हापुड़ पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक जिला-स्तरीय शहर, व्यापार का बड़ा केंद्र और औद्योगिक हब है, और यह दिल्ली नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) का हिस्सा है. यह लंबे समय से आस-पास के इलाकों के लिए एक अहम बाजार रहा है और साथ ही पश्चिमी यूपी की राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीटों में से एक रहा है.
1957 के विधानसभा चुनावों से पहले बनी हापुड़ सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है और मेरठ लोकसभा सीट के पांच हिस्सों में से एक है. इसमें हापुड़ म्युनिसिपल बोर्ड का इलाका, बाबूगढ़ नगर पंचायत और इस क्षेत्र के कई गांव शामिल हैं, जिससे इस सीट का स्वरूप शहरी और ग्रामीण दोनों तरह का है.
हापुड़ में अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. शुरुआती सालों में कांग्रेस का दबदबा रहा और उसने अब तक सबसे ज्यादा सात बार यह सीट जीती है. बीजेपी ने यह सीट चार बार जीती है, जिसमें पिछले दो चुनाव भी शामिल हैं, जबकि बीएसपी ने इसे दो बार जीता है. रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया, भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भी एक-एक बार यह सीट जीती है.
कांग्रेस के गजराज सिंह ने 2012 में चौथी बार जीत हासिल की. इससे पहले वे 1985, 1989 और 1993 में भी यह सीट जीत चुके थे. उन्होंने मौजूदा बीएसपी विधायक धर्मपाल सिंह को 22,152 वोटों से हराया. धर्मपाल सिंह ने इससे पहले 2002 और 2007 में लगातार दो बार बीएसपी के लिए यह सीट जीती थी.
बीजेपी ने 2017 में विजय पाल के जरिए यह सीट जीती, जिन्होंने मौजूदा कांग्रेस विधायक गजराज सिंह को 15,006 वोटों से हराया. 2022 में, विजय पाल ने बीजेपी के लिए यह सीट बरकरार रखी और गजराज सिंह को 7,034 वोटों से हराया. गजराज सिंह तब RLD में शामिल हो गए थे. विजय पाल को 97,862 वोट मिले, जबकि गजराज सिंह को 90,828 वोट मिले.
लोकसभा चुनावों में भी हापुड़ के वोटिंग पैटर्न में बदलाव देखा गया है. हापुड़ सीट पर 2009 में BJP, BSP से 1,703 वोटों से आगे थी और 2014 में यह अंतर बढ़कर 31,729 वोट हो गया, जबकि 2019 में BSP ने BJP पर 18,446 वोटों की बढ़त बनाई. 2024 में, इस सीट पर समाजवादी पार्टी BJP से 11,622 वोटों से आगे रही, भले ही मेरठ सीट पर कुल मिलाकर BJP के अरुण गोविल जीते. यह पैटर्न दिखाता है कि यहां विधानसभा और संसदीय चुनाव के नतीजे हमेशा एक ही दिशा में नहीं जाते हैं.
समय के साथ यहां वोटरों की संख्या लगातार बढ़ी है. रजिस्टर्ड वोटरों की संख्या 2012 में 296,679, 2017 में 345,001, 2019 में 357,554, 2022 में 368,481 और 2024 में 380,186 थी. वोटिंग प्रतिशत भी आम तौर पर अच्छा रहा है- 2012 में 62.38%, 2017 में 64.54%, 2019 में 65.74%, 2022 में 67.01% और 2024 में 59.67%.
हापुड़ हिंदू-बहुसंख्यक सीट है. यह एक आरक्षित सीट है जहां अनुसूचित जाति के वोटर एक बड़ा समूह बनाते हैं और कुल वोटरों का 26.87% हिस्सा हैं. शहरी वोटरों की संख्या ग्रामीण वोटरों से थोड़ी ज्यादा है. 55.37% वोटर शहरी हैं जबकि 44.63% वोटर गांवों में रहते हैं. इस वजह से, आस-पास की कई ग्रामीण सीटों की तुलना में इस सीट का स्वरूप ज्यादा मिला-जुला है. इस सीट पर दलित, OBC और व्यापारी जातियों के वोटरों का असर रहा है, जिससे यहां पार्टियों के बीच मुकाबला कड़ा बना रहता है.
