उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के लखनऊ स्थित मुख्यालय में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और महिला कांग्रेस नेता ममता चौधरी के बीच हुआ विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है. पार्टी के भीतर मचे इस घमासान और दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच चले जूते-चप्पलों के बाद कांग्रेस हाईकमान ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है.
अनुशासनहीनता और सार्वजनिक रूप से पार्टी की फजीहत कराने के मामले में महिला कांग्रेस नेता ममता चौधरी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. उन्हें स्पष्टीकरण के लिए दिल्ली तलब किया गया है, वहीं प्रदेश संगठन से भी इस पूरे घटनाक्रम पर जवाब-तलब किया गया है.
क्या है पूरा मामला और विवाद की जड़?
कांग्रेस की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' के पदभार ग्रहण कार्यक्रम के दौरान लखनऊ स्थित प्रदेश कार्यालय में यह विवाद खड़ा हुआ. प्रत्यक्षदर्शियों और सामने आए वीडियो के मुताबिक, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय जब अपने समर्थकों के साथ अंदर आ रहे थे, तभी लखनऊ की पार्षद और महिला कांग्रेस नेता ममता चौधरी के साथ उनकी तीखी नोकझोंक हो गई.
बात इतनी बढ़ी कि दोनों पक्षों में गाली-गलौज, हाथापाई और जूते-चप्पल चलने तक की नौबत आ गई. इस घटना से पार्टी की काफी किरकिरी हुई है. अजय राय ने इस मामले की शिकायत वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी, प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद से करते हुए ममता चौधरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उन्हें पार्टी से बाहर करने की मांग की है.
ममता चौधरी के आरोप और हाईकमान की कार्रवाई
दूसरी ओर, ममता चौधरी ने अजय राय और उनके समर्थकों पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए इस घटना को 'दलित विरोधी' कृत्य करार दिया है. उनका दावा है कि विवाद के दौरान उनके साथ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया गया और उनके समर्थकों पर हमला हुआ. उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत शीर्ष नेतृत्व और राहुल गांधी से करने की बात कही है.
मामले की गंभीरता और पार्टी की छवि को हुए नुकसान को देखते हुए हाईकमान के निर्देश पर 5 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है, जिसकी कमान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बृजलाल खाबरी को सौंपी गई है.
अजय राय की अहमियत और सियासी मायने
अजय राय उत्तर प्रदेश कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शुमार हैं. प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने संगठन में ऊर्जा भरने का काम किया और वे 2014 से लगातार वाराणसी सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ते रहे हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने पीएम मोदी को मजबूत चुनौती दी थी.
ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व (राहुल गांधी और प्रियंका गांधी) किसी भी सूरत में अजय राय को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाना चाहेगा. प्रदेश अध्यक्ष पद से हटने के बाद अजय राय के रुख को लेकर पहले से ही सियासी चर्चाएं गर्म थीं. इस ताजा घटनाक्रम के बाद अजय राय की सख्त नाराजगी को देखते हुए ममता चौधरी पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई गाज बनकर गिर सकती है.
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी कांग्रेस के लिए यह गुटबाजी बड़ा सिरदर्द बन गई है. अब देखना यह होगा कि जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद हाईकमान क्या कदम उठाता है.