चौधरी जयंत सिंह (Chaudhary Jayant Singh) एक राजनीतिज्ञ हैं. वे राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. वे 2024 से कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री हैं. राष्ट्रीय लोक दल (RLD)के सदस्य के तौर पर, वे 2022 से उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य हैं. इससे पहले, वे मथुरा से 15वीं लोकसभा के सदस्य भी रह चुके हैं. वे उत्तर प्रदेश के चौधरी परिवार की तीसरी पीढ़ी के सदस्य और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह के पोते हैं.
2024 लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की और पीएम नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में पहली बार कैबिनेट राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाए गए.
वह भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर प्रमुख प्रस्तावकों में से एक थे और उन्होंने लोकसभा में भूमि अधिग्रहण पर एक निजी सदस्य विधेयक पेश किया था. जयंत सिंह चौधरी वाणिज्य पर स्थायी समिति, वित्त पर सलाहकार समिति, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), और सरकारी आश्वासनों की समिति के सदस्य थे. उन्होंने पहले कृषि और वित्त पर स्थायी समितियों के साथ-साथ आचार समिति में भी काम किया है. जयंत ने 2014 के भारतीय आम चुनाव में मथुरा से दोबारा चुनाव लड़ा लेकिन भाजपा उम्मीदवार हेमा मालिनी के खिलाफ अपनी सीट हार गए. जयंत चौधरी फिक्की इंडो-ब्रिटिश फोरम ऑफ पार्लियामेंटर्स के सह-अध्यक्ष और इंडो-वेनेजुएला पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप के सदस्य थे (Jayant Chaudhary Political Career)
जयंत चौधरी का जन्म 27 दिसंबर 1978 को हुआ था (Jayant Chaudhary Date of Birth). वे चौधरी अजीत सिंह और राधिका सिंह के बेटे हैं (Jayant Chaudhary Parents). जयंत ने अपनी स्नातक की पढ़ाई श्री वेंकटेश्वर कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से की और 2002 में लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस से अकाउंटिंग एंड फाइनेंस में एमएससी किया (Jayant Chaudhary Education). जयंत की शादी चारू सिंह से हुई है (Jayant Chaudhary Wife) और इनके दो बेटियां हैं (Jayant Chaudhary Daughters).
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है. हाल ही में केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है, क्योंकि राज्य में उपचुनाव नजदीक हैं. दिल्ली से लेकर अमरोहा तक इस बैठक को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं.
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने बीजेपी को रोकने के लिए गठबंधन का प्रस्ताव दिया है और इसके लिए 2 अक्टूबर तक की समय सीमा तय की है. ओवैसी के इस बयान पर अन्य विपक्षी नेताओं का कहना है कि उनके अलग चुनाव लड़ने से सीधे तौर पर बीजेपी को फायदा पहुंचता है. यूपी की सियासत में इन तमाम गतिविधियों से 2027 की जंग बेहद दिलचस्प होने वाली है.
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी अब खेल के मैदान के बाद जल्द ही राजनीति के मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं. हाल ही में राष्ट्रीय लोक दल यानी आरएलडी (RLD) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के साथ मोहम्मद शमी की एक मुलाकात की तस्वीर सामने आई है, जिसके बाद से ही उत्तर प्रदेश की सियासत में चर्चाएं बेहद तेज हो गई हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मोहम्मद शमी उत्तर प्रदेश की अमरोहा सदर विधानसभा सीट से खुद या फिर अपने भाई को चुनाव लड़ाने की योजना बना रहे हैं.
मोहम्मद शमी जयंत चौधरी से क्यों मिलने पहुंचे थे? RLD ने मुलाकात की वजह बताई है. इसके बाद शमी के राजनीति में आने को लेकर अटकलें शुरू हुई थीं.
2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले क्रिकेटर मोहम्मद शमी और जयंत चौधरी की मुलाकात ने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है. कयास लगाए जा रहे हैं कि शमी खुद या अपने भाई को अमरोहा सीट से आरएलडी के टिकट पर मैदान में उतार सकते हैं.
एआईएमआईएम (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मैं जयंत चौधरी और उनकी पत्नी को अच्छी तरह जानता हूं. उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते कि उत्तर प्रदेश में तीसरी बार BJP की सरकार बने. अगर कोई नहीं चाहता कि BJP सरकार बनाए, तो वे हमसे बात कर सकते हैं.
2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव और लोकदल अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह की मुलाकात ने पश्चिमी यूपी की सियासत को फिर चर्चा में ला दिया है. सुनील सिंह ने अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाने की बात कही है और लोकदल करीब 35 सीटों पर तैयारी कर रहा है.
केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने सोमवार को अंकित बालियान के परिवार से मुलाकात की. उन्होंने इसे सुनियोजित हत्या बताया है. उनका कहना है कि ऐसे मामलों में राज्य की जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई की जाती है.
राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की राजनीति और उनके PDA फॉर्मूले पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि अखिलेश की राजनीति और दिया गया नाम दोनों स्थिर नहीं हैं.
UP News: जयंत चौधरी पर अखिलेश यादव की टिप्पणी पर भड़के बीजेपी नेता संगीत सोम. बोले- 'अखिलेश को एकन्नी का नहीं छोड़ेंगे जयंत, पश्चिमी यूपी में नहीं खुलेगा सपा का खाता.'
30 अगस्त को लखनऊ में रालोद का राष्ट्रीय सम्मेलन होगा, जिसमें जयंत चौधरी संगठन और 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर मंथन करेंगे. जाट और ब्राह्मण समीकरण, ब्राह्मण समाज में बढ़ती सक्रियता और बूथ स्तर तक तैयारी के जरिए रालोद सपा को सीधी चुनौती देने की कोशिश में है.
सहारनपुर सितंबर में पश्चिमी यूपी की राजनीति का मुख्य अखाड़ा बनने जा रहा है, जहां आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी 3 सितंबर को अपनी रैली से 'मिशन-2027' का आगाज करेंगे. वहीं, 6 सितंबर को 'युवा योद्धा सम्मेलन' के जरिए अखिलेश यादव 'चवन्नी' वाले बयान के बाद बिगड़े सियासी समीकरणों को साधने और जयंत के गढ़ को भेदने की हुंकार भरेंगे.
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा जयंत चौधरी पर की गई टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में 'चवन्नी' को लेकर घमासान मचा हुआ है. इस पूरे विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है. प्रतिक्रिया में कहा गया है कि अगर सियासत की इस लड़ाई में कुछ सस्ते और हल्के शब्दों का इस्तेमाल करना ही था, तो सीधे तौर पर नाम लेकर बोलना चाहिए था. इस तरह से पूरे जाट समाज को निशाना बनाना और यह कहना कि 'एबीसीडी हमने सिखाई', उनके गहरे अहंकार को दर्शाता है.
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बसपा प्रमुख मायावती पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा कभी गठबंधन नहीं तोड़ती, बल्कि पूरी ईमानदारी से साथ निभाती है। उन्होंने कहा कि लोग खुद सपा का साथ छोड़कर जाते हैं।
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को बसपा प्रमुख मायावती के सोशल मीडिया पोस्ट पर पलटवार करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी कभी गठबंधन नहीं तोड़ती. उन्होंने कहा, 'इधर सच बोलना भी गलत है. सच बोलना मुश्किल है.'
राष्ट्रीय लोकदल (RLD) प्रमुख जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव के बयान पर निशाना साधा है. जयंत चौधरी ने अखिलेश पर पूरे जाट समाज को टारगेट करने का आरोप लगाया है. बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी जयंत चौधरी का साथ दिया है. उनका कहना है कि अखिलेश को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए.
यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सभी दल अपने अपने समीकरण सेट करने में लगे हैं.. इस बीच अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी पर हमला किया है. 2022 के विधानसभा चुनाव में जयंत चौधरी अखिलेश यादव के साथ थे, तब उन्होंने कहा था कि मैं कोई चवन्नी हूं जो पलट जाऊंगा.. अब अखिलेश यादव ने उनके उसी बयान को आधार बनाकर उनपर हमला किया है.. 2022 विधानसभा चुनाव के बाद अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी को राज्यसभा भेजा, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव से ठीक से पहले जयंत चौधरी पलट गए, इंडिया गठबंधन छोडकर एनडीए में चले गए.. और अब पहली बार अखिलेश यादव ने पलटवार किया है.
अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए जयंत चौधरी और आरएलडी पर तंज कसा। लखनऊ में महारानी अवंती बाई लोधी की जयंती कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “हम लोगों ने चवन्नी का रुपया बना दिया, फिर भी हमें छोड़कर चले गए।” उनके बयान को 2024 लोकसभा चुनाव से पहले आरएलडी के सपा का साथ छोड़कर एनडीए में शामिल होने से जोड़कर देखा जा रहा है।
राष्ट्रीय लोक दल ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के “चवन्नी को उठाकर रुपया बना दिया” वाले बयान को आपत्तिजनक बताया है. उन्होंने इसे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की विचारधारा और पूरे किसान समाज का अपमान बताया है.
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में वीरांगना महारानी अवंती बाई लोधी की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में बिना नाम लिए राष्ट्रीय लोकदल और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी पर निशाना साधा.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राष्ट्रीय लोकदल (RLD) को बड़ा संगठनात्मक झटका लगा है. डॉ. रामाशीष राय ने RLD के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष पद के साथ-साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है.