भारत के अमीर निवेशक अपने पोर्टफोलियो में रियल एस्टेट की भूमिका को नए सिरे से तय कर रहे हैं. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि उनकी प्राथमिकताएं अब सिर्फ पैसा कमाने से बदलकर पैसा सुरक्षित रखने की ओर बढ़ रही हैं. इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का कहना है कि हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स और अल्ट्रा हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स अब प्रॉपर्टी को केवल एक इच्छा पूरी करने वाली खरीदारी नहीं मानते, बल्कि इसे अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने, तय आय कमाने और लंबे समय तक मूल्य बनाए रखने के एक मजबूत साधन के रूप में देखते हैं.
जैसे-जैसे संपत्ति बढ़ती है, निवेश के फैसले और अधिक समझदारी भरे हो जाते हैं. लोग पैसे की बढ़त के साथ-साथ स्थिरता, अगली पीढ़ी के लिए प्लानिंग और नियमित आय के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं. रियल एस्टेट अपनी ठोस मालिकाना पहचान और नियमित इनकम की वजह से इस सोच में मुख्य भूमिका निभाता है.
BOP.in के सह-संस्थापक गौरव मावी के अनुसार, जैसे-जैसे संपत्ति बढ़ती है, निवेश का तरीका भी बदल जाता है, उन्होंने कहा, "संपत्ति बनाने के शुरुआती दौर में मुख्य ध्यान पैसे को तेजी से बढ़ाने पर होता है, लेकिन समय के साथ-साथ ध्यान सुरक्षा, स्थिरता, जोखिम कम करने और ऐसी संपत्तियां बनाने पर चला जाता है जो आने वाली पीढ़ियों के काम आ सकें. रियल एस्टेट इस सफर में एक महत्वपूर्ण जगह रखता है, क्योंकि संपत्ति बढ़ने के साथ इसका उद्देश्य भी बदल जाता है.
यह भी पढ़ें: करोड़ों के फ्लैट, इंफ्रास्ट्रक्चर कौड़ियों का! बारिश में आखिर क्यों 'रेंगने' लगता है गुरुग्राम?
पैसा कमाने से लेकर पैसा सुरक्षित रखने तक
नए निवेशकों के लिए प्रॉपर्टी अक्सर एक बड़ी वित्तीय सफलता का प्रतीक होती है, लेकिन स्थापित कारोबारी परिवारों और अमीर लोगों के लिए यह शेयर बाजार और अन्य वित्तीय साधनों के साथ-साथ पोर्टफोलियो को मजबूती देने का काम करती है.
शेयर बाजार जैसे सीधे जुड़े निवेशों के विपरीत, प्रीमियम आवासीय संपत्तियां, कमर्शियल रियल एस्टेट, जमीन और नियमित आय देने वाली एसेट्स न केवल कीमत बढ़ने का मौका देती हैं, बल्कि एक तय इनकम भी देती हैं.
भारत में लगातार बढ़ रही अमीरों की संख्या इस रुझान को और बढ़ावा दे रही है. नाइट फ्रैंक (Knight Frank) की 'वेल्थ रिपोर्ट' में भारत को दुनिया भर में UHNIs की सबसे तेजी से बढ़ती आबादी वाले देशों में गिना गया है. जैसे-जैसे संपत्ति बढ़ रही है, संपत्ति प्रबंधन रणनीति में रियल एस्टेट का स्थान और मजबूत हो रहा है.
प्रॉपर्टी निवेश में पेशेवर रवैया
विशेषज्ञों का कहना है कि अमीर निवेशक अब रियल एस्टेट चुनते समय बहुत सतर्क हो गए हैं. वे अब सिर्फ लोकेशन या पुरानी जान-पहचान के आधार पर प्रॉपर्टी खरीदने के बजाय इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, किराए से मिलने वाला रिटर्न (Rental Yields), मांग की संभावनाएं, बिल्डर की साख और भविष्य में बेचने के मौकों जैसी चीजों का बारीकी से आकलन करते हैं.
कमर्शियल रियल एस्टेट को इस सोच से काफी फायदा हुआ है. ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस, संगठित रिटेल स्पेस और मिक्स्ड-यूज प्रोजेक्ट्स ऐसे निवेशकों को बहुत आकर्षित कर रहे हैं जो रेगुलर किराए की आय चाहते हैं. इसमें मल्टीनेशनल कंपनियों और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की तरफ से भारी मांग देखी जा रही है.
यह भी पढ़ें: बेंगलुरु में आधी सैलरी खा जाती है EMI! घर की कीमतों में लगी आग, बेबस हुआ वर्किंग क्लास
लग्जरी घरों के कई फायदे
लग्जरी हाउसिंग मार्केट अब सिर्फ एक बड़े एड्रेस तक सीमित नहीं रह गया है. अमीर खरीदार अब प्राइवेसी, वेलनेस, सस्टेनेबिलिटी, स्मार्ट-होम टेक्नोलॉजी, सुरक्षा, बेहतर आर्किटेक्चर और लाइफस्टाइल सुविधाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं. गुरुग्राम में गोल्फ कोर्स रोड और गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड, सेंट्रल दिल्ली और नोएडा के चुनिंदा इलाके अमीर खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं, क्योंकि ये कनेक्टिविटी के साथ-साथ प्राइवेसी भी देते हैं.
सलाहकारों की मदद का बढ़ता महत्व
जैसे-जैसे पोर्टफोलियो बड़े हो रहे हैं, निवेशक अब प्रॉपर्टी चुनने, लोकेशन का विश्लेषण करने, बिल्डर का मूल्यांकन करने, रेंटल स्ट्रेटेजी बनाने और बेचने की योजना के लिए पेशेवर सलाहकारों की मदद ले रहे हैं. मावी के अनुसार, HNI और UHNI निवेश का भविष्य सिर्फ ज्यादा से ज्यादा संपत्ति जमा करने पर नहीं, बल्कि सोच-समझकर सही जगह पैसा लगाने पर टिका होगा. इस तरीके में सही से चुनी गई रियल एस्टेट हमेशा एक अहम हिस्सा रहेगी, जो वित्तीय एसेट्स के साथ-साथ स्थिरता, नियमित आय और लंबे समय तक वैल्यू प्रदान करेगी.
यह भी पढ़ें: Repo Rate: हो गया ऐलान... जानिए घटेगी या बढ़ेगी आपके होम-ऑटो लोन की EMI