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हमले, नाकाबंदी और रिकॉर्ड महंगा तेल... क्या हॉर्मुज का संकट दुनिया को मंदी की ओर धकेल रहा है?

होर्मुज में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई. यूएई ने अपने दो जहाजों पर हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया. अमेरिका ने कहा कि वह ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी अनिश्चित काल तक जारी रख सकता है और अगले हफ्ते नए आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान करेगा. ईरानी संसद की समिति ने अमेरिका, इजरायल और अन्य दुश्मन देशों के जहाजों पर रोक लगाने वाली योजना को मंजूरी दी है.

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ईरान पर अमेरिका के नए आर्थिक दबाव से बढ़ा संकट (Photo: AFP)
ईरान पर अमेरिका के नए आर्थिक दबाव से बढ़ा संकट (Photo: AFP)

होर्मुज से होकर होने वाला जहाजों का आवागमन एक बार फिर से लगभग ठप हो गया. यूएई ने आरोप लगाया कि ईरान ने इस जलमार्ग से गुजर रहे उसके दो जहाजों पर हमला किया. वहीं अमेरिका ने कहा है कि वह ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी को अनिश्चित काल तक जारी रख सकता है. ईरानी संसद की एक समिति ने एक ऐसी योजना को मंजूरी दे दी है जिसके तहत अमेरिका, इजरायल और अन्य उसके 'दुश्मन' देशों के जहाजों को इस जलमार्ग से गुजरने से रोका जाएगा. इस बीच भारत का रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता जुलाई में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने की चेतावनी दी है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि ईरान को हराने के बाद वे जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका का क्षेत्र घोषित कर देंगे. यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और एलएनजी की एक बड़ी मात्रा गुजरती है. ट्रंप के इस बयान से ईरान के साथ जारी तनाव और बढ़ गया है.

अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी ने बताया कि गुरुवार शाम को होर्मुज से गुजर रहे उसके दो जहाजों पर हमला हुआ. यूएई सरकार ने इसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है, हालांकि ईरान की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

एक ईरानी अधिकारी ने बताया था कि जून में हुए समझौते को आगे बढ़ाने को लेकर बातचीत में कोई प्रगति नहीं हुई है. जून में हुआ युद्धविराम टूटने के बाद से ईरान उन जहाजों पर हमला कर रहा है जो उसकी इजाजत के बिना इस जलमार्ग से गुजरने की कोशिश करते हैं.

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शिप ट्रैकिंग कंपनी क्प्लर के मुताबिक, शुक्रवार को सिर्फ दो जहाज इस जलमार्ग से गुजरे. इनमें एक अनाज ले जा रहा जहाज ईरानी जलक्षेत्र में दाखिल हुआ जबकि एक खाली जहाज दूसरी दिशा में गया. इसके अलावा एक खाली तेल टैंकर भी खाड़ी की तरफ जाता दिखा.

शुक्रवार को किसी भी क्रूड ऑयल जहाज की आवाजाही नहीं देखी गई. गुरुवार को नौ जहाज इस रास्ते से गुजरे थे जो बुधवार के पांच जहाजों से ज्यादा थे लेकिन अगस्त महीने के औसत बारह जहाजों से कम थे. कुछ जहाज अपने ट्रांसपोंडर बंद करके भी गुजर सकते हैं इसलिए असली आंकड़े इससे थोड़े अलग हो सकते हैं. लेकिन ये संख्या उस समय के मुकाबले बेहद कम है जब अमेरिका और इजरायल द्वारा फरवरी में ईरान पर युद्ध शुरू करने से पहले रोजाना 130 से ज्यादा जहाज इस रास्ते से गुजरते थे.

अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी सेना इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बनाए रखने और ईरान पर नाकेबंदी लागू रखने में पूरी तरह सक्षम है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना जहाजों को बदल बदल कर यह नाकेबंदी हमेशा के लिए जारी रख सकती है.

