होगी कि अगर ABC कार्यक्रम को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो आवारा कुत्तों की संख्या में आगे बढ़ोतरी नहीं होगी.
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ABC कार्यक्रम के तहत जिस कुत्ते की नसबंदी हो जाती है, उसके बाद उससे नए कुत्तों का जन्म नहीं होगा. अदालत का जोर इस बात पर था कि आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने की प्रक्रिया को सबसे पहले रोका जाए. इसके बाद बाकी समस्याओं से निपटना अपेक्षाकृत आसान होगा. अदालत ने कहा कि अगर आवारा कुत्तों की आबादी की बढ़ोतरी रुक जाती है तो उसके बाद रेबीज नियंत्रण और कुत्तों को खिलाने जैसे मुद्दों पर ध्यान देना आसान हो जाएगा. अदालत के मुताबिक, जब कुत्तों की संख्या आगे नहीं बढ़ेगी तो प्रशासन के सामने मौजूद समस्या का एक बड़ा हिस्सा अपने आप कम हो जाएगा.
आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश घुगे ने कहा कि एक बार ABC कार्यक्रम को तेजी से और प्रभावी तरीके से लागू कर दिया जाए तो कुत्तों की संख्या में आगे बढ़ोतरी नहीं होगी. इसके बाद प्रशासन को बचे हुए कुत्तों पर ध्यान देना होगा. उन्होंने कहा कि इसके बाद यह सुनिश्चित करना होगा कि ये कुत्ते रेबीज से संक्रमित न हों. अदालत ने साफ किया कि सबसे पहले कुत्तों की आबादी की बढ़ोतरी को रोकना जरूरी है. इसके बाद बाकी समस्याओं से निपटा जा सकता है. अदालत की टिप्पणी का मुख्य फोकस आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी को प्राथमिकता देने पर रहा.
सुनवाई के दौरान अदालत ने वयस्क कुत्तों की नसबंदी पर भी जोर दिया. अदालत का कहना था कि वयस्क कुत्तों को नसबंदी के जरिए प्रजनन से रोकने से आगे होने वाले जन्म को रोका जा सकता है. इससे समस्या की जड़ पर काम किया जा सकेगा. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को संभालने के बजाय अगर वयस्क कुत्तों की नसबंदी को प्राथमिकता दी जाती है तो इससे समस्या को स्वाभाविक रूप से कम करने में मदद मिलेगी. अदालत के मुताबिक, आवारा कुत्तों की आबादी में बढ़ोतरी रोकना व्यापक समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
अदालत ने यह भी कहा कि जब कुत्तों की संख्या बढ़ना बंद हो जाएगी तो प्रशासन को बाकी बचे कुत्तों की देखभाल और उनसे जुड़े दूसरे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने में आसानी होगी. इनमें खास तौर पर रेबीज से बचाव और कुत्तों को खिलाने से जुड़े सवाल शामिल हैं. यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 19 मई 2025 के फैसले के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा शुरू की गई स्वत. संज्ञान याचिका से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में आवारा कुत्तों के प्रबंधन से जुड़े मुद्दे पर अपना फैसला दिया था. इसके बाद हाईकोर्ट इस मामले में अनुपालन की स्थिति पर नजर रख रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए पैदा होने वाले खतरों के मामले में राज्य सरकारें निष्क्रिय दर्शक बनकर नहीं रह सकतीं. शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट को भी इस मामले में अनुपालन की निगरानी करने का निर्देश दिया था. इसी क्रम में बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार की ओर से उठाए गए कदमों और ABC कार्यक्रम के अनुपालन की स्थिति पर सुनवाई हो रही है. अदालत ने राज्य सरकार से कार्यक्रम को प्रभावी तरीके से लागू करने पर ध्यान देने को कहा है.
अदालत की सुनवाई में यह बात सामने आई कि आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए केवल मौजूदा संख्या को संभालना पर्याप्त नहीं होगा. अगर कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती रही तो समस्या भी बढ़ती रहेगी. इसलिए अदालत ने नसबंदी के जरिए नए जन्म को रोकने को प्राथमिकता देने की बात कही.
अदालत ने अपने रुख में यह स्पष्ट किया कि आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए पहले आबादी की बढ़ोतरी रोकना जरूरी है. ABC कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन से इस दिशा में काम किया जा सकता है. इसके बाद प्रशासन के लिए रेबीज और अन्य संबंधित मुद्दों से निपटना आसान हो सकता है. सुनवाई के अंत में हाईकोर्ट ने मामले में अनुपालन से जुड़ी आगे की जानकारी मांगी. अदालत ने महाराष्ट्र सरकार से अब तक किए गए काम और ABC कार्यक्रम के क्रियान्वयन की स्थिति पर आगे की जानकारी देने को कहा है.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 सितंबर की तारीख तय की है. तब अदालत महाराष्ट्र सरकार की ओर से दी जाने वाली अनुपालन रिपोर्ट और ABC कार्यक्रम को लेकर उठाए गए कदमों पर आगे विचार करेगी. फिलहाल अदालत का मुख्य जोर आवारा कुत्तों की संख्या को बढ़ने से रोकने पर है. अदालत के मुताबिक, अगर प्रजनन पर प्रभावी तरीके से रोक लगाई जाती है तो आवारा कुत्तों की आबादी की बढ़ोतरी को नियंत्रित किया जा सकता है. इसके बाद रेबीज नियंत्रण और कुत्तों को खिलाने जैसे मुद्दों को संभालना प्रशासन के लिए आसान होगा.
ABC कार्यक्रम को तेजी से लागू करने की सलाह
इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अदालत ने समस्या के समाधान के लिए पहले उसके मूल कारण यानी आवारा कुत्तों की लगातार बढ़ती संख्या को रोकने पर ध्यान देने की बात कही है. अब मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी, जब अदालत महाराष्ट्र सरकार की ओर से दिए जाने वाले अनुपालन अपडेट पर विचार करेगी.