क्रूज मिसाइल
एक क्रूज मिसाइल (Cruise Missiles) एक निर्देशित मिसाइल (Guided Missile) है जिसका उपयोग स्थलीय लक्ष्यों के खिलाफ किया जाता है. यह मिसाइल वायुमंडल में रहता है और अपने उड़ान के बड़े हिस्से को लगभग स्थिर गति से उड़ाता है.
क्रूज मिसाइलों को उच्च परिशुद्धता (High Precision) के साथ लंबी दूरी पर एक बड़ा वारहेड पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है. आधुनिक क्रूज मिसाइलें उच्च सबसोनिक, सुपरसोनिक या हाइपरसोनिक गति से उड़ान भरने में सक्षम हैं (Speed of a Cruise Missiles). इसमें सेल्फ-नेविगेटिंग है. नॉन-बैलिस्टिक, बेहद कम ऊंचाई वाले trajectory पर उड़ान भरने में भी सक्षम है.
भारत के पास ब्रह्मोस, ब्रह्मोस-ए और निर्भय जैसे क्रूज मिसाइल हैं (Indian Cruise Missiles).
ब्रह्मोस मिसाइल की अचूक मारक क्षमता और ऑपरेशन सिंदूर में इसके प्रदर्शन को देखते हुए अब रूसी सेना भी इसे शामिल करने जा रही है. फिलीपींस के बाद रूस के साथ यह रक्षा सौदा ऐतिहासिक होगा.
दोतरफा युद्ध की चुनौतियों और वैश्विक संघर्षों से सीख लेते हुए भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है. ताबड़तोड़ मिसाइल परीक्षण किसी युद्ध की तैयारी नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता और डिटरेंस की गारंटी हैं.
डीआरडीओ ने ओडिशा तट से लंबी दूरी की लैंड अटैक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. 1000-1500 किमी रेंज वाली यह मिसाइल चीन और पाकिस्तान के कई शहरों को सीधे टारगेट कर सकती है.
इजरायली नौसेना ने युद्ध में उतरकर भू-मध्य सागर से ईरान पर मिसाइल हमले किए हैं. तकनीक में इजरायल की परमाणु-सक्षम पनडुब्बियां आगे हैं, जबकि ईरान के पास विशाल 'मच्छर सेना' का नेटवर्क है.
रूस के साथ सैन्य टकराव और उकसावे के डर से अमेरिका जर्मनी को टोमाहॉक मिसाइलें देने का सौदा रद्द कर सकता है. नाटो से अमेरिका की यह रणनीतिक वापसी जर्मनी की सुरक्षा के लिए बड़ा संकट है.
पाकिस्तान ने स्वदेशी और हल्के वजन वाली रसूब-250 क्रूज मिसाइल पेश की है. आसिम मुनीर की सेना आजकल क्रूज मिसाइलों पर फोकस कर रही है. क्योंकि ये रडार को चकमा दे सकती है.
पाकिस्तान ने फतह-4 क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. इस मिसाइल की रेंज 750 KM है, जो दिल्ली, अमृतसर, लुधियाना, जम्मू समेत कई भारतीय शहरों को अपनी पहुंच में रखती है.
भारतीय सेना ने पूर्वी कमांड के अभ्यास प्रलयंकर में लैंड-बेस्ड ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल प्रदर्शन किया. वीडियो में मिसाइल की तैनाती और लॉन्च की प्रक्रिया दिखाई गई. यह अभ्यास सेना की सटीकता, गति और लड़ाकू तैयारियों को दर्शाता है.
ईरान संघर्ष में अमेरिका ने अपनी बेहतरीन मिसाइलें और अरबों डॉलर का गोला-बारूद फूंक दिया है जिससे उसकी सैन्य ताकत पर बुरा असर पड़ा है. 1200 पैट्रियट और 1000 टोमाहॉक मिसाइलों के खर्च के बाद अब अमेरिका के पास चीन और रूस जैसे प्रतिद्वंद्वियों के लिए पर्याप्त स्टॉक नहीं बचा है. करीब 2.9 लाख करोड़ रुपये की युद्ध लागत ने पेंटागन की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि इस कमी को पूरा करने में कई साल लग सकते हैं
पाकिस्तान ने हाल ही में स्वदेशी 'तैमूर' एयर-लॉन्च क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. ये मिसाइल लगभग 600 किलोमीटर तक दुश्मन के समुद्री लक्ष्यों को निशाना बना सकती है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी है और इसे समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में एक मील का पत्थर माना है.
अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) का दावा है कि ईरान के मिसाइल लॉन्चर और मिसाइलें प्रभावहीन हो चुकी हैं. लेकिन अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का मानना है कि ईरान के पास अभी भी हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें मौजूद हैं और वो भूमिगत स्टोरेज से उन्हें दोबारा सक्रिय कर सकते हैं.