हापुड़ का इतिहास आधुनिक राजनीतिक दौर से भी बहुत पुराना है. मुगल काल से पहले, यह पश्चिमी गंगा के मैदानी इलाके में एक बस्ती के तौर पर विकसित हुआ था. अपनी लोकेशन की वजह से यह आस-पास के इलाके के लिए एक लोकल मार्केट के तौर पर उभरा. मुगल काल में, दिल्ली इलाके को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाले व्यापारिक रास्तों की वजह से इसका महत्व और बढ़ गया. अंग्रेजों के समय में, मैदानी इलाके में होने और आस-पास के कस्बों व परिवहन मार्गों से जुड़े होने के कारण हापुड़ एक प्रशासनिक और व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ.
भौगोलिक दृष्टि से, हापुड़ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जलोढ़ मैदानों में स्थित है. यहां की जमीन समतल और उपजाऊ है, जिससे शहर के आस-पास और पूरे निर्वाचन क्षेत्र में खेती को बढ़ावा मिला है. इलाके की समतल जमीन और सड़क संपर्क ने इसे व्यापारिक केंद्र और छोटे उद्योगों के आधार के रूप में विकसित होने में भी मदद की है.
सड़क संपर्क हापुड़ की मुख्य खूबियों में से एक है. यह हाईवे और जिला सड़कों के जरिए गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर और बड़े NCR क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, साथ ही दिल्ली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा तक सड़क मार्ग से यात्रा करना भी आसान है. हापुड़ एक महत्वपूर्ण रेलवे कॉरिडोर पर भी स्थित है, जहां से रेल संपर्क इसे दिल्ली, मेरठ, मुरादाबाद और पश्चिमी यूपी के अन्य हिस्सों से जोड़ते हैं.
यहां की मौजूदा अर्थव्यवस्था में व्यापार, कृषि, परिवहन, सेवाएं और छोटे पैमाने पर विनिर्माण शामिल हैं. हापुड़ खास तौर पर स्टेनलेस स्टील के पाइप और ट्यूब, पापड़, पेपर कोन और इनसे जुड़े उद्योगों के लिए जाना जाता है. इसके थोक बाजार और परिवहन गतिविधियां इसे आस-पास के गांवों और छोटी बस्तियों के लिए एक सेवा केंद्र भी बनाती हैं.
आस-पास के कस्बों और शहरों में गढ़मुक्तेश्वर (लगभग 20 किमी दूर), बुलंदशहर (लगभग 35 किमी दूर), मेरठ (लगभग 35 किमी दूर), गाजियाबाद (लगभग 45 किमी दूर), नोएडा (लगभग 55 किमी दूर), ग्रेटर नोएडा (लगभग 50 किमी दूर), दिल्ली (लगभग 60 किमी दूर) और राज्य की राजधानी लखनऊ (सड़क मार्ग से लगभग 433 किमी दूर) शामिल हैं. NCR और पश्चिमी यूपी क्षेत्र के बीच स्थित होने के कारण हापुड़ को व्यापारिक और राजनीतिक, दोनों तरह का महत्व मिला है.
भले ही BJP ने पिछले दो विधानसभा चुनावों में यह सीट जीती हो, लेकिन जीत का अंतर इतना बड़ा नहीं रहा है कि इस सीट को बनाए रखना उसके लिए आसान हो. संसदीय चुनावों में पार्टी का मिला-जुला प्रदर्शन बताता है कि 2027 में स्थानीय समीकरण, उम्मीदवार का चयन, जातिगत संतुलन और गठबंधन की स्थिति बहुत मायने रखेगी. संभावना है कि 2027 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जिन सीटों पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी, उनमें हापुड़ भी शामिल होगी.
(अजय झा)
Gajraj Singh
RLD
Manish Singh
BSP
Bhavna
INC
Nota
NOTA
Chandrapal Singh
IND
Dr B P Nilaratna
ASPKR
Kiran Pal
BMUP
Kailashchand
IND
Veerpal Singh
AAAP
Sanjeev Gandhi
IND
Kapil Kumar
IND
Dharmendra
BaJD
उत्तर प्रदेश की राजनीति में दो दशक से जगह तलाश रही जेडीयू ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए बिहार के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को कमान सौंपी है. एनडीए गठबंधन के तहत पूर्वांचल की कुर्मी बहुल सीटों पर ध्यान केंद्रित करते हुए पार्टी इस बार निशांत की अगुवाई में अपनी चुनावी किस्मत आजमाने की तैयारी में है.
