ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने फारस की खाड़ी और ओमान सागर के तटों के पास बनाई गई अपनी अंडरग्राउंड मिसाइल सुविधाओं के वीडियो जारी किए हैं. इन ठिकानों को ईरानी मीडिया ने 'मिसाइल सिटी' बताया है. जारी वीडियो में जमीन के नीचे बनी रोशनी से जगमगाती सुरंगें, उनमें खड़े सैन्य वाहन, भंडारित मिसाइलें और सैन्यकर्मी दिखाई देते हैं. एक सफेद ट्रक को सुरंग के भीतर चलते हुए भी दिखाया गया है.
इन सुविधाओं में एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों, बैलिस्टिक मिसाइल प्रणालियों, एयर डिफेंस सिस्टम और तेज गति वाली सैन्य नौकाओं की मौजूदगी बताई गई है. ईरान ने इस प्रदर्शन के जरिए अपनी सैन्य तैयारी और संभावित हमलों का जवाब देने की क्षमता का संदेश देने की कोशिश की है.
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ईरान की इन अंडरग्राउंड सुविधाओं को ऐसे सैन्य ठिकानों के रूप में पेश किया गया है, जहां हथियारों को सुरक्षित रखा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर तेजी से तैनात किया जा सकता है. सामान्य सैन्य ठिकाने हवाई हमलों, मिसाइल हमलों और निगरानी के कारण आसानी से निशाने पर आ सकते हैं.
इसके उलट जमीन के नीचे बनाई गई सुरंगें हथियारों और सैन्य संसाधनों को छिपाने तथा उनकी सुरक्षा बढ़ाने में मदद करती हैं. ईरानी मीडिया के मुताबिक, इन ठिकानों को हवाई हमलों का सामना करने के लिहाज से मजबूत बनाया गया है. हालांकि, केवल वीडियो जारी होने से इन संरचनाओं की वास्तविक मजबूती, गहराई और हमलों के खिलाफ उनकी क्षमता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती.
वीडियो में धार्मिक नेता हुज्जतुल इस्लाम अब्दुल्ला हाजी-सादेगी को इन सुविधाओं के निरीक्षण के दौरान भी दिखाया गया है. कुछ दृश्यों में सैन्यकर्मी प्रार्थना करते नजर आते हैं. इस तरह वीडियो में सैन्य शक्ति के प्रदर्शन के साथ धार्मिक और वैचारिक संदेश भी शामिल किया गया है.
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास सैन्य ताकत का महत्व
ईरान की इन सुविधाओं का रणनीतिक महत्व फारस की खाड़ी और ओमान सागर की भौगोलिक स्थिति से जुड़ा है. इसी क्षेत्र में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज स्थित है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है.

ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य तनाव का असर केवल ईरान और उसके पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार और समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है. ईरान के पास मौजूद एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें समुद्र में चलने वाले युद्धपोतों और अन्य जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं.
बैलिस्टिक मिसाइल प्रणालियां दूर स्थित लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता से जुड़ी हैं. तेज गति वाली सैन्य नौकाएं तटीय क्षेत्रों में तेजी से कार्रवाई करने के लिए उपयोगी हो सकती हैं. इन हथियारों को अंडरग्राउंड ठिकानों में रखने का उद्देश्य संभावित संघर्ष के दौरान उन्हें सुरक्षित बनाए रखना और जरूरत के समय सक्रिय करना हो सकता है.
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ईरान का संदेश: तैयारी और प्रतिरोधक क्षमता
इन वीडियो को जारी करने के पीछे ईरान का प्रमुख उद्देश्य अपनी प्रतिरोधक क्षमता यानी डिटरेंस दिखाना माना जा सकता है. डिटरेंस का अर्थ है विरोधी देश को यह संदेश देना कि हमला करने की स्थिति में उसे भी गंभीर सैन्य नुकसान उठाना पड़ सकता है. अंडरग्राउंड ठिकानों में हथियारों की मौजूदगी दिखाकर ईरान यह संकेत देना चाहता है कि हवाई हमलों से उसकी सैन्य क्षमता को पूरी तरह समाप्त करना आसान नहीं होगा.

हालांकि, वीडियो में दिखाई गई सैन्य ताकत और वास्तविक युद्ध क्षमता में अंतर हो सकता है. किसी हथियार का मौजूद होना और युद्ध के दौरान उसका प्रभावी इस्तेमाल कर पाना दो अलग बातें हैं. इसके लिए संचार व्यवस्था, खुफिया जानकारी, लक्ष्य पहचान, कमांड सिस्टम और लगातार आपूर्ति जैसी सुविधाएं भी जरूरी होती हैं.
ईरान की यह प्रस्तुति ऐसे समय में आई है, जब फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बनी रहती है. अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकानों का खुलासा क्षेत्रीय देशों और पश्चिमी शक्तियों को यह संदेश देता है कि ईरान समुद्री रास्तों की सुरक्षा और सैन्य संतुलन को प्रभावित करने की क्षमता बनाए रखना चाहता है. हालांकि, इन वीडियो को तत्काल सैन्य कार्रवाई का संकेत मानना उचित नहीं होगा. फिलहाल यह प्रदर्शन ईरान की सैन्य तैयारी, रणनीतिक सोच और विरोधियों को चेतावनी देने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है.