झारखंड में JPSC परीक्षा और नौकरियों के मुद्दों को लेकर चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच सरकार ने आज रविवार रात 8 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. छात्रों के साथ तीन दौर की बातचीत के बाद राज्य सरकार की ओर से मंत्री सुद्विव्य कुमाj ने मीडिया के सामने सरकार का पक्ष रखा.
इस दौरान सरकार ने छात्रों से अपील की है कि वे अपना कल का प्रस्तावित आंदोलन स्थगित कर दें, क्योंकि सरकार उनकी ज्यादातर मांगें मानने को तैयार है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सरकार ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राज्य सरकार 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने के लिए तैयार है. इसके साथ ही, JPSC परीक्षा में पैसों के लेन-देन और गड़बड़ियों के मामलों की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) से भी करवाई जाएगी. मंत्री सुद्विव्य कुमार ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे मामले की गहराई से जांच पहले से ही चल रही है.
एसओपी (SOP) में होगा सुधार, नया ईमेल आईडी जारी
सरकार ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में झारखंड में होने वाली सभी परीक्षाएं पूरी तरह साफ-सुथरी और पारदर्शी तरीके होगी. इसके लिए परीक्षा संचालन प्रक्रिया (SOP) में सुधार किया जाएगा. साथ ही, छात्रों की शिकायतों और सुझावों के लिए सरकार ने एक स्पेशल ईमेल आईडी भी जनरेट की है, ताकि छात्र सीधे अपनी बात रख सकें.
सीजीएल (CGL) एग्जाम्स को लेकर मंत्री सुद्विव्य कुमार ने कहा कि कोर्ट के आदेश के बाद ही सभी सफल अभ्यर्थियों को नौकरियां दी गई हैं. हालांकि, उन्होंने यह कहा कि जो मामले पहले से न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में हैं और जिन्हें कोर्ट के जरिए नौकरियां मिली हैं, उनमें कुछ कानूनी पेचीदगियां आ सकती हैं. इसके अलावा, एसबीआई (SBI) जांच रिपोर्ट के आधार पर दूसरी जेपीएससी के परिणामों की स्थिति को भी अभी देखा जा सकता है.
सरकार ने आंदोलनरत छात्रों और उनके अभिभावकों से हाथ जोड़कर अपील की है कि जब सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है और उन्हें मानने को तैयार है. ऐसे में कल आंदोलन करने की कोई आवश्यकता नहीं है. सरकार ने भरोसा दिलाया है कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होगा, इसलिए वे छात्रहित में अपना आंदोलन वापस लें और सामान्य स्थिति बनाए रखने में मदद करें.
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चंपाई सोरेन का सवाल-परीक्षाएं रद्द करने, CBI जांच में क्या दिक्कत है?
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने एक्स पर एक तीखा ट्वीट करते हुए राज्य सरकार से सवाल किया है. उन्होंने लिखा कि राज्य सरकार नौकरियों की खरीद-फरोख्त के इस गोरखधंधे में शामिल नहीं हैं, तो इतने सारे विवादों और बवाल के बाद भी परीक्षाएं रद्द करने और पूरे मामले की सीबीआई जांच करवाने में सरकार को आखिर क्या दिक्कत आ रही है?
JPSC के तीन सदस्यों ने दिया इस्तीफा
छात्र आंदोलन के बीच JPSC के तीन सदस्यों अजीता भट्टाचार्य, जमील अहमद और अनिमा हांसदा ने इस्तीफा दे दिया है. तीनों ने अपना इस्तीफा राज्यपाल संतोष गंगवार.को भेजा था, जिसे मंजूर कर लिया गया है. इसी बीच CID 10 अगस्त को अजीता भट्टाचार्य से पूछताछ करेगी. भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों की जांच के सिलसिले में उनसे सवाल किए जाएंगे.
इस्तीफा देने वालों में अजीता भट्टाचार्य, जमील अहमद और अनिमा हांसदा शामिल हैं. तीनों ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को भेजा था. राज्यपाल ने इसे मंजूर कर लिया है. इससे पहले 22 जुलाई को JPSC चेयरपर्सन एल खियांग्ते भी इस्तीफा दे चुके थे.
फिलहाल, JPSC की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों की CID जांच कर रही है. इसी सिलसिले में आयोग के सदस्यों से पूछताछ की जा रही है. अब 10 अगस्त को डॉ. अजीता भट्टाचार्य से पूछताछ होनी है.
आंदोलन शांत कराने के लिए सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच तीन दौर की लंबी बातचीत हुई. मुख्यमंत्री ने खुद छात्रों को चिट्ठी लिखकर भरोसा दिलाने की कोशिश की. सरकार का दावा है कि छात्रों की 98 प्रतिशत मांगें मान ली गई हैं. इसके बावजूद कई मुख्य मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी.
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