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह सक्रिय हो गई है. राज्य में आने वाली राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए पार्टी ने एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है. जमीनी स्तर पर चुनावी प्रचार की कमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही संभाल रखी है. हालांकि, अब बड़ी खबर यह आ रही है कि 20 नवंबर के बाद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह खुद उत्तर प्रदेश में बीजेपी के चुनाव प्रचार का नेतृत्व करेंगे.
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है. अयोध्या का मुद्दा एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच मुख्य राजनीतिक केंद्र बन गया है. विपक्ष जहां अयोध्या मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर सत्तारूढ़ दल को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं बीजेपी इस बहाने राम मंदिर आंदोलन के इतिहास और 1990 के गोलीकांड को याद दिलाकर पलटवार कर रही है. बीजेपी नेताओं का आरोप है कि 1990 में कारसेवकों पर गोलियां चलाई गई थीं, जिसमें कई रामभक्तों की जान गई थी.
Bulandshahr District Profile: उत्तर प्रदेश का बुलंदशहर जिला खुर्जा की विश्व प्रसिद्ध पॉटरी, गंगा नदी, नरौरा परमाणु ऊर्जा केंद्र और ऐतिहासिक-धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है. राजनीतिक दृष्टि से भी यह जिला खास रहा है. 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बुलंदशहर की सभी सातों सीटों पर जीत दर्ज कर क्लीन स्वीप किया था.
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने बड़ा दांव खेलते हुए 3 नवंबर से प्रदेश के सभी 6 संगठनात्मक क्षेत्रों में 'लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ' पदयात्रा अभियान की शुरुआत कर रही है. इस अभियान के तहत बीजेपी अपने दिग्गज नेताओं को उतारकर सियासी माहौल बनाने का काम करेगी.
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है. लखनऊ में गृह मंत्री अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर 350 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य दिया है. उन्होंने राज्य में बीजेपी सरकार की तुलना अंगद के पांव से की, जिसे हिलाना मुश्किल है. शाह ने हैट्रिक लगाने पर यूसीसी यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का भी वादा किया. दूसरी ओर, एमएलसी चुनाव के नतीजों से उत्साहित समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी 2027 में सरकार बनाने का दावा ठोका है. एमएलसी चुनाव में वाराणसी, लखनऊ और आगरा जैसे अहम क्षेत्रों में सपा के बेहतर प्रदर्शन ने बीजेपी के सामने नई चुनौतियां पेश की हैं. देखें.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में जीत की हैट्रिक लगाने के लिए बीजेपी ने पीएम मोदी, अमित शाह और नितिन के नेतृत्व में मेगा प्रचार अभियान की रूपरेखा तैयार किया गया है. पार्टी ने दिवाली के बाद चुनावी शंखनाद करने की रणनीति बनाई है, जिसके तहत 18 मंडलों में पीएम मोदी की रैलियों के साथ-साथ बूथ स्तर पर 50-50 परिवारों से संपर्क साधने का माइक्रोमैनेजमेंट प्लान लागू किया जाएगा.
दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की महारैली को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोला. अखिलेश यादव ने कहा कि रामलीला मैदान लोकतंत्र की हल्दीघाटी बन चुका है. उन्होंने बीजेपी पर चुनाव आयोग और प्रशासनिक तंत्र का गलत इस्तेमाल कर वोटर लिस्ट से नाम हटाने का गंभीर आरोप लगाया. अखिलेश ने कहा कि यूपी में लाखों मतदाताओं के नाम सूची से काटे गए हैं, ताकि लोकतंत्र को कमजोर किया जा सके.
दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्ष की महारैली के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर जमकर निशाना साधा. अखिलेश यादव ने रैली में आई भारी भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि बीजेपी को सत्ता से हटाने के लिए सभी को एकजुट होना पड़ेगा. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो लोग उत्तर प्रदेश के रास्ते दिल्ली की सत्ता में आए थे, अब उत्तर प्रदेश की जनता ही उन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों का शंखनाद हापुड़ के नूरपुर से करने जा रहे हैं, जहां वे और रालोद प्रमुख जयंत चौधरी चौधरी चरण सिंह की जयंती पर एक साझा मंच साझा करेंगे. इस रैली के जरिए बीजेपी और रालोद का गठबंधन पश्चिमी यूपी और बृज क्षेत्र की 136 विधानसभा सीटों पर जाट-गुर्जर समीकरण को साधने का प्लान है.