पाकिस्तान ने कोलकाता पर हमले की धमकी दी है. इसके पीछे उसका सबसे लंबी दूरी वाली मिसाइल शाहीन-III है, जिसकी रेंज 2750 किलोमीटर है. यह मिसाइल पूरे भारत को निशाना बना सकती है. पाकिस्तान के पास शाहीन-II (1800 किमी), अबाबील (2200 किमी, MIRV) और गौरी (1500 किमी) जैसी अन्य मिसाइलें भी हैं.
ईरान के साथ जंग में अमेरिकी सेना JASSM-ER क्रूज मिसाइलों का बेतहाशा इस्तेमाल कर रही है. युद्ध के पहले चार हफ्तों में हजारों मिसाइलें खर्च हो चुकी हैं, जिससे अमेरिकी मिसाइल भंडार में कमी आई है. अब दुनिया भर में कुछ सौ ही JASSM-ER क्रूज मिसाइलें बची हैं.
CENTCOM ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरान की हार्डेंड एंटी-शिप मिसाइल साइट्स पर हमला किया. इसमें 5000 पाउंड वजन का बंकर बस्टर बम GBU-72 इस्तेमाल करने की खबर आ रही है. इस स्टोरी में एक वीडियो है जो इसके छोटे वर्जन के टेस्ट का है. उसे देखकर आपको इस बम की ताकत का अंदाजा लग जाएगा.
ईरान ने अमेरिका-इजरायल के खिलाफ सुनियोजित जवाबी हमला किया. बैलिस्टिक (शहाब-3, सेज्जिल), क्रूज (सुमार, कुद्स) मिसाइलों और शाहेद ड्रोनों से खाड़ी देशों में अमेरिकी अड्डे (बहरीन NSA, कतर अल उदैद, यूएई अल धफरा) और इजरायल के तेल अवीव ठिकानों को निशाना बनाया. मोज़ैक डिफेंस रणनीति से छिपे लॉन्चरों से हमले किए.
भारत ईरान संघर्ष के बीच अपनी वायु रक्षा मजबूत कर रहा है. रूस से 5 अतिरिक्त S-400 सुदर्शन स्क्वॉड्रन खरीदने की योजना है, जो ऑपरेशन सिंदूर में सफल रहे. फ्रांस से SCALP क्रूज मिसाइल, राफेल के लिए मेटियोर एयर-टू-एयर मिसाइल और इजरायल से बाराक-8 जैसी मिसाइलें खरीदने की तैयारी है. स्वदेशी अकाश, QR-SAM के साथ मल्टी-लेयर डिफेंस सिस्टम बन रहा है.
ईरान के पास कई अंडरग्राउंड ड्रोन और मिसाइल बेस हैं. जिनमें मिसाइलों और ड्रोन को रखा जाता है. ताकि जरूरत पड़ने पर हमला किया जा सके. मिसाइल सिटी की वजह से खाड़ी देशों में खलबली मच गई है. अमेरिका की नजर इन मिसाइल सिटी को बर्बाद करना चाहता है.
ईरान के 5 बड़े हथियार अमेरिकी नौसेना को मिडिल ईस्ट में चुनौती दे सकते हैं. फतह हाइपरसोनिक मिसाइलें, खलीज-ए-फार्स एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलें, सेज्जिल/खोर्रमशहर बैलिस्टिक मिसाइलें, कादर/गादर क्रूज मिसाइलें और शाहेद स्वार्म ड्रोन्स. ये स्वार्म अटैक, सैचुरेशन और A2/AD रणनीति से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में यूएस कैरियर ग्रुप को महंगा/जोखिम भरा बना सकते हैं.
पाकिस्तान और चीन की रॉकेट-मिसाइल फोर्स भारत के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. पाक की ARFC में फतह सीरीज (750-1000 किमी) तेजी से बढ़ रही है, जबकि चीन की PLARF दुनिया की सबसे बड़ी है- 1250+ मिसाइलें, 600+ परमाणु वॉरहेड और हाइपरसोनिक तकनीक है. भारत की मिसाइलें (अग्नि-5, ब्रह्मोस) मजबूत हैं, लेकिन संख्या और टेक्नोलॉजी में पीछे हैं. दो-मोर्चे पर जंग का खतरा गंभीर परिणाम ला सकता है.
ईरान की सैन्य ताकत मध्य पूर्व में मजबूत है. 2025 ग्लोबल फायरपावर रैंकिंग में 16वें स्थान पर है. इसके पास हजारों मिसाइलें और ड्रोन हैं. ईरान से अमेरिका की दूरी बहुत ज्यादा है इसलिए ईरान वहां तक नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा. लेकिन अरब देशों में अमेरिकी बेस पर हमला करेगा. अमेरिका के लिए दूरी समस्या नहीं है.
पाकिस्तान वायुसेना ने स्वदेशी तैमूर एयर लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया. 600 किमी रेंज वाली यह मिसाइल कम ऊंचाई पर उड़कर दुश्मन की एयर डिफेंस से बच सकती है. लेकिन परीक्षण के दौरान मिसाइल टारगेट एरिया में सटीकता से नहीं गिरी. अब सोशल मीडिया पर पाकिस्तान का मजाक उड़ रहा है.