उत्तर प्रदेश का बताकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है. वीडियो में महिला पुलिसकर्मी कई लड़कियों को अपने साथ ले जाते हुए दिखाई दे रही हैं. इन लड़कियों ने अपना मुंह ढका हुआ है.
कुछ लोगों का कहना है कि ये वाराणसी का वीडियो है, जहां देह व्यापार में शामिल 20 से ज्यादा लड़कियों को गिरफ्तार कर लिया गया.
वीडियो को एक्स पर शेयर करते हुए एक व्यक्ति ने लिखा, “बाप बेटी को पढ़ने भेजता है और बेटी. ये मामला वाराणसी उप्र का हैं जहाँ कुछ लड़कियों को होटल से गिरफ्तार किया गया है. लड़की सब पढ़ने वाली हैं लेकिन नये ज़माने के शौक ने सबको व्यापार करना सिखा दिया, महंगी कार, महंगी मोबाइल और रोजमर्रा के खर्च ने सबको दलदल में धकेल दिया.”

आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये वीडियो वाराणसी नहीं, बिहार के अरवल का है, जहां पुलिस ने एक रेडलाइट एरिया में छापेमारी के दौरान कई लड़कियों को रेस्क्यू किया था.
कैसे पता चली सच्चाई?
वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने पर हमें ये स्वराज पोस्ट नाम के एक न्यूज आउटलेट के यूट्यूब चैनल पर मिला. यहां इसे 6 जुलाई को अपलोड किया गया था. कैप्शन के मुताबिक, ये बिहार के अरवल का मामला है, जहां छापेमारी के बाद कई नाबालिग लड़कियों को रेस्क्यू किया गया था.
उस वक्त कई लोकल न्यूज आउटलेट्स ने ये वीडियो शेयर किया था और बिहार के अरवल का बताया था. दैनिक भास्कर की 5 जुलाई की रिपोर्ट में भी उन लड़कियों को देखा जा सकता है, जो वायरल वीडियो में नजर आ रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने कथित देह व्यापार के एक नेटवर्क के खिलाफ 5 जुलाई को अरवल जिला मुख्यालय के जनकपुर धाम इलाके में छापेमारी की थी. इसमें 8 नाबालिग लड़कियों को रेस्क्यू किया गया था और महिला संचालिकाओं सहित कुल 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया था.
प्रभात खबर की 5 जुलाई की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने अरवल रेड लाइट एरिया में ये छापेमारी एक एनजीओ की शिकायत के बाद की थी. पुलिस ने लगभग दर्जन भर लड़कियों को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए महिला थाना भेज दिया था. इसके अलावा काशी DCP ने भी 10 अगस्त को एक एक्स पोस्ट के जरिए वायरल वीडियो के साथ किए जा रहे दावों का खंडन किया और बताया कि ये वीडियो उत्तर प्रदेश का नहीं है.
साफ है कि बिहार के अरवल में हुई पुलिस कार्रवाई के वीडियो को यूपी का बताकर झूठ फैलाया जा रहा है.