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ईरान के 'परमाणु पहाड़' पर कहर गिराएगा अमेरिका... पर कौन सा बम गिराकर?

ट्रंप ने कहा कि पिकएक्स माउंटेन अगला निशाना है. यह ईरान का सबसे गहरा और मजबूत परमाणु केंद्र है, जो नतांज के पास 80-100 मीटर गहराई में चट्टान के नीचे है. इसे नष्ट करना बेहद मुश्किल है.

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ट्रंप ईरान के पिकएक्स पहाड़ पर हमला करके उसे तबाह करना चाहते हैं. (Photo: ITG)
ट्रंप ईरान के पिकएक्स पहाड़ पर हमला करके उसे तबाह करना चाहते हैं. (Photo: ITG)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि हम पिकएक्स माउंटेन को नष्ट करेंगे. ईरानियों को तैयार रहने को कह दो. यह धमकी 2026 के ईरान युद्ध के बीच आई है, जब दोनों पक्षों के बीच तनाव चरम पर है. पिकएक्स माउंटेन ईरान का सबसे गहरा और मजबूत संदिग्ध परमाणु केंद्र है, जो नतांज परमाणु परिसर के पास है. यह सुविधा चट्टान के अंदर 80 से 100 मीटर या उससे भी ज्यादा गहराई में बनी है. 

विशेषज्ञों का कहना है कि इसे पूरी तरह नष्ट करना पारंपरिक हथियारों से लगभग असंभव है, लेकिन अमेरिका इसे काम करने लायक नहीं छोड़ना चाहता. यह धमकी सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है. ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम छुपाने और बचाने की कोशिश कर रहा है, जबकि अमेरिका और इजरायल उसे रोकने के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं.

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पिकएक्स माउंटेन, जिसका फारसी नाम कुह-ए कोलांग गज ला है, ईरान के इस्फहान प्रांत में जाग्रोस पहाड़ियों में स्थित है. यह नतांज यूरेनियम संवर्धन परिसर से सिर्फ 1.5 से 2 किलोमीटर दक्षिण में है. पहाड़ की ऊंचाई करीब 1600 मीटर है. इसके अंदर सुरंगों वाला एक बड़ा कॉम्प्लेक्स बनाया जा रहा है. 

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2020 में नतांज में हुए विस्फोट के बाद ईरान ने इस जगह पर निर्माण शुरू किया. ईरानी अधिकारियों ने कहा था कि यहां एडवांस सेंट्रीफ्यूज बनाने और इकट्ठा करने की सुविधा बनेगी. लेकिन पश्चिमी खुफिया एजेंसियां मानती हैं कि यह परमाणु हथियार कार्यक्रम के लिए सुरक्षित जगह हो सकती है, जहां संवर्धित यूरेनियम स्टोर किया जा सकता है या गुप्त संवर्धन हो सकता है. 

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2026 तक सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि निर्माण जारी है. सुरंग के प्रवेश द्वारों को मजबूत कंक्रीट से ढका गया है. सुरक्षा दीवार बनाई गई है. एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम तैनात हैं. इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को यहां कभी प्रवेश नहीं दिया गया, इसलिए इसकी सटीक जानकारी सीमित है.

ट्रंप का बयान और युद्ध के संदर्भ

ट्रंप ने जुलाई 2026 में कई बार इस जगह का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका इस पर बहुत जल्द और बहुत भारी हमला करेगा. ट्रंप ने स्वीकार किया कि फिलहाल वहां कोई गतिविधि नजर नहीं आ रही, लेकिन फिर भी इसे निशाना बनाने की बात कही. इजरायली खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने पिछले हमलों के बाद हजारों सेंट्रीफ्यूज और कुछ संवर्धित यूरेनियम यहां शिफ्ट कर दिया है.

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यह धमकी 2026 के ईरान युद्ध का हिस्सा है, जिसमें अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई परमाणु ठिकानों पर हमले किए. नतांज, फोर्डो और इस्फहान को निशाना बनाया गया, लेकिन पिकएक्स माउंटेन अब तक बच गया. ट्रंप इसे -बड़ा हमला-कहकर ईरान को चेतावनी दे रहे हैं. ईरान ने कहा है कि ऐसा हमला क्षेत्र को नर्क बना देगा.

