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1 कचौरी-2 समोसा... स्लोगन नहीं, ये समझिए क्या चाहती हैं DU की लड़कियां? जानिए उनकी ये 10 मांगें

दक्षिण दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 साल की लड़की के साथ हुए दर्दनाक गैंगरेप के बाद डीयू के मिरांडा हाउस, एलएसआर (LSR), गार्गी और कमला नेहरू कॉलेज समेत कई कॉलेजों की छात्राएं सड़कों पर उतर आई हैं. आइए जानते हैं दिल्ली की सड़कों पर छिड़े इस आंदोलन, छात्राओं के अनोखे नारों और उनकी '10 सूत्रीय' मांगों के बारे में.

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सोशल मीड‍िया में छाए डीयू प्रोटेस्ट के स्लोगन की तस्वीर
सोशल मीड‍िया में छाए डीयू प्रोटेस्ट के स्लोगन की तस्वीर

'1 कचौरी, 2 समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा...' 
पूरा सोशल मीड‍िया ऐसे ही नारों से भरा पड़ा है. कई लोग इसमें हंसी का पुट खोज रहे हैं. माना ये जेन जी का अपना अंदाज है. लेकिन हमें सड़क पर उतरी लड़क‍ियों के दिल की बात भी समझनी होगी. हमें ये भी समझना होगा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के आर्ट्स फैकल्टी के बाहर जब सैकड़ों छात्राओं और युवाओं ने बीते द‍िन ये नारे लगाए तो यह सिर्फ एक तुकबंदी या स्लोगन नहीं था.  यह दिल्ली की सड़कों पर डर-डर कर जीने वाली लड़कियों का वो तीखा गुस्सा था, जो अब 'हुम औरतें आजाद हैं'के बैनर तले आंदोलन बनकर फूट पड़ा है. 

दक्षिण दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 साल की लड़की के साथ हुए दर्दनाक गैंगरेप के बाद डीयू के मिरांडा हाउस, एलएसआर (LSR), गार्गी और कमला नेहरू कॉलेज समेत कई कॉलेजों की छात्राएं सड़कों पर उतर आई हैं. आइए जानते हैं दिल्ली की सड़कों पर छिड़े इस आंदोलन, छात्राओं के अनोखे नारों और उनकी '10 सूत्रीय' मांगों के बारे में.

'रेपिस्ट को अंदर करो, लड़कियों को नहीं' 
इन प्रदर्शन कर रही लड़कियों का साफ कहना है कि किसी अपराध के बाद सुरक्षा के नाम पर हॉस्टल या घर में 'कर्फ्यू' लगाना समस्या का हल नहीं है. प्रशासन और समाज का काम महिलाओं की आजादी छीनना नहीं, बल्कि सड़कों को सुरक्षित बनाना है. प्रदर्शन के दौरान कई ऐसे नारे गूंजे जिन्होंने रूढ़िवादी सोच और पितृसत्ता पर सीधा प्रहार किया.

इनमें 'रेपिस्ट को अंदर करो, लड़कियों को नहीं' 'बेटी की लोकेशन नहीं, बेटे का इंटेंट चेक करो' और 'आजादी के लिए हमें प्रदर्शन की जरूरत नहीं होनी चाहिए' और 'Girls just wanna have fundamental rights' इस समाज की सोच पर सीधे प्रहार करने वाले हैं. ये जेन जी लड़कियां पूछ रही हैं कि आख‍िर क्यों हमेशा हमारे ख‍िलाफ क्राइम होने पर हम पर ही पहरे बढ़ाए जाते हैं. साथ ही लड़कियों ने अपनी मांगों का चार्टर भी सरकार के सामने रखा है. 

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क्या हैं DU की छात्राओं की 10 प्रमुख मांगें?

यूनिवर्सिटी, सराउंडिंग रोड्स और पार्कों के आसपास बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग.
छात्राओं के लिए अधिक डीटीसी (DTC) और स्पेशल शटल बसों का संचालन.
महिलाओं के लिए मेट्रो पास पर छूट.
वर्किंग और साफ-सुथरे पब्लिक टॉयलेट्स की व्यवस्था.
मेंस्ट्रुअल-हेल्थ (पीरियड्स हेल्थ) से जुड़ी बुनियादी सुविधाएं.
देर शाम सफर करने वाली छात्राओं के लिए सुरक्षित ट्रांसपोर्ट व्यवस्था.
बिना किसी कर्फ्यू या 'मोरल पुलिसिंग' के सार्वजनिक जगहों के इस्तेमाल की आजादी.
पुलिस गश्त में जवाबदेही और एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स के आसपास सख्त सुरक्षा.
बिना बताए समय-समय पर सीसीटीवी जांच और प्रॉपर सर्विलांस.
पीड़िता को दोष देने के बजाय अपराधियों पर तुरंत और सख्त कार्रवाई.

 

राहुल गांधी का मिला समर्थन, सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान
इस गैर-राजनीतिक आंदोलन को अब राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिल रहा है. इस पर राहुल गांधी का ट्वीट भी सामने आ चुका है. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर इस आंदोलन का समर्थन किया. उन्होंने लिखा क‍ि अपराधों की सजा महिलाओं को देना बंद करो. देश भर में महिलाएं सड़कों पर निकलने से डरती हैं और सरकार का जवाब होता है 'घर पर रहो'. यह पीड़ित को ही दोषी ठहराने वाला सिस्टम है.

सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली-एनसीआर में हुए हालिया अपराधों, विशेषकर आस्था कुंज पार्क की घटना पर स्वत: संज्ञान याचिका शुरू करने का निर्देश दिया है. अदालत ने कानून व्यवस्था और जन सुरक्षा पर अधिकारियों से जवाबदेही मांगी है.

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'निर्भया' के 14 साल बाद भी वही सवाल?
साल 2012 के निर्भया कांड के सालों बाद भी दिल्ली की सड़कें महिलाओं के लिए कितनी सुरक्षित हुई हैं, यह सवाल एक बार फिर खड़ा हो गया है. जेन-जी की यह नई पीढ़ी अब सिर्फ मोमबत्तियां जलाने के मूड में नहीं है, बल्कि वह शहर के हर कोने पर अपना बराबर का हक और आजादी मांग रही है.

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