वहीं अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ईरान पर आर्थिक रूप से और दबाव बनाने की तैयारी में है. उन्होंने कहा कि अगले हफ्ते ऐसे कदमों का ऐलान होगा जो अब तक किसी देश पर आर्थिक तौर पर अलग-थलग करने के लिए नहीं उठाए गए.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर घरेलू स्तर पर इस अलोकप्रिय युद्ध को खत्म करने का दबाव बढ़ रहा है क्योंकि पेट्रोल के ऊंचे दाम उनकी लोकप्रियता को नुकसान पहुंचा रहे हैं और नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों में उनकी पार्टी की संसद पर पकड़ कमजोर हो सकती है.

ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी क्रूड की कीमतें हल्की बढ़त के साथ क्रमशः करीब 87 डॉलर और 81 डॉलर प्रति बैरल पर रहीं. भारत का रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता जुलाई में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया, वहीं एशिया की रिफाइनरियों ने भविष्य में सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए इस हफ्ते अमेरिकी क्रूड भी खरीदा.

ट्रंप बार बार कहते रहे हैं कि होर्मुज पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है. इस रास्ते से युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के कुल तेल और गैस का पांचवां हिस्सा गुजरता था. लेकिन ईरान इस दावे को खारिज करता है और कहता है कि जब तक उसकी शर्तें पूरी नहीं होतीं तब तक यह जलमार्ग नहीं खुलेगा.

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ईरान की मांग है कि उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं और उसकी जब्त संपत्ति वापस की जाए. गुरुवार को ईरानी संसद की समिति ने उस योजना को मंजूरी दी जिसमें अमेरिका, इजरायल और अन्य दुश्मन देशों के जहाजों और उपकरणों को इस रास्ते से गुजरने पर रोक लगाने का प्रावधान है.

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अमेरिका ने जून के मध्य में ईरान पर लगी नाकेबंदी को एक महीने के लिए हटाया था लेकिन बाद में उसे फिर से लागू कर दिया. इससे ईरान की विदेशी मुद्रा कमाने का मुख्य जरिया बंद हो गया है, जो पहले से युद्ध के दौरान उसके ऊर्जा ढांचे पर हुए हमलों से कमजोर हो चुका था. अमेरिका पहले कह चुका है कि वह तभी नाकेबंदी हटाएगा जब ईरान और ओमान, जो इस जलमार्ग के दोनों तरफ स्थित हैं, व्यावसायिक शिपिंग बहाल करने पर सहमत होंगे.

ट्रंप सैन्य हमले तेज करने और ईरान पर सख्ती से प्रहार करने की धमकी भी दे चुके हैं, हालांकि उन्होंने अब तक जमीनी सेना भेजने या रणनीतिक द्वीपों पर कब्जा करने और डिसैलिनेशन प्लांट पर बमबारी करने से परहेज किया है. इस हफ्ते की शुरुआत में ट्रंप ने संकेत दिया था कि वे सैन्य कार्रवाई की जगह आर्थिक दबाव पर ज्यादा भरोसा करेंगे. अमेरिका ने ईरान पर और उन लोगों तथा संस्थाओं पर प्रतिबंध सख्त किए हैं जो उसके मुताबिक ईरान को हथियार जुटाने में मदद कर रहे हैं, लेकिन इस दबाव अभियान से अब तक ईरान बातचीत की मेज पर वापस नहीं आया है.

खबरों के अनुसार गुरुवार को यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने ड्रोन से सऊदी अरामको की एक रिफाइनरी को निशाना बनाया, जिससे इलाके में व्यापक युद्ध फैलने की आशंका फिर बढ़ गई है. वैश्विक अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि अगर यह युद्ध जल्द खत्म नहीं हुआ तो वैश्विक आर्थिक वृद्धि में तेज गिरावट आ सकती है और कुछ इलाकों में मंदी भी आ सकती है.

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इनपुट: रॉयटर्स

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