scorecardresearch
 

अब भारत की रक्षा नीति रिएक्टिव नहीं, आगे बढ़कर प्रो-एक्टिव हो गई है, बोले राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सुरक्षा सभा में कहा कि भारत अब रक्षा आयातक नहीं बल्कि स्वदेशी हथियार निर्माता है. पानीपत सिंड्रोम खत्म, नीति प्रोएक्टिव हो गई. उत्पादन और निर्यात में जबरदस्त वृद्धि हुई है.

Advertisement
X
आजतक की सुरक्षा सभा 'ये नया भारत है' के समापन सत्र में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह. (Photo: ITG)
आजतक की सुरक्षा सभा 'ये नया भारत है' के समापन सत्र में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह. (Photo: ITG)

आजतक की सुरक्षा सभा 'ये नया भारत है' के समापन सत्र में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश की रक्षा नीति में आए ऐतिहासिक बदलावों पर विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि इक्कीसवीं सदी का भारत अब सिर्फ रक्षा सामग्री का आयातक नहीं रहा. आज हिंदुस्तान अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए स्वदेशी तकनीक और आधुनिक हथियारों का निर्माण करने वाला सशक्त राष्ट्र बन चुका है. 

इस बदलाव के केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व और सरकार की दूरदर्शी नीतियां हैं. सीमाओं की सुरक्षा से लेकर तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण और मेक इन इंडिया इन डिफेंस को नई गति देने वाले रक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत अब सुरक्षा और स्वाभिमान के फलसफे के साथ आगे बढ़ रहा है. चाहे सीमाओं पर मुंहतोड़ जवाब हो या पड़ोसी को नसीहत, भारत कभी कड़ाई से परहेज नहीं करता.  

पानीपत सिंड्रोम से मुक्ति: रिएक्टिव से प्रोएक्टिव नीति की ओर

रक्षा मंत्री ने याद दिलाया कि लंबे समय तक विशेषज्ञ भारत की रक्षा नीति को 'पानीपत सिंड्रोम' कहते थे. इसका मतलब था कि भारत सक्रिय नहीं बल्कि प्रतिक्रियात्मक रहता था. खतरा सिर पर आने तक कोई कदम नहीं उठाया जाता था. लेकिन आज यह सोच पूरी तरह बदल चुकी है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: तीनों सेनाओं के लिए बड़ी सौगात, 1.10 लाख करोड़ के हथियारों को हरी झंडी

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत की रक्षा नीति रिएक्टिव नहीं रही बल्कि एक्टिव से एक कदम आगे प्रोएक्टिव हो गई है. उदाहरण देते हुए उन्होंने मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) का जिक्र किया. 2016 से पहले भारत इसका सदस्य नहीं था इसलिए ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज बढ़ाने में सीमाएं थीं. 

सक्रिय कूटनीति और दूरदर्शी नेतृत्व से भारत एमटीसीआर का सदस्य बना. फिर ब्रह्मोस की रेंज बढ़ाई गई. ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस की भूमिका सबके सामने है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने खुद एक वीडियो में स्वीकार किया कि ब्रह्मोस ने कितना कहर ढाया. यह बदलाव सिर्फ शब्दों का नहीं बल्कि काम का है.  

स्वदेशी उत्पादन और निर्यात में ऐतिहासिक छलांग

यूपीए सरकार के काल में स्वदेशी रक्षा उत्पादन लगभग 40 हजार करोड़ रुपये था. आज यह बढ़कर करीब 1.12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. रक्षा निर्यात लगभग 100 देशों को हो रहा है. इसकी कीमत करीब 37,500 करोड़ रुपये है. यानी 2014 से पहले जितना उत्पादन होता था उतना आज सिर्फ निर्यात हो रहा है. 

लाइसेंसिंग नियमों को सरल बनाया गया और डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर में स्वदेशी सिस्टम को प्राथमिकता दी गई. आज सेनाओं के पास आकाश तीर, नेक्स्ट जनरेशन आकाश, पिनाका रॉकेट लॉन्चर, अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल, प्रचंड और ध्रुव हेलीकॉप्टर, तेजस लड़ाकू विमान, अर्जुन टैंक, आधुनिक ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम हैं. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: पूर्व DRDO चीफ बोले- भविष्य के युद्ध में पारंपरिक ताकत और लो-कॉस्ट ऑटोनॉमस सिस्टम जरूरी

भारतीय नौसेना में पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत शामिल हो चुका है. ये सब उपलब्धि दूरदर्शिता और परिपक्वता की कहानी कहते हैं. भारत की रक्षा नीति अब तथाकथित पानीपत सिंड्रोम से नहीं बल्कि दूरदर्शिता से परिभाषित होती है.  

पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त रक्षा सौदे

2014 से पहले रक्षा सौदों में भ्रष्टाचार की खबरें आम थीं. बोफोर्स घोटाला, एचडीडब्ल्यू पनडुब्बी घोटाला, टाटा ट्रक घोटाला और अगस्तावेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाला देश ने देखे. कुछ लोग चंद रुपयों के लिए देश की सुरक्षा को दांव पर लगा देते थे. पिछले बारह वर्षों में रक्षा बजट ढाई लाख करोड़ से बढ़कर लगभग आठ लाख करोड़ रुपये हो गया लेकिन एक पाई भी इधर-उधर नहीं हुई. 

पूरी पारदर्शिता के साथ हर रुपया सुरक्षा मजबूत करने में लग रहा है. यह परिवर्तन राष्ट्रीय हित की रक्षा को सर्वोपरि रखने का प्रमाण है. किसी भी देश की सुरक्षा और विदेश नीति का सबसे बड़ा लक्ष्य राष्ट्रीय हित की रक्षा होता है और भारत अब इसी रास्ते पर मजबूती से चल रहा है.  

Rajnath Singh

सीमाओं की सुरक्षा बेहतर करने, सेनाओं के आधुनिकीकरण, रक्षा उत्पादन बढ़ाने और ऑर्डनेंस फैक्टरी बोर्ड के निगमीकरण जैसे सभी मोर्चों पर काम किया गया. स्वदेशी प्रणालियों की सूची लंबी हो चुकी है. आकाश और तीर एयर डिफेंस, पिनाका, अस्त्र, प्रचंड, ध्रुव, तेजस, अर्जुन और विक्रांत जैसी उपलब्धियां भारत को आत्मनिर्भर बना रही हैं. ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम आधुनिक युद्ध की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं. ये क्षमताएं न सिर्फ सुरक्षा बढ़ाती हैं बल्कि निर्यात के जरिए वैश्विक पहचान भी दिलाती हैं.  

Advertisement

नया भारत: स्वाभिमान, आत्मनिर्भरता और प्रोएक्टिव दृष्टिकोण

राजनाथ सिंह के संबोधन से साफ है कि भारत एक नए युग में प्रवेश कर चुका है. जहां पहले खतरा आने पर प्रतिक्रिया होती थी वहां अब पहले से तैयारी और सक्रिय कदम उठाए जा रहे हैं. एमटीसीआर सदस्यता से ब्रह्मोस की क्षमता बढ़ी और ऑपरेशन सिंदूर में उसका प्रभाव दिखा. 

यह भी पढ़ें: 'ऑपरेशन सिंदूर हमने स्वदेशी हथियारों के दम पर किया...', एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र ने खोले कई राज

उत्पादन और निर्यात के आंकड़े आत्मनिर्भरता की कहानी कहते हैं. भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था ने विश्वास पैदा किया है. युवा पीढ़ी और विशेषज्ञों के बीच हुई चर्चाओं के समापन पर रक्षा मंत्री का यह संदेश था कि भारत की सुरक्षा नीति अब स्वाभिमान और दूरदर्शिता से संचालित हो रही है. सरहदों पर स्पष्ट संदेश है कि कोई भी दुस्साहस बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.  

यह नया भारत सिर्फ हथियार बनाने वाला नहीं बल्कि अपनी शर्तों पर सुरक्षा नीति तय करने वाला राष्ट्र है. उत्पादन बढ़ना, निर्यात बढ़ना, स्वदेशी सिस्टम का विस्तार और पारदर्शिता- ये सब मिलकर एक सशक्त और स्वाभिमानी भारत की तस्वीर पेश करते हैं. सुरक्षा सभा जैसे मंचों पर हुई चर्चाएं और रक्षा मंत्री के विचार इस परिवर्तन को और मजबूत करते हैं. आने वाले वर्षों में यह गति और तेज होने वाली है ताकि भारत न सिर्फ अपनी रक्षा सुनिश्चित करे बल्कि वैश्विक रक्षा क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाए.  

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement