scorecardresearch
 

इराक से अमेरिका की विदाई के बाद क्या बदलेगा? ईरान का दबदबा और ISIS की वापसी का डर

2003 में सद्दाम हुसैन सरकार को हटाने के लिए इराक में दाखिल हुई अमेरिकी सेना अब अपनी आखिरी सैन्य मौजूदगी भी खत्म कर रही है. अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों के बढ़ते प्रभाव और ISIS की वापसी को लेकर सुरक्षा चिंताएं सामने आ रही हैं.

Advertisement
X
21 साल बाद इराक से अमेरिकी सैनिकों की विदाई हुई (Photo-Reuters)
21 साल बाद इराक से अमेरिकी सैनिकों की विदाई हुई (Photo-Reuters)

21 साल बाद इराक से अमेरिका की आखिरी सैन्य विदाई होने जा रही है. अमेरिकी सैनिक अब इराक छोड़ रहे हैं. इसके साथ ही 2003 में शुरू हुआ अमेरिका का लंबा सैन्य मिशन खत्म हो रहा है. लेकिन अमेरिकी फौज के जाते ही इराक के सामने अपनी सुरक्षा को लेकर नई चुनौती खड़ी हो सकती है. अमेरिकी मौजूदगी खत्म होने के बाद ईरान समर्थित सशस्त्र गुट अपना असर बढ़ा सकते हैं. वहीं ISIS के फिर से सक्रिय होने का खतरा भी बना हुआ है.

2003 में अमेरिकी सेना ने सद्दाम हुसैन की सरकार को हटाने के लिए इराक में प्रवेश किया था. इसके बाद देश लंबे समय तक हिंसा और विद्रोह से जूझता रहा. 2011 में अमेरिकी सैनिक इराक से वापस चले गए थे, लेकिन 2014 में ISIS के तेजी से फैलने के बाद अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी दोबारा बढ़ाई.

यह भी पढ़ें: कतर की कोशिश फिर नाकाम! अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहे ईरान-अमेरिका, बातचीत फिर बेनतीजा

2014 से 2017 के बीच अमेरिकी मदद से इराकी सुरक्षा बलों ने ISIS के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेने के लिए बड़े अभियान चलाए. इसके बाद धीरे-धीरे अमेरिकी सैनिकों की भूमिका कम होती गई.

अमेरिका के जाते ही ईरान का दबदबा?

अब अमेरिकी सैनिकों की विदाई के साथ इराक में ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों के प्रभाव को लेकर चर्चा तेज है. इन गुटों का इराक की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था में पहले से प्रभाव रहा है. ऐसे में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी खत्म होने के बाद उनके प्रभाव को लेकर नई चिंताएं सामने आ रही हैं.

Advertisement

इराक के लिए यह स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि वह अमेरिका और ईरान दोनों के साथ रिश्ते बनाए रखने की कोशिश करता रहा है. अमेरिकी सेना के हटने के बाद बगदाद के सामने दोनों देशों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी.

ISIS का खतरा अभी टला नहीं

अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बावजूद ISIS का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. संगठन अपने बड़े हिस्से पर नियंत्रण खो चुका है, लेकिन उसके लड़ाके गुप्त नेटवर्क के जरिए सक्रिय हो सकते हैं. अब इराकी सुरक्षा बलों को ISIS से निपटने के लिए अपनी क्षमता पर ज्यादा निर्भर रहना होगा.

यह भी पढ़ें: ईरान के पास सबसे ज्यादा स्पीड वाली मिसाइल! ये हैं दुनिया की टॉप 10 हाइपरसोनिक हथियार

अमेरिकी सेना के जाने के बाद खुफिया जानकारी, निगरानी और सुरक्षा सहयोग में भी बदलाव आएगा. ऐसे में इराक के सामने अपनी सुरक्षा संभालने के साथ ईरान समर्थित गुटों और ISIS के खतरे के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement