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नेपाल में बाढ़, पलामू में बेचैनी... हाइड्रो पावर प्लांट में काम करने गए महेंद्र की आवाज सुनने को तरस रहा परिवार

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच झारखंड के पलामू जिले का एक शख्स कई दिनों से लापता है. हैदरनगर प्रखंड के बडंडा बरवाडीह गांव के रहने वाले 50 वर्षीय महेंद्र विश्वकर्मा नेपाल के बाणेश्वर स्थित एक हाइड्रो पावर प्लांट में फैब्रिकेटर का काम करते थे. अचानक उनसे संपर्क टूटने के बाद परिवार की चिंता बढ़ गई है.

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नेपाल में बाढ़ के बीच पलामू का युवक लापता. (Photo: ITG)
नेपाल में बाढ़ के बीच पलामू का युवक लापता. (Photo: ITG)

नेपाल में बाढ़ आई. बहुत कुछ बहा ले गई. घर, दुकानें, सड़कें और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी. लेकिन झारखंड के पलामू में एक परिवार ऐसा है, जिसके लिए ये बाढ़ सिर्फ नेपाल की खबर नहीं है. उनके लिए ये डर की वजह बन गई है. डर इस बात का कि कहीं इस बाढ़ के बीच उनका अपना कोई फंस तो नहीं गया.

पलामू के हैदरनगर प्रखंड के बडंडा बरवाडीह गांव के रहने वाले 50 साल के महेंद्र विश्वकर्मा नेपाल में काम करते हैं. वह वहां बाणेश्वर के एक हाइड्रो पावर प्लांट के निर्माण में फैब्रिकेटर के तौर पर काम कर रहे थे. पिछले कई महीनों से उनका यही ठिकाना था.

महेंद्र की एक आदत थी. घर फोन करना. परिवार से बात करना. हालचाल पूछना और अपना हाल बताना. घरवालों को भी इसी फोन कॉल का इंतजार रहता था. लेकिन फिर अचानक फोन आना बंद हो गया. एक दिन फोन नहीं आया तो परिवार ने खुद फोन किया. मोबाइल बंद मिला. सोचा, शायद काम में व्यस्त होंगे. फिर फोन किया. फिर किया. लेकिन हर बार वही जवाब- मोबाइल बंद.

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दिन बीतते गए और परिवार की बेचैनी बढ़ती गई. इसी बीच नेपाल में भीषण बाढ़ की खबरें आने लगीं. बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबर सामने आई. ये खबर जब महेंद्र के गांव और घर तक पहुंची तो परिवार की चिंता डर में बदल गई. घरवालों के मन में एक ही सवाल था- महेंद्र कहां हैं?

परिजनों ने कंपनी से संपर्क करने की कोशिश की. वहां के अधिकारियों से महेंद्र के बारे में पूछा. कंपनी की तरफ से बताया गया कि वहां काम करने वाले सभी लोग सुरक्षित हैं. ये बात सुनकर परिवार को थोड़ी राहत तो मिली, लेकिन पूरी तसल्ली नहीं हुई. क्योंकि जिस शख्स से बात होनी चाहिए थी, उससे बात ही नहीं हो पा रही थी. महेंद्र का फोन अब भी बंद था.

घर में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

महेंद्र के परिजन लगातार उनका मोबाइल मिलाते रहे. शायद कभी फोन उठ जाए. शायद दूसरी तरफ से महेंद्र की आवाज सुनाई दे और वह कह दें- 'मैं ठीक हूं.' लेकिन ऐसा नहीं हुआ. हर बार फोन बंद मिला. परिवार की बेचैनी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कंपनी के 'सभी लोग सुरक्षित हैं' कहने के बावजूद परिजनों का डर खत्म नहीं हुआ. आखिर महेंद्र की अपनी कोई खबर उनके पास नहीं थी. घरवालों को अब किसी अनहोनी की आशंका सताने लगी है.

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महेंद्र के परिवार ने अब भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से मदद की गुहार लगाई है. उनकी मांग है कि नेपाल में मौजूद भारतीय अधिकारियों और संबंधित हाइड्रो पावर प्लांट के अधिकारियों से संपर्क कर महेंद्र की जानकारी जुटाई जाए. परिजन चाहते हैं कि महेंद्र जहां भी हैं, उनका जल्द पता लगाया जाए और अगर वह सुरक्षित हैं तो उन्हें वापस घर लाया जाए. गांव के लोग भी परिवार के साथ हैं. पंचायत के मुखिया सुदर्शन राम ने भी इस मामले में अधिकारियों से संपर्क कर महेंद्र विश्वकर्मा का पता लगाने का आग्रह करने की बात कही है.

फिलहाल बडंडा बरवाडीह में एक परिवार सिर्फ एक फोन कॉल का इंतजार कर रहा है. वो फोन कॉल, जिसमें महेंद्र की आवाज सुनाई दे. वो कहें- 'घबराइए मत, मैं बिल्कुल ठीक हूं.' और शायद उस एक फोन कॉल के साथ नेपाल की बाढ़ से डरे इस परिवार के घर में फिर से चैन लौट आए.

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