चीन का रियल एस्टेट सेक्टर पहले से ही सुस्ती और भारी कर्ज से जूझ रहा है, लेकिन अब उसके सामने एक नई और बड़ी मुसीबत आ खड़ी हुई है. देश में हजारों कमर्शियल संपत्तियों की 'लैंड-यूज़ लीज' खत्म होने के करीब पहुंच रही है. जमीन के मालिकाना हक को लेकर अनिश्चितता के चलते निवेशकों का भरोसा टूट रहा है, संपत्तियों के दाम तेजी से गिर रहे हैं और उन्हें बेचना बेहद मुश्किल हो गया है.
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट और कुशमैन एंड वेकफील्ड के अनुमानों के मुताबिक, चीन में करीब 1 ट्रिलियन युआन ($148 अरब डॉलर) से अधिक मूल्य की गैर-आवासीय संपत्तियों के लीज की अवधि अब 20 साल या उससे भी कम बची है. पिछले पांच सालों से जारी रियल एस्टेट मंदी के बीच यह अनिश्चितता डेवलपर्स और निवेशकों की कमर तोड़ रही है.
क्या है जमीन के मालिकाना हक का नियम?
चीन में शहरी जमीन पूरी तरह से सरकार के स्वामित्व में होती है. कोई भी बिल्डर या नागरिक जमीन का मालिक नहीं होता, बल्कि उन्हें एक तय समय के लिए जमीन के इस्तेमाल का अधिकार मिलता है.
ये नियम 1990 के दशक की शुरुआत में बनाए गए थे, अब जैसे-जैसे इन लीज की समय-सीमा खत्म हो रही है, निवेशकों के सामने यह भ्रम बना हुआ है कि लीज का नवीनीकरण होगा या नहीं, इसके लिए कितना शुल्क देना होगा और लीज कितने सालों के लिए बढ़ाई जाएगी.
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बैंकों और निवेशकों ने बढ़ाई दूरी
यह संकट सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि सौदों पर असर डाल रहा है, कुशमैन एंड वेकफील्ड के अनुसार, जिन संपत्तियों की लीज 10 साल से कम बची है, बैंक उन्हें रीफाइनेंस करने या नया लोन देने से कतरा रहे हैं. जोंस लैंग लासाले (JLL) के मुताबिक, बीमा कंपनियां और बड़े निवेशक केवल उन्हीं संपत्तियों में निवेश करना चाहते हैं जिनकी लीज कम से कम 20 साल बची हो.
खरीदार भविष्य के संभावित नवीनीकरण खर्च को ध्यान में रखते हुए भारी छूट की मांग कर रहे हैं. चीन के प्रमुख शहरों में दफ्तरों की कीमतें अपने उच्चतम स्तर से 40% से अधिक गिर चुकी हैं. चीनी डेवलपर्स पहले ही करीब $130 अरब डॉलर के कर्ज में डिफॉल्ट कर चुके हैं. संपत्तियां न बिकने से उनका फंड जुटाना और मुश्किल हो गया है.
आने वाले सालों में और बिगड़ेगी स्थिति
सीबीआरई (CBRE) के अनुमान के मुताबिक, साल 2030 तक चीन के 18 प्रमुख शहरों में लगभग 3 करोड़ वर्ग मीटर ऑफिस और रिटेल स्पेस की लीज 20 साल से कम रह जाएगी. असली आंकड़ा इससे भी बड़ा हो सकता है क्योंकि इसमें सिंगल-ओनर प्रॉपर्टीज ही शामिल हैं.
संकट को गहराता देख चीनी प्रशासन अब हरकत में आ रहा है. गुआंगझू के बाद अब शंघाई के अधिकारियों ने भी लीज विस्तार की शर्तों और लागत को तय करने के लिए गाइडलाइन्स का मसौदा जारी किया है, ताकि बाजार में बने अनिश्चितता के माहौल को कम किया जा सके.
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