scorecardresearch
 

Gen-Z पर भड़कीं इला अरुण, बोलीं- संयम भूल जाएंगे तो खुद को नंगा...

बॉलीवुड की फेमस एक्ट्रेस और राजस्थानी फोक सिंगर इला अरुण जब 'आजतक पंचायत राजस्थान' के मंच पर पहुंचीं. इस दौरान उन्होंने बेबाकी से अपनी बात रखी.

Advertisement
X
पंचायत आजतक में इला अरुण (Photo: ITG)
पंचायत आजतक में इला अरुण (Photo: ITG)

अपनी बुलंद आवाज से देश-दुनिया में कला का परचम लहराने वाली फेमस एक्ट्रेस और राजस्थानी फोक सिंगर इला अरुण गुरुवार को 'आजतक पंचायत राजस्थान' के मंच पर पहुंचीं. इस दौरान उन्होंने अपनी जड़ों, कला, राजस्थानी संगीत और बेबाक बयानों से सभी का ध्यान खींच लिया.

चाहे बात मुंबई में रहकर अपनी माटी से जुड़े रहने की हो, या फिर 'चोली के पीछे क्या है' जैसे चर्चित गानों पर छिड़े विवादों की, इला अरुण ने हर मुद्दे पर खुलकर और अपने चिर-परिचित अंदाज में बात की.

माटी से जुड़ाव और राजस्थान की जड़ें

जब उनसे पूछा गया कि वह राजस्थान की हैं लेकिन मुंबई जाने के बाद क्या उनका मन बदला, तो इला अरुण ने बड़े ही सहज अंदाज में जवाब दिया. उन्होंने कहा कि उनकी पैदाइश जोधपुर की है और वह जयपुर में पली-बढ़ी हैं. उनका मानना है कि अगर इंसान की जड़ें मजबूत हों, तो जिंदगी का कोई भी तूफान उसे हिला नहीं सकता. मुंबई में रहने के बावजूद उनकी कला और उनके संस्कारों में हमेशा राजस्थान की माटी की खुशबू जिंदा रही है.

राजस्थान और बाहर परफॉर्म करने के अंतर पर बात करते हुए उन्होंने दिल की बात खुलकर रखी. इला ने कहा कि उन्होंने यहां ज्यादा परफॉर्म नहीं किया है, क्योंकि बात दूर तक निकल जाएगी. उनके गानों पर आज भी तीन-तीन पीढ़ियां झूम रही हैं और उन्होंने राजस्थान को विश्व पटल पर पहुंचाया है. 

Advertisement

उन्हें दुनियाभर से अथाह प्यार मिला है, लेकिन जब बात अपने राज्य की आई, तो उनका दर्द भी छलका. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब यहां IIFA जैसे बड़े आयोजन हुए, तो उन्हें नहीं बुलाया गया. प्रवासी भारतीयों के लिए बॉलीवुड सिंगर्स को बुलाया जाता है, लेकिन उन्हें याद नहीं किया जाता. हालांकि, उन्हें इस बात का कोई मलाल नहीं है क्योंकि आम जनता का प्यार उनके साथ है और वही उनका असली अवॉर्ड है.

विवादित गानों पर बेबाक राय

विवादित गानों के दौर और आज के गानों की तुलना पर इला अरुण ने साफ किया कि 'चोली के पीछे क्या है' कोई वल्गर गाना नहीं था. सुभाष घई 'खलनायक' फिल्म के 50 साल मना रहे हैं, और उस गाने में लड़के का सवाल था तो लड़की ने भी जवाब में यही कहा था कि चोली के पीछे दिल है मेरा. उन्होंने कहा कि आनंद बक्शी जैसे दिग्गज ने इसे बहुत समझ के साथ लिखा था. 

इसके अलावा उन्होंने 'घाघरा' जैसे गाने का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने हमेशा लड़कियों के लिए और राजस्थानी संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए काम किया है, लेकिन लोगों ने सिर्फ एकतरफा सोच रखी. उन्होंने यह भी बताया कि कई बार जब गानों के लिरिक्स और क्रिएटिविटी अच्छी नहीं लगी, तो उन्होंने खुद खराब गानों को गाने से इनकार भी किया.

Advertisement

जेन-जी, भाषा की मर्यादा और बिगड़ते रैप सॉन्ग्स

आज की युवा पीढ़ी (जेन-जी) और उनके धरने-प्रदर्शन के तरीकों पर बात करते हुए उन्होंने चिंता जताई. उन्होंने साफ कहा कि भाषा व्यक्ति का वस्त्र होती है, और अगर आप संयम भूल जाएंगे तो छिछोरी भाषा कहेंग तो आप खुद को ही नंगा साबित करेंगे. प्रधानमंत्री या किसी भी बड़े पद पर बैठे व्यक्ति के लिए गलत भाषा का इस्तेमाल करने वालों से वह बिल्कुल सहमत नहीं हैं. 

एक वाकये का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब एक रॉकस्टार के कार्यक्रम में उन्होंने युवा पीढ़ी, खासकर लड़कियों को होश खोते देखा, तो उन्हें बहुत शर्म आई. उन्होंने कहा कि संस्कृति को भूलना और इस तरह का बर्ताव करना सरकार की नहीं बल्कि मां-बाप और खुद युवाओं की जिम्मेदारी है. आजकल के बिगड़े हुए रैप सॉन्ग्स के लिए भी उन्होंने सीधे तौर पर युवाओं की सोच को जिम्मेदार ठहराया.

'चरखा' और नारी शक्ति का संदेश

कार्यक्रम के अंत में अपने मशहूर 'चरखा' गाने पर बात करते हुए इला अरुण ने बताया कि यह चरखा 400 साल पुराना है और समय के साथ हर चीज को बदलना पड़ता है, जिसे लोगों ने खूब पसंद भी किया. राजस्थान में  ऐसा कोई नहीं है, आज जिसने इस गाने पर रील नहीं बनाया.  

Advertisement

अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि औरत सिर्फ उनका कोई तयशुदा विषय नहीं है, बल्कि वह खुद एक औरत हैं और गर्व से मानती हैं कि अगर औरत है, तो ही भारत है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement