जेडी वेंस (JD Vance) रिपब्लिकन पार्टी के राजनेता हैं. 2025 में वे उपराष्ट्रपति बनें. जेडी वेंस 2022 में ओहायो से अमेरिकी सीनेट के लिए चुने गए थे. वेंस का जन्म और पालन-पोषण ओहियो के मिडलटाउन में हुआ है. वे मरीन में शामिल हुए और इराक में सेवा की और बाद में ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी और येल लॉ स्कूल से डिग्री हासिल की. उन्होंने सिलिकॉन वैली में वेंचर कैपिटलिस्ट के रूप में भी काम किया.
वेंस ने अपनी किताब "हिलबिली एलेजी" को ट्रंप के राष्ट्रपति पद के लिए पहली बार चुनाव लड़ने के दौरान प्रकाशित किया था. 2016 की बेस्टसेलर रही इस किताब से वेंस ने अपना नाम बनाया. "हिलबिली एलेजी" किताब ने वेंस को ट्रंप के करीब लाया. डोनाल्ड ट्रंप को यह किताब बहुत पसंद आई और वेंस को तब से जानते थे जब वे अपना राजनीतिक करियर शुरू किया था. दोनों की दोस्ती हो गई. डोनाल्ड ट्रंप के 2016 के चुनाव जीतने के बाद, वेंस अपने मूल ओहियो लौट आए और एक एंटी-ओपियोइड चैरिटी की स्थापना की.
वेंस ने अपनी पत्नी उषा चिलुकुरी वेंस से येल में मिले थे.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पाकिस्तान की प्रेस की आजादी की कमी पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने बताया कि इसकी वजह से भी अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का MoU जारी होने में देरी हुई. बता दें कि वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पाकिस्तान 153वें स्थान पर है.
इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच दक्षिणी लेबनान में लड़ाई फिर तेज हो गई है. रात भर के हमलों में इजरायल के 4 सैनिक मारे गए, जबकि इजरायली एयरस्ट्राइक में 18 लेबनानी नागरिकों की जान गई. इस हिंसा से अमेरिका और ईरान के बीच हुई सीजफायर डील खतरे में है. ईरान ने स्विट्जरलैंड में बातचीत से इनकार कर दिया, जिसके बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपना दौरा टाल दिया.
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर जेनेवा में बैठक की तैयारियां चल रही हैं. कल एमओयू पर दोनों देशों ने दस्तखत किये थे. आज अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि आमने सामने बैठकर आगे की डील फाइनल करेंगे. इस बीच अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजरायल को सख्त हिदायत दी है.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के लेबनान प्लान से इजरायल की टेंशन बढ़ते हुए नज़र आ रहा है. उन्होंने इजरायल से शांति प्रक्रिया का सम्मान करने और लेबनान समझौते का दोनों पक्षों द्वारा पालन करने की बात कही है.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस हफ्ते ईरान युद्ध खत्म करने के लिए ट्रंप के साथ हुए शुरुआती समझौते के सबसे बड़े बचावकर्ता बनकर सामने आए, कई इंटरव्यू दिए, वीडियो जारी किया और अब स्विट्जरलैंड में बातचीत के नए दौर की शुरुआत से पहले अपनी ही पार्टी के संदेहों का जवाब दे रहे हैं.
चार महीने से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग का आखिकार अंत होते नजर आ रहा है. दोनों देश ने इस दिशा में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर दस्तखत किया है. अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इस एमओयू पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने दस्तखत किए हैं.
ईरान और अमेरिका के बीच एक बड़ा समझौता (MOU) जेनेवा में होने वाला है. इसमें ईरान की रुकी हुई संपत्ति वापसी, सभी पाबंदियां हटाने और तेल बिक्री की छूट शामिल है. होर्मुज खाड़ी में जहाजों से सेवा शुल्क वसूला जाएगा. लेबनान में जंग पूरी तरह बंद होगी. परमाणु मुद्दे पर अलग से 60 दिनों में बातचीत होगी.
इजरायल की मीडिया के हवाले से ये दावा किया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान में डील पर सहमति के लिए अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के गालीबाफ आज एक वर्चुअल मीटिंग करेंगे, जिसके बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोल दिया जाएगा.
