झारखंड में गरीबी, बेरोजगारी और बदहाली से मजबूर आदिवासी महिलाओं और युवतियों का असुरक्षित पलायन रुकने का नाम नहीं ले रहा है. राज्य के गरीब परिवारों की बेटियां अक्सर बेहतर भविष्य के सपने लेकर दलालों और ह्यूमन ट्रैफिकर्स के चंगुल में फंस जाती हैं.
रांची से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां झारखंड की एक बेटी को दुबई में बंधक बना लिया गया है. इस घटना के बाद से पीड़िता के माता-पिता की चिंता से हालत बेहद खराब हो चुकी है और वो लगातार सरकार और विदेश मंत्रालय से अपनी बेटी को सुरक्षित वापस लाने की गुहार लगा रहे हैं.
जानकारी के मुताबिक, रांची के छोटा घाघरा इलाके की रहने वाली मोनिका कच्छप (उम्र 37 साल) ने रांची के बुंडू से साढ़े तीन साल का नर्सिंग का कोर्स पूरा किया था. मोनिका के पिता रतना कच्छप की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है और परिवार का गुजारा खेती-किसानी से ही चलता है.
नौकरी का झांसा देकर ले गए दुबई
परिवार की बदहाली और गरीबी को दूर करने के लिए मोनिका ने नौकरी करने का फैसला किया था. इसी दौरान वो ऑनलाइन माध्यम से 'AMD Trend Solution LLC' नाम की एक एजेंसी और उसकी एजेंट प्रियंका के संपर्क में आई. एजेंसी और उसकी एजेंट प्रियंका ने मोनिका को दुबई में अच्छी नौकरी दिलाने का लालच दिया और साथ ही विदेश में रहने, खाने और आवास की तमाम सुविधाएं मुफ्त देने का झूठा भरोसा दिलाया.
इस झांसे में आकर मोनिका ने 22 अप्रैल 2026 को प्रियंका के बताए गए बैंक खाते में फोनपे के जरिए 5 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए. उसे बताया गया कि आगे की यात्रा और एयर टिकट की व्यवस्था एजेंसी खुद करेगी. इसके बाद 5 मई 2026 को मोनिका दिल्ली एयरपोर्ट से शारजाह के लिए रवाना हो गई.
शारजाह पहुंचते ही शुरू हुआ जुल्म
मोनिका के शारजाह पहुंचते ही उसके साथ छल-कपट का खेल शुरू हो गया. 6 मई को जब वो शारजाह उतरी, तो एजेंसी की तरफ से भेजे गई गाड़ी के ड्राइवर ने उसका ओरिजिनल पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया. इसके बाद 7 मई को उसे अजमान स्थित एजेंसी के एक दफ्तर में ले जाया गया. वहां रितेश और मोहम्मद मेराज अंसारी नाम के लोगों ने अरबी भाषा में लिखे कुछ दस्तावेजों पर जबरन उसके साइन और अंगूठे के निशान ले लिए.
मोनिका अरबी भाषा बिल्कुल नहीं जानती थी, इसलिए उन कागजातों में क्या लिखा था, ये समझना उसके लिए नामुमकिन था. आरोप है कि उसका मोबाइल फोन लेकर प्रियंका के साथ हुई उसकी सारी व्हाट्सएप चैट भी डिलीट कर दी गई. इसके बाद एक वीडियो कॉल के जरिए उसे धमकाया गया कि उसने एजेंसी से 2600 दिरहम का कर्ज लिया है. उसे चेतावनी दी गई कि अगर 25 मई तक उसने ये रकम नहीं चुकाई, तो उसे जेल भेज दिया जाएगा.
घरों में जबरन कराया गया काम
पीड़िता की मां रेखा कच्छप ने पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया है कि मोनिका को मोहम्मद मेराज अंसारी के घर ले जाया गया. वहां उसे लगभग एक महीने तक बंधक जैसी स्थिति में रखकर झाड़ू-पोछा, बर्तन और बाथरूम साफ करने जैसे काम करवाए गए. इसके बाद 22 जून को उसे बिना किसी वैध वर्क परमिट के एक दूसरे घर में घरेलू देखभाल के काम के लिए भेज दिया गया.
मोनिका वहां की भाषा नहीं समझती थी, इसलिए काम में परेशानी होने पर उसे अगले दिन वापस दफ्तर छोड़ दिया गया. जुलाई के महीने में भी उसे अलग-अलग घरों में काम करने के लिए भेजा गया, जहां भाषा की दिक्कत और अजनबी माहौल के कारण उसे भारी मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी.
पुलिस ने दर्ज की FIR
जब काफी समय तक बेटी की कोई खबर नहीं मिली और परिजनों को सच्चाई का पता चला, तो वो डर गए. पड़ोसियों ने बताया कि जब ये मामला स्थानीय ग्राम सभा के सामने आया, तब जाकर इस घटना का खुलासा हुआ. ग्राम सभा के सदस्यों ने मिलकर पीड़ित माता-पिता को ढांढस बंधाया और उनका समर्थन किया, जिसके बाद वो हिम्मत जुटाकर पुलिस के पास पहुंचे.
इस मामले में रतना कच्छप की शिकायत के आधार पर एयरपोर्ट थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है. 29 सितंबर 2026 को दर्ज की गई इस FIR में दुबई और अजमान में नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी, मानव तस्करी, बंधक बनाने, जबरन मजदूरी कराने और रंगदारी मांगने जैसे आरोप लगाए गए हैं.
पुलिस ने प्रियंका, रितेश, मोहम्मद मेराज अंसारी और 'AMD Trend Solution LLC' के प्रबंधकों को आरोपी बनाया है. पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.
सरकार और विदेश मंत्रालय से गुहार
पीड़िता के परिवार का कहना है कि दुबई में उतरते ही उनकी बेटी से अरबी दस्तावेजों पर फर्जी हस्ताक्षर करवा लिए गए और अब उनसे भारतीय मुद्रा में करीब साढ़े तीन लाख रुपये (2600 दिरहम) की फिरौती मांगी जा रही है. वहीं पड़ोस की एक लड़की ने बताया कि उसकी आज सुबह ही फोनपे के जरिए मोनिका से बात हुई है. मोनिका लगातार फोन पर रोते हुए अपनी आपबीती बता रही है और वतन वापसी के लिए गुहार लगा रही है.
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बेटी के इस तरह परदेश में फंसने के बाद से मां की आंखें पथरा चुकी हैं और पिता का रो-रोकर बुरा हाल है. परिवार के लोग न्याय की उम्मीद में रांची के उपायुक्त से भी मुलाकात कर चुके हैं, जिन्होंने हर मुमकिन मदद का पूरा भरोसा दिया है. इसके साथ ही पूरे मामले की जानकारी विदेश मंत्रालय तक भी पहुंचा दी गई है.
पीड़ित परिवार और स्थानीय ग्रामीण अब बस यही अपील कर रहे हैं कि सरकार जल्द से जल्द कूटनीतिक प्रयास करे और उनकी बेटी मोनिका को सुरक्षित उनके घर वापस ले आए.