राष्ट्रीय लोक दल (Rashtriya Lok Dal) (RLD) एक क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी है, जो मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और राजस्थान में सक्रिय है. इसकी स्थापना 1996 में चौधरी अजीत सिंह (Chaudhary Ajit Singh) ने की थी. वे भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौदरी चरण सिंह के बेटे थे.
1996 में अजीत सिंह कांग्रेस पार्टी से चुनाव जीतकर सांसद बने थे, लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी और लोकसभा दोनों से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी “भारतीय किसान कामगार पार्टी” बनाई और 1997 में बागपत सीट से उपचुनाव जीतकर फिर सांसद बने. 1999 में उन्होंने अपनी पार्टी का नाम बदलकर “राष्ट्रीय लोक दल” रख दिया. इस दौरान वे 1999, 2004 और 2009 के लोकसभा चुनाव जीतने में सफल रहे. 2001 से 2003 तक वे अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कृषि मंत्री भी रहे.
बाद में 2011 में उनकी पार्टी United Progressive Alliance (UPA) में शामिल हुई, जिसके बाद वे दिसंबर 2011 से मई 2014 तक नागरिक उड्डयन मंत्री रहे. 2014 से 2022 के बीच RLD का प्रदर्शन कमजोर रहा और पार्टी अपनी पारंपरिक सीटें भी खो बैठी. 2019 के लोकसभा चुनाव में अजित सिंह मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़े, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में RLD ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया और 33 में से 9 सीटें जीतकर अच्छी वापसी की.
इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी NDA में शामिल हो गई, जो बीजेपी के नेतृत्व में है. इस चुनाव में RLD ने जिन दो सीटों- बिजनौर और बागपत पर चुनाव लड़ा, दोनों पर जीत हासिल की.
30 अगस्त को लखनऊ में रालोद का राष्ट्रीय सम्मेलन होगा, जिसमें जयंत चौधरी संगठन और 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर मंथन करेंगे. जाट और ब्राह्मण समीकरण, ब्राह्मण समाज में बढ़ती सक्रियता और बूथ स्तर तक तैयारी के जरिए रालोद सपा को सीधी चुनौती देने की कोशिश में है.
बागपत के पलड़ी गांव में आयोजित RLD के अल्पसंख्यक सम्मेलन में प्रदेशाध्यक्ष दिलनवाज खान ने अखिलेश यादव के 'चवन्नी को रुपया बनाने' वाले बयान पर पलटवार किया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव के सपने में आजकल चौधरी साहब आते हैं, इसलिए वह घबराकर ऊलजलूल बयान दे रहे हैं.
राष्ट्रीय लोक दल ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के “चवन्नी को उठाकर रुपया बना दिया” वाले बयान को आपत्तिजनक बताया है. उन्होंने इसे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की विचारधारा और पूरे किसान समाज का अपमान बताया है.
उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी की सियासी चाल बदली-बदली नजर आ रही है. बीजेपी के साथ दोस्ती का रंग अब उन पर चढ़ने लगा है. इसीलिए जाट-मुस्लिम समीकरण के बजाय जाटों की किसान अस्मिता को सनातन और सवर्ण पहचान देने में जुटे हैं.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी अपना सियासी समीकरण दुरुस्त करने में जुट गए हैं. बीजेपी के साथ दोस्ती का असर भी जयंत चौधरी पर दिखने लगा है. इसी का नतीजा है कि जाट-मुस्लिम के बजाय जयंत चौधरी अब जाट-ब्राह्मण केमिस्ट्री बनाने में जुट गए हैं.
जयंत चौधरी की पार्टी की नजर पारंपरिक आधार वाली सीटों के साथ ही नई सीटों पर भी है. आरएलडी पू्र्वांचल में भी एक से दो विधानसभा सीटों पर नजर गड़ाए हुए है, जहां वह उम्मीदवार उतारना चाहती है.
आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी गुरुवार को मुरादाबाद से मिशन-2027 के लिए हुंकार भरेंगे. मुरादाबाद सपा का मजबूत गढ़ माना जाता है, जहां से रैली करके जयंत चौधरी आरएलडी के लिए सियासी जमीन तैयार करने का काम करेंगे. अब देखना है कि बीजेपी के लिए बंजर जमीन को कितना सींच पाएंगे?