टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने 'सर रतन टाटा ट्रस्ट' (SRTT) के ट्रस्टी पद से अपने कार्यकाल की समाप्ति से तीन दिन पहले इस्तीफा दे दिया है. उनका मौजूदा कार्यकाल 14 अगस्त को खत्म होना था. उन्होंने एक और कार्यकाल के लिए अपना नाम आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया था. वह एसआरटीटी में बतौर ट्रस्टी दोबारा नियुक्ति के लिए अपने नाम पर विचार नहीं चाहते.
विजय सिंह का इस्तीफा ऐसे समय हुआ है, जब टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टियों के बीच कई मुद्दों को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं. उनके जाने से ट्रस्ट के भीतर चल रही खींचतान और अहम फैसलों को लेकर बनी स्थिति एक बार फिर चर्चा में आ गई है.
विजय सिंह ने क्यों छोड़ा ट्रस्टी पद?
रिपोर्ट के मुताबिक, विजय सिंह 'सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट' के ट्रस्टी के तौर पर एक और साल पद पर बने रहेंगे. सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सर रतन टाटा ट्रस्ट में अपने अगले कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्ति पर विचार नहीं चाहते थे. सूत्रों के मुताबिक उन्हें साथी ट्रस्टियों का सर्वसम्मत समर्थन मिलना भी मुश्किल नजर आ रहा था. ऐसे में उनके दोबारा नियुक्त होने को लेकर सहमति बनती नहीं दिख रही थी.
ट्रस्ट की बैठकों पर क्यों लगी है रोक?
सर रतन टाटा ट्रस्ट ने महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर से कुछ अहम बैठकें आयोजित करने की अनुमति मांगी है. हालांकि, चैरिटी कमिश्नर ने कुछ मामलों पर फैसला आने तक इन बैठकों पर रोक लगा रखी है. इनमें नवाजभाई शेयरों के कथित ट्रांसफर से जुड़ा मुद्दा और परमानेंट ट्रस्टियों की नियुक्ति को लेकर की गई शिकायत शामिल है. बैठकों पर रोक के कारण ट्रस्ट के जरूरी कामकाज और फैसलों पर असर पड़ने की बात सामने आई है.
₹400 करोड़ की चैरिटेबल डिस्बर्समेंट पर असर?
सर रतन टाटा ट्रस्ट की बैठकों पर रोक के कारण करीब ₹400 करोड़ की चैरिटेबल डिस्बर्समेंट और आने वाले कुछ शेयरहोल्डर फैसले प्रभावित हो सकते हैं. ट्रस्ट का कहना है कि जरूरी बैठकें नहीं हो पाने की वजह से उसके नियमित और महत्वपूर्ण कामकाज पर असर पड़ रहा है. ऐसे में चैरिटी कमिश्नर की ओर से बैठकों की अनुमति मिलने का इंतजार महत्वपूर्ण हो गया है.
वेणु श्रीनिवासन भी छोड़ चुके हैं पद
विजय सिंह का इस्तीफा ऐसे घटनाक्रम के बाद हुआ है, जब उनके साथी वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन ने मई में टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट से इस्तीफा दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों की दोबारा नियुक्ति का ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने विरोध किया था. उनका तर्क था कि 1923 के ट्रस्ट डीड में ट्रस्टियों के लिए प्रैक्टिस करने वाले पारसी जोरास्ट्रियन और मुंबई के स्थायी निवासी होने जैसी शर्तें निर्धारित हैं.
अब आगे क्या होगा?
विजय सिंह के सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी पद से हटने के बाद अब नजर ट्रस्ट के लंबित फैसलों पर है. सबसे अहम सवाल यह है कि महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित करने की अनुमति कब देते हैं. इसके साथ ही नवाजभाई शेयरों के कथित ट्रांसफर और परमानेंट ट्रस्टियों की नियुक्ति से जुड़ी शिकायत पर आने वाला फैसला भी महत्वपूर्ण होगा. इन मामलों का असर ट्रस्ट की चैरिटेबल गतिविधियों, शेयरहोल्डर से जुड़े फैसलों और भविष्य की नियुक्तियों पर पड़ सकता है. फिलहाल, विजय सिंह के इस्तीफे ने टाटा ट्रस्ट्स के भीतर चल रहे मतभेदों और निर्णय लेने की प्रक्रिया को एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है.