अमेरिका के रक्षा विभाग यानी पेंटागन ने ईरान पर संभावित बड़े पैमाने के सैन्य अभियानों की तैयारी तेज कर दी है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड को निर्देश दिया गया है कि वह प्रमुख लड़ाकू अभियानों की योजनाएं अंतिम रूप दे. यह निर्देश राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम की हालिया कैंप डेविड बैठक के बाद आया है.
योजनाओं में ऊर्जा ढांचे, रणनीतिक ठिकानों और परमाणु सुविधाओं पर हमलों का जिक्र है. हालांकि ट्रंप ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है और कोई समय सीमा भी तय नहीं की गई है. स्थिति अभी भी बदल रही है. ब्रेंट क्रूड की कीमत 101 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर और डब्ल्यूटीआई करीब 90 डॉलर के आसपास पहुंच गई है.
मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लंबे समय से चला आ रहा है. हाल के महीनों में सैन्य गतिविधियां रुकी हुई थीं, लेकिन अब फिर से बड़े अभियानों की चर्चा शुरू हो गई है. ट्रंप की सुरक्षा टीम ने कैंप डेविड पर बैठक की, जिसमें ईरान से जुड़े विकल्पों पर विस्तार से बात हुई.
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पेंटागन अधिकारियों का कहना है कि उनका काम सिर्फ सैन्य विकल्प तैयार करना है. राष्ट्रपति इन विकल्पों में से चुन सकते हैं. ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी इस मुद्दे पर बात की है. दोनों देशों के बीच समन्वय की संभावना बनी हुई है. अगर अभियान फिर से शुरू होता है तो उसमें ईरान के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर, महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थानों और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों पर हमले शामिल हो सकते हैं.
The Pentagon has told U.S. Central Command to finish preparations for the potential resumption of large-scale combat operations against Iran, according to Axios, citing U.S. officials. Per the report, such an operation, which would be a joint operation with Israel, could take place before both the Israeli elections and the U.S. midterm elections. This comes following the meeting of U.S. President Donald J. Trump’s National Security Team at Camp David last week.
— OSINTdefender (@sentdefender) October 8, 2026
कुछ अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि ऊर्जा सुविधाओं पर हमला तेल आपूर्ति प्रभावित कर सकता है और वैश्विक बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने में मददगार साबित हो सकता है. व्हाइट हाउस में कुछ लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि इससे घरेलू पेट्रोल की कीमतें कम हो सकती हैं.
नवंबर 3 को होने वाले मिड-टर्म चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी को इससे राजनीतिक फायदा हो सकता है. लेकिन कई सलाहकार चुनाव के बाद तक इंतजार करने की सलाह दे रहे हैं क्योंकि अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने का जोखिम चुनाव परिणामों को नुकसान पहुंचा सकता है.
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चुनावी दबाव और तेल बाजार
अमेरिका में महंगाई और पेट्रोल की ऊंची कीमतें मतदाताओं के लिए बड़ा मुद्दा बनी हुई हैं. ट्रंप प्रशासन इस युद्ध को जल्द खत्म करने या प्रगति दिखाने की कोशिश में है. तेल कीमतों में उछाल शिपिंग, ट्रकिंग और खाद्य पदार्थों की लागत बढ़ा रहा है. अगर हमले होते हैं तो अल्पकाल में कीमतें और बढ़ सकती हैं, लेकिन कुछ रणनीतिकार मानते हैं कि लंबे समय में ईरान पर दबाव बढ़ने से बाजार स्थिर हो सकता है.
ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई की मौजूदा ऊंचाई इसी अनिश्चितता को दर्शाती है. किसी भी बड़े अभियान में कई जोखिम हैं. ईरान जवाबी कार्रवाई कर सकता है, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष फैल सकता है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील मार्ग प्रभावित हो सकते हैं. परमाणु ठिकानों पर हमले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना बढ़ा सकते हैं.
BREAKING: 🇺🇸🇮🇷 Officially the US is restarting the war against Iran, per Axios The Pentagon has instructed CENTCOM to complete preparations to resume major combat operations against Iran, U.S. officials tell Axios. https://t.co/63N3V0TfuN
— Megatron (@Megatron_ron) October 8, 2026
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पेंटागन जोर दे रहा है कि वह सिर्फ विकल्प विकसित कर रहा है, कोई फैसला नहीं लिया गया. स्थिति तरल है और राजनयिक प्रयास भी जारी बताए जा रहे हैं. कतर जैसे मध्यस्थ अभी भी बातचीत की कोशिश कर रहे हैं. यह घटना अमेरिका की मध्य पूर्व नीति की जटिलता को उजागर करती है. एक तरफ सैन्य विकल्प तैयार रखना ताकत का प्रदर्शन है, दूसरी तरफ चुनावी समय में इसका इस्तेमाल राजनीतिक दबाव पैदा करता है.
ट्रंप प्रशासन प्रगति दिखाना चाहता है, लेकिन युद्ध के अप्रत्याशित नतीजे हो सकते हैं. तेल बाजार पहले से तनाव में है और कोई भी बड़ा कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा. फिलहाल इंतजार है कि ट्रंप अंतिम फैसला कब और किस दिशा में लेते हैं. इस बीच क्षेत्र में तनाव बना रहेगा और बाजार अस्थिरता से जूझता रहेगा. यह स्थिति याद दिलाती है कि सैन्य योजनाएं और राजनीतिक लक्ष्य अक्सर एक-दूसरे से जुड़े होते हैं, लेकिन उनके नतीजे हमेशा अनुमान के मुताबिक नहीं होते.