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हमले की चुनौतियां और संभावित रणनीति

पिकएक्स माउंटेन को नष्ट करना आसान नहीं. यह ग्रेनाइट चट्टान के 80-100 मीटर या उससे ज्यादा गहराई में है. अमेरिका के सबसे शक्तिशाली बंकर-बस्टर बम GBU-57 Massive Ordnance Penetrator (MOP) का वजन 30,000 पाउंड है, जो B-2 Spirit स्टेल्थ बमवर्षक से गिराया जाता है. 

सफल हमले के लिए कई B-2 बमवर्षकों की जरूरत पड़ेगी. पहले इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से ईरानी एयर डिफेंस को दबाना होगा. फिर रियल-टाइम ISR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉग्निशन) से निगरानी करनी होगी. बमों को सीरीज में गिराना होगा - पहले टनल प्रवेश द्वार, वेंटिलेशन शाफ्ट और सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना, फिर मुख्य हॉल तक पहुंचने की कोशिश. 

फिर भी, कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इतनी गहराई में पूरा विनाश संभव नहीं. असली टारगेट ऑपरेशनल पैरालिसिस यानी सुविधा को काम करने लायक न छोड़ना और एक्सेस डिनायल यानी अंदर जाने का रास्ता बंद करना हो सकता है. फोर्डो की तुलना में यह ज्यादा गहरा है, इसलिए पारंपरिक हथियारों की सीमा से बाहर हो सकता है.

ईरान की रणनीति और सुरक्षा उपाय

ईरान जानता है कि उसके परमाणु कार्यक्रम पर हमले हो रहे हैं. इसलिए उसने पिकएक्स माउंटेन को बीमा पॉलिसी की तरह बनाया है. 2020 के बाद से निर्माण तेज हुआ. 2025-2026 के हमलों के बाद और तेजी आई. सुरंगों को मजबूत किया गया, प्रवेश द्वार बंद किए गए और सुरक्षा बढ़ाई गई. 

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ईरान का दावा है कि यह सिर्फ सेंट्रीफ्यूज असेंबली के लिए है, लेकिन पश्चिमी देश इसे हथियार बनाने की दिशा मानते हैं. यहां IAEA निरीक्षक नहीं जा सके, जो संदेह बढ़ाता है. अगर ईरान यहां संवर्धित यूरेनियम छुपा लेता है, तो भविष्य में परमाणु हथियार बनाने की क्षमता बढ़ जाएगी.

ट्रंप की धमकी का मकसद ईरान को मनोवैज्ञानिक दबाव देना भी है. अमेरिका B-2 बमवर्षकों का इस्तेमाल कर सकता है, जो स्टेल्थ तकनीक से रडार से बच सकते हैं. लेकिन ईरान के पास S-300/400 जैसे एयर डिफेंस सिस्टम हैं, हालांकि अमेरिकी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर उन्हें बेअसर कर सकता है. 

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हमले के बाद क्या होगा? 

ईरान जवाबी कार्रवाई कर सकता है - खाड़ी में तेल टैंकरों पर हमले, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करना या प्रॉक्सी मिलिशिया के जरिए अमेरिकी ठिकानों पर हमले. इससे क्षेत्रीय युद्ध और बड़ा हो सकता है. विशेषज्ञ कहते हैं कि पूरा विनाश मुश्किल है, इसलिए अमेरिका सुविधा को लंबे समय तक पैकालाइज्ड कर सकता है. इससे ईरान का परमाणु कार्यक्रम सालों पीछे धकेल दिया जाएगा.

यह धमकी पूरे मध्य पूर्व को प्रभावित कर रही है. सऊदी अरब, UAE जैसे देश चुपचाप अमेरिका का समर्थन कर रहे हैं, जबकि ईरान समर्थित समूह जैसे हूती हमले बढ़ा सकते हैं. यूरोप और चीन जैसे देश कूटनीति की बात कर रहे हैं, लेकिन ट्रंप सैन्य रास्ता चुन रहे हैं.  

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परमाणु प्रसार की दृष्टि से यह महत्वपूर्ण है. अगर ईरान परमाणु हथियार बना लेता है, तो सऊदी अरब और अन्य देश भी ऐसा करने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे क्षेत्र अस्थिर हो जाएगा. 

ट्रंप ने कहा है कि हमला बहुत जल्द होगा. अगर अमेरिका हमला करता है, तो यह 2026 युद्ध का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है. ईरान अगर जवाब देता है तो जंग लंबी खिंच सकती है. विश्लेषकों का मानना है कि डिप्लोमेसी अभी भी अंतिम विकल्प हो सकता है, लेकिन दोनों पक्ष सख्त रुख अपनाए हुए हैं. 

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