अमेरिका में 2028 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर सियासी हलचल बढ़ने लगी है. रिपब्लिकन पार्टी में जेडी वेंस और मार्को रूबियो को बड़े दावेदारों के तौर पर देखा जा रहा है. डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों नेताओं की जमकर तारीफ की है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान जंग को लेकर सुरक्षा अधिकारियों संग वर्जीनिया में अहम बैठक की. ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और सैन्य कार्रवाई की आशंकाएं बढ़ गई हैं. वीडियों में जानें एक्सपर्ट्स इसे महाजंग-2 का इशारा क्यों मान रहे हैं और इसकी क्या अहमियत है.
अमेरिकी F/A-18 सुपर हॉर्नेट विमानों ने ओमान की खाड़ी में ईरानी टैंकरों M/T हसना, सी स्टार III और सेव्दा पर 6 और 8 मई को हमले किए. ब्लॉकेड लागू करने के लिए जहाजों को हमले से रोका गया.
अमेरिका में व्हाइट हाउस के पास एक हथियारबंद संदिग्ध के साथ अमेरिकी सीक्रेट सर्विस की मुठभेड़ हुई है. जिसके कारण व्हाइट हाउस में लॉकडाउन लगाया गया.
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर जल्द ही पाकिस्तान जाएंगे. अमेरिका के एक अधिकारी ने बताया है कि वो वहां जाकर ईरान के विदेश मंत्री से बातचीत करेंगे.
पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में आज से शांति वार्ता शुरू हो रही है. वार्ता में दोनों देशों के शीर्ष प्रतिनिधि शामिल हैं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और कई उच्च अधिकारी भी इस वार्ता में हिस्सा ले रहे हैं.
वाशिंगटन हिल्टन होटल में हुए फायरिंग के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप और उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे. फायरिंग की आवाज सुनते ही सुरक्षा बलों ने तुरंत ट्रंप को मेज के नीचे छिपा दिया और अधिकारियों को भी सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया.
वाशिंगटन हिल्टन में आयोजित हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम के दौरान गोलीबारी से हड़कंप मच गया. सीक्रेट सर्विस ने राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति वेंस को घेरे में लेकर सुरक्षित निकाला. 2,600 मेहमानों के बीच हुई इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा दिए हैं। शूटर पुलिस की गिरफ्त में है और मामले की जांच की जा रही है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वॉशिंगटन के हिल्टन होटल में हुई फायरिंग की कड़ी निंदा की है. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुरक्षित होने पर राहत जताई है. पीएम मोदी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, लोकतंत्र में इस तरह के हमले की जगह नहीं होनी चाहिए.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वॉशिंगटन फायरिंग की घटना के बाद राष्ट्रपति ट्रंप और उनके परिवार की सुरक्षा पर संतोष व्यक्त किया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक विरोध के बीच हिंसा का समर्थन नहीं किया जा सकता. वहीं, ट्रंप ने इस हमले के बावजूद अपने इरादे मजबूत बताते हुए इसे जंग जीतने के संकल्प से जोड़ा है. आरोपी कोल टॉमस एलन फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में है
वॉशिंगटन हिल्टन होटल में 'व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर' के दौरान गोलीबारी हुई, जिससे 2,600 मेहमानों में हड़कंप मच गया. मंच पर मौजूद राष्ट्रपति ट्रंप को सीक्रेट सर्विस ने सुरक्षित निकाला और हमलावर को पकड़ लिया. ट्रंप ने इसे 'गहमागहमी भरी शाम' बताते हुए सुरक्षाकर्मियों की फुर्ती की प्रशंसा की है. अब जांच जारी है और पूरे मामले पर कड़ी नजर रखी जा रही है
ईरान और अमेरिका के बीच जारी पर्दे के पीछे की बातचीत में पाकिस्तान की मध्यस्थता पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं. ईरानी सरकारी टेलीविजन ने पाकिस्तान पर 'डबल गेम' खेलने और अमेरिका की ओर झुकाव रखने का गंभीर आरोप लगाया है.
ईरान ने भी अमेरिका के साथ प्रस्तावित बातचीत में शामिल होने से इनकार कर दिया है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि अभी इस्लामाबाद जाने की कोई योजना नहीं है. उन्होंने इसके पीछे अमेरिका के रवैये को जिम्मेदार ठहराया.