11 सितंबर 2001 के आतंकी हमले आधुनिक इतिहास की सबसे खौफनाक साजिशों में से एक हैं. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस घटना '9/11 पार्ट 2' कहा. यह दिखाता है कि नागरिक उड्डयन सुरक्षा के सामने ऐसे हमलों का खतरा आज भी संवेदनशील है.
अल-कायदा द्वारा अंजाम दिए गए 9/11 हमलों में सामान्य नागरिक विमानों को ही विनाशकारी मिसाइलों में बदल दिया गया था. इस पूरी प्रक्रिया को सफल बनाने के पीछे वर्षों की गुप्त योजना, विदेशी जमीन पर ली गई ट्रेनिंग और स्लीपर सेल नेटवर्क की बहुत अधिक डिसिप्लिन कार्यप्रणाली जिम्मेदार थी.
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साजिश का खाका और 'हैम्बर्ग सेल'
9/11 हमले का आइडिया मुख्य रूप से खालिद शेख मोहम्मद ने अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के सामने रखा था. साजिश की असली रूपरेखा जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में तैयार हुई, जहां मोहम्मद अत्ता, मारवान अल-शेही और ज़ियाद जर्राह जैसे शिक्षित युवा रहते थे. यह समूह 'हैम्बर्ग सेल' के नाम से जाना गया.

ये लोग कट्टरपंथी विचारधारा से प्रेरित थे. पश्चिमी देशों के माहौल में घुल-मिलकर रहने में माहिर थे. अफ़गानिस्तान के अल-कायदा ट्रेनिंग कैंपों में बिन लादेन से मुलाकात के बाद इन आतंकवादियों को विशेष रूप से इस बड़े विमान हमले की कमान सौंपी गई.
अमेरिकी उड़ान स्कूलों में पायलटों की ट्रेनिंग
पायलट हाईजैकर्स ने किसी भी आधुनिक हथियार की जगह कॉमर्शियल विमान उड़ाने की क्षमता को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया. 2000 के मध्य में मोहम्मद अत्ता, मारवान अल-शेही और ज़ियाद जर्राह ने वैध वीजा पर अमेरिका में प्रवेश किया. उन्होंने फ्लोरिडा के 'हफमैन एविएशन' और अन्य प्राइवेट फ्लाइट एकेडमी में एडमिशन लिया. वहां उन्होंने छोटे सिंगल और मल्टी-इंजन विमानों को उड़ाने का लाइसेंस हासिल किया.
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इसके बाद उन्होंने बोइंग 727 और अन्य बड़े व्यावसायिक जेट विमानों के कंट्रोल पैनल और कॉकपिट सिस्टम को समझने के लिए कॉमर्शियल फ्लाइट सिमुलेटर का सहारा लिया. चौथे पायलट हानी हंजूर ने भी एरिज़ोना में अपनी पायलट ट्रेनिंग पूरी की. उन्हें विमान की लैंडिंग या टेक-ऑफ सीखने की जरूरत नहीं थी; उनका एकमात्र उद्देश्य उड़ते हुए जेट विमान को नेविगेट करना और अपने लक्षित स्थानों से टकराना था.

स्लीपर सेल की कार्यप्रणाली
स्लीपर सेल की सबसे बड़ी ताकत उनका 'अदृश्य' रहना होता है. ये आतंकी साधारण नागरिक बनकर समाज में घुलमिल जाते हैं, जब तक कि उन्हें हमले का आदेश न मिले. 9/11 के हमलावरों ने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए कई सुरक्षात्मक नियम अपनाए.
उन्होंने बैंक खाते खोले, क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल किया, गाड़ियां किराए पर लीं और स्थानीय जिम जॉइन किए. उन्होंने पश्चिमी पहनावा पहना. दाढ़ी भी कटवा ली ताकि कोई उन पर शक न करे. ऑपरेशनल सिक्योरिटी इतनी सख्त थी कि मुख्य पायलटों के अलावा अन्य 'मसल हायजैकर्स' (विमान पर कब्जा करने में मदद करने वाले आतंकी) को भी हमले के अंतिम समय तक यह नहीं पता था कि उनका मुख्य लक्ष्य क्या है.
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अंतिम रेकी, ट्रिगर और हमला
हमले से कुछ महीने पहले, पायलट हाइजैकर्स ने यात्री बनकर अमेरिका के भीतर लंबी दूरी की उड़ानों पर यात्राएं कीं. इसका मकसद कॉकपिट की सुरक्षा व्यवस्था, फ्लाइट अटेंडेंट की दिनचर्या और विमान में ईंधन की मात्रा का अनुमान लगाना था. 11 सितंबर 2001 की सुबह, 19 आतंकियों की टीम ने चार अलग कॉमर्शियल उड़ानों (American Airlines Flight 11, Flight 77, United Airlines Flight 175, Flight 93) में प्रवेश किया. विमानों के हवा में पहुंचते ही उन्होंने कॉकपिट पर कब्जा कर लिया और ट्रेन किए गए पायलट हाइजैकर्स ने कंट्रोल अपने हाथों में लेकर विमानों को न्यूयॉर्क के ट्विन टावर्स और पेंटागन से टकरा दिया.