उत्तर प्रदेश में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के सियासी पैर पसारने के मंसूबे पर बड़ा झटका लगा है. एक ही हफ्ते के भीतर यूपी में AIMIM के दो बड़े नेताओं ने ओवैसी का साथ छोड़ दिया है. डॉक्टर अब्दुल मन्नान ने सपा की साइकिल पर सवार हुए और अब AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता आसिम वकार ने पार्टी से इस्तीफा देकर कांग्रेस का दामन थाम लिया है.
आसिम वकार ने दिल्ली के इंदिरा भवन में कांग्रेस का दामन थामा. इस मौके पर यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय, उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और कांग्रेस के सांसद इमरान प्रतापगढ़ी मौजूद रहे. उन्होंने आसिम वकार को कांग्रेस की सदस्यता दिलाई.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले आसिम वकार का AIMIM छोड़कर कांग्रेस जाना ओवैसी के लिए बड़ा झटका है. आसिम वकार मुस्लिमों को मुद्दे पर मुखर रहने वाले नेता गिने जाते हैं.
पहले सपा में गए डॉ. अब्दुल मन्नान
यूपी में पहला झटका उस समय लगा जब असदुद्दीन ओवैसी के बेहद करीबी माने जाने वाले और AIMIM के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे डॉ. अब्दुल मन्नान ने पार्टी का साथ छोड़ दिया. डॉ. मन्नान ने पिछले हफ्ते समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थाम लिया. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए डॉ. मन्नान का जाना AIMIM के लिए राज्य में एक बड़ा झटका माना गया. देवीपाटन इलाके से मन्नान आते हैं. पीस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं और 2022 के चुनाव में AIMIM के टिकट पर चुनाव लड़े थे.
अब कांग्रेस में शामिल हुए आसिम वकार
डॉ. मन्नान के झटके से पार्टी उबर भी नहीं पाई थी कि राष्ट्रीय प्रवक्ता आसिम वकार ने भी AIMIM से अपनी राहें जुदा कर लीं. आसिम वकार टीवी डिबेट्स और राजनीतिक मंचों पर ओवैसी और AIMIM का सबसे मुखर चेहरा माने जाते थे.उन्होंने पार्टी छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली है. कांग्रेस में शामिल होने से पार्टी को मुस्लिम समुदाय के बीच अपनी पैठ मजबूत करने का मौका मिलेगा.

आसिम वकार ने कांग्रेस ज्वाइन करने के बाद कहा कि AIMIM भले ही ऊपरी नेतृत्व के स्तर पर बीजेपी का विरोध करती दिखती थी, लेकिन असल में ओवैसी का मुकाबला कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से है. उन्होंने कहा कि उन्हें यह तरीका मंजूर नहीं था और इसलिए उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि भारत में देश से प्यार करने वाले सभी लोगों का मकसद बीजेपी को सत्ता से हटाना और एक धर्मनिरपेक्ष सरकार बनाना है.
हुमायूं कबीर के बहाने ओवैसी पर निशाना साधा
आसिम वकार ने बंगाल के नेता हुमायूं कबीर का भी जिक्र किया, जिन पर उन्होंने बीजेपी का एजेंट होने का आरोप लगाया था. उन्होंने एक स्टिंग ऑपरेशन का हवाला दिया जिसमें आरोप लगाया गया था कि कबीर को 1,100 करोड़ रुपये मिले थे. आसिम वकार ने कहा कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनेगी, तो हम इस बात की जांच करेंगे कि यह पैसा किसने दिया और कहां गया. इस तरह आसिम वकार ने इशारों-इशारों में बीजेपी की बी-टीम के नैरेटिव को गढ़ते नजर आए.
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आसिम वकार काफी समय से AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता थे. उनके पार्टी छोड़ने से AIMIM और असदुद्दीन ओवैसी को बड़ा झटका लगा है. यूपी चुनाव में कांग्रेस सपा के साथ गठबंधन करके प्रदेश में अपना प्रभाव फिर से बनाना चाहती है और 2027 के चुनावों में जीत हासिल करना चाहती है. हालांकि, आसिम वकार लंबे समय से AIMIM में साइड लाइन चल रहे थे. ओवैसी की यूपी में होने वाली किसी भी रैली में उन्हें नहीं बुलाया गया.
2027 के चुनाव से पहले ओवैसी के सामने चुनौती
उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सभी राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे हैं. ऐसे समय में दो बड़े नेताओं का लगातार पार्टी छोड़ना AIMIM के संगठन और वोट बैंक के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है.
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों ही मुख्य विपक्षी दल के रूप में मुस्लिम वोटों के बिखराव को रोकने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. ओवैसी की पार्टी से प्रमुख नेताओं की इस एग्जिट को सपा और कांग्रेस के इसी मजबूत होते 'इंडिया गठबंधन' के नैरेटिव से जोड़कर देखा जा रहा है.