भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अच्छी खबर है. दिग्गज क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच (Fitch Ratings) ने भारत की रेटिंग 'BBB-' पर बरकरार रखी है. साथ ही, रेटिंग आउटलुक को 'स्टेबल' रखा है. एजेंसी का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट से पैदा हुए एनर्जी शॉक और अमेरिका-ईरान युद्ध से जुड़ी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है.
फिच के मुताबिक, मौजूदा संकटों से भारत की आर्थिक ग्रोथ पर लंबे समय का बड़ा खतरा नजर नहीं आ रहा है. एजेंसी का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था ने कई बाहरी झटकों का मजबूती से सामना किया है और आगे भी ऐसा जारी रहने की उम्मीद है.
भारत की रेटिंग क्यों बरकरार?
फिच ने भारत की सबसे निचली इन्वेस्टमेंट ग्रेड रेटिंग 'BBB-' को बरकरार रखा है. एजेंसी के मुताबिक, भारत की मजबूत आर्थिक ग्रोथ और बाहरी वित्तीय स्थिति इसकी रेटिंग को सपोर्ट करती है. फिच ने यह भी कहा कि भारत की मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता में सुधार हुआ है. पॉलिसी पर भरोसा बढ़ा है और इससे अर्थव्यवस्था को बाहरी दबावों से निपटने में मदद मिल रही है.
FY27 में 6.4% GDP ग्रोथ का अनुमान
फिच ने वित्त वर्ष 2026-27 यानी FY27 में भारत की GDP ग्रोथ 6.4% रहने का अनुमान लगाया है. FY27 मार्च 2027 में खत्म होगा. एजेंसी का मानना है कि भारत की मजबूत ग्रोथ आगे भी आर्थिक स्थिति को सपोर्ट करेगी. खासकर एनर्जी की कीमतों में झटके और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती एक अहम फैक्टर बनी हुई है.
सरकारी कर्ज को लेकर क्या कहा?
फिच के मुताबिक, अगर भारत की आर्थिक ग्रोथ मजबूत बनी रहती है तो सरकारी कर्ज से जुड़े आंकड़ों में भी धीरे-धीरे सुधार हो सकता है. एजेंसी का कहना है कि तेज आर्थिक विकास से भारत के स्ट्रक्चरल क्रेडिट मेट्रिक्स में सुधार को बढ़ावा मिलेगा. इससे सरकारी कर्ज के बोझ में कमी आने की संभावना भी बढ़ सकती है.
सरकार का कर्ज कम करने का लक्ष्य
सरकार ने FY27 के बजट में डेट-टू-GDP रेशियो 55.6% रहने का अनुमान लगाया है. FY26 में यह 56.1% था. सरकार का लक्ष्य मार्च 2031 तक देश के डेट-टू-GDP रेशियो को घटाकर 50% तक लाना है. फिच के आकलन में मजबूत आर्थिक ग्रोथ इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद कर सकती है.
पश्चिम एशिया संकट का कितना असर?
पश्चिम एशिया में जारी संकट और अमेरिका-ईरान से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण एनर्जी मार्केट पर दबाव बना हुआ है. भारत के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि देश अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है. हालांकि, फिच का फिलहाल मानना है कि इन घटनाक्रमों से भारत की ग्रोथ पर टिकाऊ और बड़ा खतरा नहीं दिख रहा है. एजेंसी के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था ने हाल के वर्षों में बाहरी झटकों के प्रति अच्छी मजबूती दिखाई है.
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब?
फिच की रिपोर्ट भारत की आर्थिक बुनियाद को लेकर सकारात्मक संकेत देती है. 'BBB-' रेटिंग और 'स्टेबल' आउटलुक का मतलब है कि एजेंसी को फिलहाल भारत की क्रेडिट प्रोफाइल में बड़े बदलाव का दबाव नहीं दिख रहा है. हालांकि, आगे भारत की ग्रोथ, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक परिस्थितियों और सरकारी कर्ज के आंकड़ों पर नजर रहेगी. खास तौर पर FY27 में 6.4% GDP ग्रोथ का अनुमान और मार्च 2031 तक डेट-टू-GDP रेशियो 50% करने का सरकार का लक्ष्य अहम रहेगा.