अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को जमीन पर उतारने के लिए स्विट्जरलैंड के ब्यूर्गेनस्टॉक में रविवार से अहम शांति वार्ता शुरू होने जा रही है. इस बातचीत में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो चुके हैं.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करते हुए बताया कि इस वार्ता के इतर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ वहां मौजूद दूसरे देशों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कर सकते हैं. पाकिस्तान सरकार ने बताया है कि वो ईरान और अमेरिका के बीच बनी सहमतियों को पूरी तरह लागू करवाने के लिए अपना समर्थन जारी रखेगी.
इस शांति वार्ता के लिए दोनों देशों ने अपनी सबसे मजबूत टीमें मैदान में उतारी हैं. स्विट्जरलैंड के अधिकारियों ने शांति वार्ता के लिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल के आगमन का स्वागत किया है.
लेबनान में हमलों के बीच शांति वार्ता
ये वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब हिज्बुल्लाह के साथ संघर्ष विराम लागू होने के ठीक एक दिन बाद, शनिवार को इजरायल ने लेबनान में भारी एयर स्ट्राइक की. लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी एनएनए के मुताबिक, इन हमलों में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई. इजरायल का दावा है कि ये कार्रवाई हिज्बुल्लाह की ओर से रात में दागे गए रॉकेटों के जवाब में की गई थी.
ईरानी-अमेरिकी डेलिगेशन में शामिल ये दिग्गज
ईरानी मीडिया के मुताबिक, उनके प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गलिबाफ कर रहे हैं. इस टीम में विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ-साथ सुरक्षा, केंद्रीय बैंक और तेल क्षेत्र के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं. दूसरी ओर, अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस वाशिंगटन से स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो चुके हैं. अमेरिकी डेलिगेशन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ जैसे बड़े नाम शामिल हैं.
डोनाल्ड ट्रंप का 'गार्जियन एंजेल' वाला बयान
इस बातचीत के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक बड़ी पोस्ट लिखी है. ट्रंप ने ऐलान किया कि 60 दिनों के सीजफायर के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से कोई टोल नहीं वसूला जाएगा.
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हालांकि, ट्रंप ने इसके आगे एक सख्त शर्त भी जोड़ दी. उन्होंने लिखा कि अगर तय समय में कोई अंतिम शांति समझौता नहीं हो पाता है, तो अमेरिका अपनी तरफ से वहां टोल वसूल सकता है. उन्होंने लिखा, 'अगर समझौता पूरा नहीं होता है, तो मिडिल-ईस्ट के देशों के लिए गार्जियन एंजेल के रूप में दी गई सेवाओं के बदले अमेरिका टोल लगा सकता है. ये टोल अतीत, वर्तमान और भविष्य के खर्चों की भरपाई के लिए होगा.'