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'भारत हमारे रडार पर है', अब चीन को लेकर आरोप मढ़ा, आखिर US चाहता क्या है?

डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो की मानें तो चीन अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए 40 से अधिक देशों के रास्ते अपने सामान अमेरिका भेज रहा है. इसमें मेक्सिको और दक्षिण एशियाई देश मुख्य जरिया बने हुए हैं.

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अब अमेरिका ने भारत पर चीन की मदद करने का आरोप लगाया है. (Photo: ITG)
अब अमेरिका ने भारत पर चीन की मदद करने का आरोप लगाया है. (Photo: ITG)

अमेरिका आखिर क्या चाहता है? भारत और रूस के बीच दोस्ती और बढ़ते व्यापारिक रिश्ते से उसे परेशानी है. रूस से भारत कच्चा तेल खरीद रहा है, इसे रोकने के लिए अमेरिका हर दिन नया दांव चल रहा है, अभी हाल में भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी है. लेकिन इस बीच अब अमेरिका ने एक ऐसा आरोप लगाया है, जो हास्यास्पद लगता है.

दरअसल, अब अमेरिका ने भारत पर चीन को मदद पहुंचाने का आरोप लगाया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापारिक सलाहकार पीटर नवारो ने भारत पर गंभीर आरोप लगाया है. व्हाइट हाउस की एक नई रिपोर्ट का हवाला देते हुए नवारो ने कहा है कि 'भारत अमेरिका के जांच रडार पर है', नवारो का यह बयान उस अमेरिकी रिपोर्ट के संदर्भ में आई है, जिसमें भारत सहित लगभग 40 देशों को चीन के 'शैडो ट्रांस-शिपमेंट नेटवर्क' का हिस्सा बताया गया है.

पीटर नवारो की मानें तो चीन अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए 40 से अधिक देशों के रास्ते अपने सामान अमेरिका भेज रहा है. इसमें मेक्सिको और दक्षिण एशियाई देश मुख्य जरिया बने हुए हैं.

व्हाइट हाउस की रिपोर्ट में भारत के गुजरात, चेन्नई और पुणे को अमेरिका के सिंसिनाटी, डेटन और कोलंबस शहरों की 'अग्ली सिस्टर सिटीज' कहा गया है. यह शब्द उन विदेशी उत्पादन केंद्रों के लिए इस्तेमाल हुआ जो पंप और कंप्रेसर बनाकर चीनी सामानों को रूट बदलकर अमेरिका भेजते हैं. उनका कहना है कि इस अवैध तरीके से अमेरिकी विनिर्माण उद्योग और स्थानीय रोजगार को भारी नुकसान पहुंच रहा है.

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क्या है 'शैडो ट्रांस-शिपमेंट' और अमेरिका का दावा?
व्हाइट हाउस की रिपोर्ट 'द ग्रेट ट्रांस-शिपमेंट स्कैम' के मुताबिक चीन पर अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ से बचने के लिए चीनी सामानों को तीसरे देशों के रास्ते अमेरिका भेजा जा रहा है. नवारो का आरोप है कि चीन अपने सामान पर मामूली प्रोसेसिंग, री-पैकेजिंग, री-लेबलिंग या रूट बदलकर उन्हें इन देशों से एक्सपोर्ट करता है, ताकि लगे कि प्रोडक्ट चीन में नहीं, बल्कि जो देश भेज रहा है, वहां बना है.

नवारो के मुताबिक इस अवैध तरीके की वजह से अमेरिका को हर साल लगभग 19 अरब से 26 अरब डॉलर के टैरिफ राजस्व का नुकसान हो रहा है. जब भारत-अमेरिका के बीच पारस्परिक टैरिफ समझौते पर बातचीत चल रही है. ऐसे में यह सिर्फ बयान नहीं, बल्कि बातचीत की मेज पर दबाव बढ़ाने वाला संकेत भी माना जा सकता है.

किन देशों पर उठाया गया सवाल?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन के इस नेटवर्क में भारत के अलावा मेक्सिको, कनाडा, यूरोपीय संघ (EU), जापान और दक्षिण कोरिया जैसे अमेरिका के कई प्रमुख व्यापारिक साझेदार शामिल हैं. नवारो ने चेतावनी दी है कि ट्रंप प्रशासन के तहत नए व्यापारिक ढांचों में ऐसे कड़े नियम शामिल किए जाएंगे, जिससे ट्रांस-शिपमेंट का जरिया बनने वाले देशों पर भारी जुर्माना या पेनॉल्टी लगाई जा सके.

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रूस से तेल आयात को लेकर भी घेरा
व्यापारिक टैरिफ के अलावा नवारो ने रूस से भारत के कच्चे तेल आयात का मुद्दा भी फिर से उठाया है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन उन देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है, जो नई पाबंदियों के बावजूद रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखे हुए हैं. बता दें, भारत लगातार रूस से कच्चा तेल आयात कर रहा है, जुलाई में कुल आयात का करीब 50 फीसदी कच्चा तेल भारत ने रूस से खरीदा है. जिसके बाद अमेरिका ने 100 फीसदी टैरिफ लगाने की बात कही है. 

पीटर नवारो इससे पहले भी भारतीय व्यापार नीतियों पर आक्रामक रुख अपनाते रहे हैं और भारत को टैरिफ किंग तक कह चुके हैं. उनके इस ताजा बयान से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक वार्ताएं और कड़े तेवर ले सकती हैं. 

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