उत्तर प्रदेश में साल 2027 के विधानसभा चुनावों का राजनीतिक रण अब धीरे-धीरे अपने परवान चढ़ने लगा है. सत्ता के सिंहासन तक पहुंचने के लिए सभी सियासी दलों ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है. इसी कड़ी में बीजेपी और आरएलडी गठबंधन ने पश्चिमी यूपी में सियासी जमीन को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हापुड़ से मिशन-2027 का आगाज कर सकते हैं.
पश्चिमी यूपी में अपनी चुनावी रणनीति को धार देने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पैतृक गांव नूरपुर से बीजेपी और आरएलडी संयुक्त चुनावी अभियान शुरू करेंगी. आरएलडी ने पीएम नरेंद्र मोदी को 23 दिसंबर को चौधरी चरण सिंह की जयंती पर हापुड़ के नूरपुर में आयोजित होने वाली रैली में शामिल होने का निमंत्रण दिया है.
चौधरी चरण सिंह के बहाने बीजेपी और आरएलडी ने पश्चिमी यूपी और बृज क्षेत्र की 136 विधानसभा सीटों को साधने का प्लान बनाया है. बीजेपी और आरएलडी की नजर वेस्ट यूपी के गुर्जर और जाट वोटों को एकजुट करने पर है.
पीएम मोदी और जयंत चौधरी की संयुक्त रैली
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की 23 दिसंबर को जयंती है, उसी दिन आरएलडी प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने कार्यक्रम रखा है. हापुड़ का नूरपुर चौधरी चरण सिंह का पैतृक गांव रहा है. ऐसे में अब उनकी जयंती पर होने वाली रैली में पीएम मोदी और जयंत चौधरी एक साथ मंच पर नजर आएंगे.
बीजेपी और आरएलडी की इस संयुक्त रैली में पीएम मोदी और रालोद प्रमुख जयंत चौधरी के साथ बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल होंगे. इसके अलावा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सहित पश्चिमी यूपी के तमाम दिग्गज नेता उपस्थित रहेंगे. यह कार्यक्रम ऐसे समय प्रस्तावित है जब सपा पश्चिमी यूपी में जाट और गुर्जर समुदायों के बीच अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है.
जाट और गुर्जर को साधने का बीजेपी प्लान
पश्चिमी यूपी में बीजेपी और आरएलडी की नजर जाट और गुर्जर वोटों को एकजुट रखने की है. 2014 से बीजेपी इन दोनों वोटबैंक के सहारे लोकसभा और विधानसभा के चुनाव जीतती रही है, लेकिन 2024 में यह समीकरण बिगड़ा है. सपा गुर्जर वोटों को साधने के लिए लगातार एक्सरसाइज कर रही है, जिसे देखते हुए पीएम मोदी की 2027 के चुनाव के लिहाज से पहली जनसभा को पश्चिमी यूपी में रखा गया है.
आरएलडी का जाट परंपरागत वोटर माना जाता है तो बीजेपी गुर्जर वोटों को अपने पाले में रखकर पश्चिमी यूपी के सियासी समीकरण में खुद को मजबूत बनाए हुए है. जाट और गुर्जर केमिस्ट्री पश्चिमी यूपी में जीत की गारंटी माने जाते हैं. इसीलिए बीजेपी और आरएलडी दोनों ही इस वोटबैंक को लेकर किसी तरह का कोई रिस्क नहीं लेना चाहती हैं.
पश्चिमी यूपी की 136 सीट साधने की रणनीति
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में चौधरी चरण सिंह को किसान और ग्रामीण समाज का सबसे बड़ा मसीहा माना जाता है. पश्चिमी यूपी और बृज क्षेत्र को मिलाकर तकरीबन 136 विधानसभा सीटें होती हैं, जो जाट और किसान प्रभाव वाली हैं. इस तरह सूबे की सत्ता की दशा और दिशा तय करने में इस इलाके और क्षेत्र में रहने वाले लोगों की निर्णायक भूमिका होती है.
केंद्र की मोदी सरकार द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को 'भारत रत्न' से सम्मानित किए जाने के बाद से पश्चिमी यूपी में भाजपा और रालोद का यह गठबंधन वैचारिक रूप से और अधिक मजबूत हुआ है. हापुड़ में प्रस्तावित इस बड़ी जनसभा के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रालोद प्रमुख जयंत चौधरी एक बार फिर साझा मंच साझा करते नजर आ सकते हैं. इसके जरिए पार्टी पश्चिमी यूपी के कोने-कोने तक यह संदेश देने की तैयारी में है कि किसान हितों के प्रति एनडीए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
विपक्ष की चुनौतियों का जवाब देने का एनडीए दांव
न उत्तर प्रदेश के पिछले राजनीतिक इतिहास को देखें तो पश्चिमी यूपी में सपा-कांग्रेस गठबंधन और अन्य क्षेत्रीय दल लगातार अपनी पकड़ मजबूत करने की जुगत में हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का हापुड़ से चुनावी हुंकार भरना विपक्ष की तमाम रणनीतियों की हवा निकालने के लिए काफी माना जा रहा है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हापुड़ की इस प्रस्तावित रैली के जरिए भाजपा सिर्फ हापुड़ या आसपास की स्थानीय सीटों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि इसका असर पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की हवा पर पड़ेगा. जाट-गुर्जर समीकरण और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को आगे रखकर एनडीए गठबंधन एक बार फिर 2017 और 2022 जैसी सफलता को 2027 में दोहराने की फिराक में है.
प्रधानमंत्री मोदी के इस हापुड़ दौरे और चौधरी चरण सिंह की विरासत के सियासी उपयोग से एनडीए को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों पर कितना सियासी लाभ मिलता है. बीजेपी और आरएलडी की संयुक्त रैली पर सभी की नजर है. अब देखना है कि किस तरह से सियासी नैरेटिव सेट करते हैं पीएम मोदी और जयंत?