कई माता-पिता यह मान लेते हैं कि बच्चे को विटामिन D और कैल्शियम की दवा लंबे समय तक देते रहना चाहिए, लेकिन हर बच्चे को इन सप्लीमेंट्स की जरूरत एक जैसी नहीं होती है. यह बच्चे की उम्र, खान-पान, उसके धूप में रहने के समय और उसकी पूरी हेल्थ पर निर्भर करता है. जन्म के बाद बच्चे को कितना विटामिन डी और कब तक यह देना चाहिए यह फैसला पूरी तरह डॉक्टर की सलाह के हिसाब से करना चाहिए.
नवजात और छोटे बच्चों में विटामिन D की कमी का खतरा अधिक रहता है, खासकर उन बच्चों में जो मां का दूध नहीं पी रहे हैं, ऐसे बच्चों को डॉक्टर की सलाह पर विटामिन D सप्लीमेंट दिया जाता है. आमतौर पर जन्म के बाद शुरुआती महीनों में इसकी जरूरत पर विशेष ध्यान दिया जाता है, लेकिन इसे कब तक जारी रखना है, यह बच्चे की पूरी हेल्थ देखकर तय किया जाता है.
विटामिन D का काम क्या होता है
विटामिन D का काम केवल हड्डियों को मजबूत करना नहीं है. यह शरीर को कैल्शियम अवशोषित करने में मदद करता है. अगर विटामिन D की शरीर में कमी है, तो बच्चे की डाइट में कैल्शियम होने के बावजूद उसका पूरा फायदा शरीर को नहीं मिल पाता है. वहीं, कैल्शियम की जरूरत बच्चे की ग्रोथ के साथ बनी रहती है और बढ़ती उम्र में इसकी जरूरत और बढ़ जाती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर बच्चे को कैल्शियम की गोली देनी जरूरी है. अगर बच्चा दूध रोज पीता है, दही खाता है या पनीर भी खा रहा है तो अलग से कैल्शियम की दवाएं देने की जरूरत नहीं होती है.
कितना विटामिन डी है जरूरी
यशोदा मेडिसिटी हॉस्पिटल में पीडियाट्रिक विभाग में एसोसिएट डायरेक्टर डॉ राहुल वर्मा ने इस बारे में बताया है. डॉ राहुल कहते हैं कि जन्म से लेकर 1 साल की उम्र तक रोजाना 400 IU विटामिन D ड्रॉप्स लेने की सलाह दी जाती है. इसके बाद, क्लिनिकल जांच और ब्लड टेस्ट के आधार पर ज़रूरत पड़ने पर ज्यादा डोज लेने की सलाह दी जा सकती है.
माता-पिता को खास तौर पर इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि विटामिन D या कैल्शियम की दवा अपनी तरफ से लंबे समय तक न दें, जरूरत से ज्यादा सप्लीमेंट भी नुकसान पहुंचा सकते हैं. अगर बच्चे में बार-बार हड्डियों में दर्द, कमजोरी, मांसपेशियों में परेशानी, ग्रोथ धीमी होना या पोषण की कमी जैसे संकेत दिख रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.
यह भी पढ़ें: विटामिन डी की गोलियां इन 2 चीजों के बिना खाना है बेकार, शरीर में नहीं होगा एब्सॉर्ब
बच्चे के लिए धूप भी है बहुत जरूरी
डॉ राहुल वर्मा कहते हैं कि बच्चों के लिए सिर्फ सप्लीमेंट पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार, उम्र के अनुसार शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त धूप पर ध्यान देना जरूरी है. सप्लीमेंट की जरूरत है या नहीं और कितने समय तक देनी है, इसका फैसला बच्चे की जरूरत के आधार पर बाल रोग विशेषज्ञ को करना चाहिए.