जिस उम्र में आमतौर पर लोगों के लिए एक किलोमीटर चलना भी मुश्किल हो जाता है, उस उम्र में 85 साल के चंदर ने करीब 250 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर लोगों को हैरान कर दिया. चंदर हरिद्वार से कांवड़ लेकर अपने पैतृक गांव सागरपुर पहुंचे. गांव पहुंचने पर परिवार के लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला और उन्होंने चंदर का जोरदार स्वागत किया. 85 वर्षीय चंदर ने हरिद्वार से अपने गांव तक करीब 250 किलोमीटर की दूरी कांवड़ लेकर तय की. उनके गांव पहुंचने की खबर मिलते ही परिवार के लोगों में खुशी का माहौल बन गया. परिजनों ने उनका स्वागत किया और उनके इस सफर को लेकर उत्साह जताया.
चंदर का कहना है कि भोले बाबा का बुलावा आया था. इसी वजह से वह घर में आराम करने के बजाय करीब 250 किलोमीटर दूर हरिद्वार से कांवड़ लेकर अपने गांव पहुंचे. उनका कहना है कि भगवान शिव के प्रति उनकी आस्था ही उन्हें इस यात्रा के लिए प्रेरित करती है. चंदर ने बताया कि वह पिछले 35 वर्षों से लगातार कांवड़ लेकर आ रहे हैं.
भोले बाबा का बुलावा आया, तो निकल पड़े चंदर
इस बार भी उन्होंने कांवड़ यात्रा की और हरिद्वार से कांवड़ लेकर अपने पैतृक गांव सागरपुर पहुंचे. 85 साल की उम्र में भी चंदर ने इस यात्रा के दौरान किसी परेशानी या दिक्कत का सामना नहीं किया. उनका कहना है कि रास्ते भर उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हुई और वह आसानी से अपनी यात्रा पूरी करके गांव पहुंच गए.
चंदर के गांव पहुंचने पर परिवार के लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला. परिजनों ने उनका जोरदार स्वागत किया. 85 साल की उम्र में करीब 250 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा पूरी करके लौटे चंदर परिवार के बीच आकर्षण का केंद्र बने रहे. चंदर का कहना है कि वह पिछले 35 साल से इसी तरह कांवड़ लेकर आ रहे हैं. उनके लिए यह यात्रा सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि भोले बाबा के प्रति आस्था से जुड़ी हुई है.
कांवड़ लेकर पैतृक गांव सागरपुर पहुंचे बुजुर्ग
उनका मानना है कि जब भोले बाबा का बुलावा आता है तो यात्रा पूरी करने की शक्ति भी मिलती है. हरिद्वार से कांवड़ लेकर सागरपुर पहुंचे 85 वर्षीय चंदर की कहानी अब उनके परिवार के लिए खुशी और गर्व का विषय है. उम्र के इस पड़ाव पर भी उन्होंने करीब 250 किलोमीटर की यात्रा पूरी की और बिना किसी परेशानी के अपने गांव वापस पहुंचे.