यूक्रेन ने रूस पर हमले के लिए और अपने सैनिकों की जान बचाने के लिए रोबोट आर्मी नाम का नया कार्यक्रम शुरू किया है. पूर्व यूक्रेनी अधिकारी मिखाइलो फेडोरोव ने लविव में आयोजित आईटी एरिना 2026 सम्मेलन में इसका अनावरण किया. यह पहल सफल ड्रोन सेना का विस्तार है जो अब युद्ध के मैदान में 95% से ज्यादा हमले कर रही है. नया प्रोजेक्ट उन खतरनाक कामों को ऑटोनॉमस बनाने पर जोर देता है जिनमें सैनिकों की जान जोखिम में पड़ती है.
फेडोरोव अब सरकार के बाहर से इस पहल का नेतृत्व कर रहे हैं. उन्होंने रक्षा तकनीक कंपनियों, इंजीनियरों और एक तकनीकी प्रमुख की भर्ती के लिए वेबसाइट खोली है. उनका जोर निजी इनोवेशन, रिसर्च, परीक्षण और तेजी से विस्तार के ईकोसिस्टम पर है. इसका मकसद युद्ध के मैदान में रोबोट को आम बनाना है ताकि मानव सैनिक ज्यादा सुरक्षित रह सकें.
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यूक्रेन की ड्रोन सेना पहले ही युद्ध में बड़ा बदलाव ला चुकी है. छोटी और सस्ती ड्रोनें दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमले कर रही हैं और सैनिकों को सीधे खतरे में डाले बिना काम निपटा रही हैं. अब रोबोट सेना इसी सोच को आगे बढ़ा रही है. इसमें घायल सैनिकों को निकालने, गोला-बारूद पहुंचाने, सुरंग बिछाने, टोह लेने और लक्ष्य पर हमला करने जैसे काम शामिल हैं. ये सभी कार्य हाई रिस्क वाले माने जाते हैं.
रोबोट के इस्तेमाल से सैनिकों को इन खतरनाक जिम्मेदारियों से मुक्त किया जा सकता है. उदाहरण के लिए घायल साथी को बचाने के लिए आगे बढ़ने की जगह रोबोट भेजा जा सकता है. गोला-बारूद पहुंचाने वाले काफिले पर हमले का खतरा कम होगा क्योंकि रोबोट वाहन यह काम संभाल सकते हैं. टोही मिशन में भी रोबोट मानव सैनिकों की जगह ले सकते हैं.
सैनिकों की जान बचाने का लक्ष्य
फेडोरोव ने साफ किया कि यह कार्यक्रम सिर्फ सरकारी प्रयास नहीं है. वे निजी कंपनियों और इंजीनियरों को आमंत्रित कर रहे हैं ताकि नया पारिस्थितिकी तंत्र बने. रिसर्च और डेवलपमेंट से लेकर परीक्षण और तेजी से उत्पादन तक की पूरी सीरीज तैयार की जाएगी. यूक्रेन में युद्ध के दौरान कई छोटे स्टार्टअप ने ड्रोन तकनीक में कमाल दिखाया है. अब उसी मॉडल को रोबोटिक्स पर लागू करने की कोशिश है.
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भर्ती प्रक्रिया खुली है ताकि देश-विदेश के प्रतिभाशाली लोग जुड़ सकें. तकनीकी प्रमुख की नियुक्ति भी महत्वपूर्ण है जो पूरे कार्यक्रम को दिशा देगा. निजी इनोवेशन पर जोर देने से नई तकनीकें तेजी से मैदान तक पहुंच सकती हैं. युद्ध की जरूरतें बदलती रहती हैं इसलिए लचीला और तेज सिस्टम बनाना जरूरी है.

इस पहल का सबसे बड़ा उद्देश्य सैनिकों की जान बचाना है. आधुनिक युद्ध में ड्रोन और रोबोट पहले से ही भूमिका निभा रहे हैं लेकिन यूक्रेन इसे संगठित और बड़े पैमाने पर लागू करना चाहता है. खतरनाक कार्यों को मशीनों के हवाले करने से मानव नुकसान कम हो सकता है. साथ ही सैनिक ज्यादा रणनीतिक और सुरक्षित भूमिकाओं पर ध्यान दे सकेंगे.
रोबोट सिस्टम युद्ध के मैदान की जटिलताओं से निपटने में मदद करेंगे. वे लंबे समय तक काम कर सकते हैं और थकान या डर जैसी मानव सीमाओं से मुक्त होते हैं. हालांकि इन प्रणालियों को विश्वसनीय बनाने के लिए लगातार परीक्षण और सुधार की जरूरत होगी. फेडोरोव का मॉडल इसी दिशा में काम करता दिख रहा है.
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भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां
रोबोट सेना यूक्रेन की रक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है. अगर यह सफल रही तो अन्य देश भी इससे सीख सकते हैं. निजी क्षेत्र की भागीदारी से लागत कम रखने और इनोवेशन तेज करने में मदद मिलेगी. फिर भी चुनौतियां बाकी हैं. रोबोट को युद्ध के कठिन हालात में भरोसेमंद बनाना, संचार व्यवस्था सुरक्षित रखना और दुश्मन की जवाबी कार्रवाई से बचाना जरूरी होगा.
We’re launching the Army of Robots.
— Mykhailo Fedorov (@FedorovMykhailo) September 26, 2026
In 2022, we launched the Army of Drones. Today, drones account for over 95% of battlefield strikes, and Ukraine has more than 700 UAV manufacturers.
Now we need the next technological breakthrough: the robotization of warfare.
The goal is… pic.twitter.com/UtaDuV4LXT
आईटी एरिना जैसे मंच पर अनावरण करना भी संकेत है कि यूक्रेन तकनीक और रक्षा को एक साथ जोड़ रहा है. युवा इंजीनियर और कंपनियां अब सीधे युद्ध प्रयास का हिस्सा बन सकती हैं. कुल मिलाकर यह पहल सैनिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आधुनिक युद्ध की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम है. आने वाले महीनों में इसकी प्रगति पर सबकी नजर रहेगी.