कहने के लिए ये आंकड़े के कई लोगों को महान नहीं लग सकते हैं, लेकिन यह उस गेंदबाज के आंकड़े हैं, जो 2008 से लेकर 2015 के बीच इंटरनेशनल क्रिकेट खेला, जब तक खेला उसका डंका रहा, लेकिन वो फिर अचानक क्रिकेट के फलक से गायब हो गया. उसकी गेंद फेंकने के स्टाइल ने कई बार दहशत पैदा की, दिखने में एकदम शांत, लेकिन इरादों से एकदम फाइटर योद्धा...
मॉडर्न क्रिकेट में कैरम बॉल को फिर से रीइंट्रो्डयूस करने में भी इसी खिलाड़ी का नाम माना जाता है. जिसे बाद में भारत के रविचंद्रन अश्विन और अफगानिस्तान के मुजीब उर रहमान ने भी अपनाया. पर इस कैरम बॉल को पहचान दी श्रीलंका के मिस्ट्री स्पिनर अजंता मेंडिस ने... कैरम बॉल क्या होती है, यह भी बताएंगे, लेकिन पहले बात अजंता के खेल की.
मेंडिस के ये खेल की ही ताकत थी, जिसकी बदौलत उनको 2008 में ही उनके खेल के दम पर सीधे राइफलमैन से सेकेंड लेफ्टिनेंट बना दिया गया था. बाद में वो लेफ्टिनेंट भी बने. टेक्निकली समझें तो अजंता श्रीलंका आर्मी की आर्टिलरी यूनिट में गनर थे, जब उनको यह प्रमोशन मिला. अब 41 साल के हो चुके मेंडिस उस समय करीब 23 साल के थे.
अब सवाल यह कि अजंता को यह प्रमोशन क्यों मिला था?
तो जवाब है - उनका टीम इंडिया के खिलाफ एशिया कप फाइनल 2008 में किया गया प्रदर्शन, कराची में 6 जुलाई को खेले गए उस मुकाबले में श्रीलंका ने पहले पहले खेलते हुए 273 रन बनाए. जवाब में खेलने उतरी भारतीय टीम के लिए यह टारगेट आसान लग रहा था, तब भारतीय ओपनर वीरेंद्र सहवाग ने तूफानी शुरुआत की. लेकिन उसके बाद अजंता मेंडिस ने उस फाइनल में ऐसा कमाल का ड्रीम स्पेल फेंका और टीम इंडिया तितर-बितर हो गई. 8 ओवर, 1 मेडन 13 रन और 6 विकेट... भारतीय टीम 173 रनों पर आउट हो गई. श्रीलंका ने तब एशिया कप फाइनल 100 रनों से जीत लिया. हर ओर मेंडिस का नाम छा गया.
मेंडिस का यही प्रदर्शन था, जो तब वर्ल्ड क्रिकेट ने नोटिस किया था. वैसे मेंडिस का एक रिकॉर्ड आज भी कायम है, जिसे कोई हिला नहीं सका है. यह है वनडे क्रिकेट में सबसे तेज 50 विकेट लेने का, जो आज भी बना हुआ है. मेंडिस ने 19 वनडे मैचों में 50 विकेट हासिल किए थे.
फिर अचानक एक दिन लिया संन्यास
अप्रैल 2008 में वेस्टइंडीज के खिलाफ ODI में अपना डेब्यू किया, तब उन्होंने 39 रन देकर 3 विकेट लिए, लेकिन इसके बाद 2008 एशिया कप में मेंडिस मशूहर हो गए, जिसके बारे में हम बात कर चुके हैं.
एशिया कप के प्रदर्शन के बदौलत साल जुलाई 2008 में भारत के खिलाफ टेस्ट के लिए बुलाया गया और उन्होंने मुथैया मुरलीधरन के साथ मिलकर भारत के बैटिंग ऑर्डर को हिलाकर रख दिया, जिससे श्रीलंका ने 2-1 से जीत हासिल की, उन्होंने तीन मैचों में 26 विकेट लिए, जिसमें उनके डेब्यू टेस्ट में आठ विकेट शामिल थे, इस टेस्ट में श्रीलंका ने भारत को एक पारी और 239 रनों से हराया था. उस टेस्ट में उन्होंने राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, वीवीएस लक्ष्मण और सौरव गांगुली को आउट किया था.
34 साल की उम्र में मेंडिस ने साल 2019 में क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से रिटायरमेंट लेने का फैसला किया था. वो आखिरी बार 2015 में क्राइस्टचर्च में न्यूजीलैंड के खिलाफ ODI मैच खेलते दिखे थे.
वेरिएशन के धनी थे मेंडिस
मेंडिस के कई वेरिएशन थे, जिससे वह गेंद को दोनों तरफ घुमा सकते थे या स्किड कर सकते थे, T20 क्रिकेट में वो बेहद असरदार साबित हुए. उनके नाम T20 इंटरनेशनल में सबसे अच्छे आंकड़ों का रिकॉर्ड है, उन्होंने 2012 वर्ल्ड T20 के पहले मैच में जिम्बाब्वे के खिलाफ 8 रन देकर 6 विकेट लिए थे. वह 2009 (सात मैचों में 12 विकेट) और 2012 (छह मैचों में 15 विकेट) के T20 वर्ल्ड T20 एडिशन में भी शानदार रहे, जिससे श्रीलंका दोनों बार फाइनल में पहुंचा. वह T20I में दो बार छह विकेट लेने वाले अकेले बॉलर भी हैं, दूसरा (16 रन देकर 6 विकेट) उन्होंने 2011 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लिया था.
लेकिन एक बार मेंडिस को बैटर समझने लगे, तो परफॉर्मेंस गिरने लगी और उन्होंने खुद को श्रीलंका की मशहूर स्पिन-बॉलिंग टीम में नीचे गिरते हुए पाया. संन्यास लेने से पहले चोटों ने उन्हें परेशान किया, और उसके बाद वो सेलेक्टर्स की नजर से भी गायब हो गए.
वैसे सभी फॉर्मेट में उनकी सफलता ने उन्हें 2011 में वर्ल्ड कप में जगह दिलाई, जहां उन्होंने पांच पारियों में सात विकेट लिए. वह 2014 तक श्रीलंका के लिए व्हाइट-बॉल फॉर्मेट में रेगुलर खेलते रहे, जब पीठ की चोट ने उनके करियर को झटका दिया.
वह 2015 वर्ल्ड कप टीम में नहीं चुने गए, और फिर उस साल के बीच में चोट के कारण उपलब्ध नहीं थे, जिसके बाद उन्हें उसी साल नवंबर में वेस्टइंडीज ODI के लिए चुना गया, जहां उन्होंने तीन मैचों में चार विकेट लिए. एक महीने बाद अपने आखिरी ODI में जो उन्होंने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ खेला, वहां उन्होंने श्रीलंका की सात विकेट से हार में 49 रन देकर 0 विकेट लिए. अजंता आईपीएल में भी खेले, लेकिन उनका प्रदर्शन यादगार नहीं रहा. आईपीएल के कुल 10 मैचों में उनको महज 8 विकेट मिले.
अब कहां हैं अजंता मेंडिस?
इंटरनेशनल करियर को अलविदा कहने से पहले मेंडिस श्रीलंका के घरेलू टियर B टूर्नामेंट में पुलिस स्पोर्ट्स क्लब की कप्तानी कर रहे थे, वहां उन्होंने खुद को एक बैटिंग ऑलराउंडर के तौर पर फिर से स्थापित किया. तब उन्होंने अपनी आठ फर्स्ट-क्लास पारियों में उन्होंने चार बार 50 से ज्यादा रन बनाए हैं. 11 मार्च 1985 को जन्मे अजंता साल 2022 में एक बार फिर क्रिकेट के मैदान में लौटे और लीजेंड्स लीग में खेलते दिखे थे.
वैसे अजंता मेंडिस हाल के कुछ समय में क्रिकेट कोचिंग रोल में दिखे, जुलाई 2026 में वो नेपाल प्रीमियर लीग से भी जुड़े. यहां उन्होंने पोखरा एवेंजर्स टीम की कोचिंग संभाली. अब वो नेपाल प्रीमियर लीग के सीजन 3 में नजर आएंगे. यह लीग 26 अक्टूबर से 21 नवंबर 2026 के बीच होनी निश्चित हुई है.
आखिर क्या थी अजंता की कैरम बॉल?
अब जाते-जाते बात कर लेते हैं, कैरम बॉल की... कैरम बॉल असल में स्पिन गेंदबाजी की ऐसी डिलीवरी है, जहां बॉलर उंगलियों से गेंद को फ्लिक करता है, इसका नाम कैरम बोर्ड के उस शॉट से आया है, जिसमें खिलाड़ी उंगली से गोटी को झटके से आगे भेजता है. सामान्य ऑफ-स्पिन में गेंदबाज मुख्य रुप से उंगुलियों से गेंद को घुमाता है, पर कैरम बॉल में गेंद को अंगूठे और बीच की उंगली के बीच फंसाकर या पकड़कर,बीच की उंगली से जोरदार फ्लिक किया जाता है. यही फ्लिक गेंद को सामान्य स्पिन की तुलना में अलग तरह की रोटेशन और स्पीड देती है. बल्लेबाज को गेंद देखकर लगता है कि यह एक दिशा में जाएगी, लेकिन गेंद पिच पर पड़ने के बाद अचानक दूसरी तरफ घूम जाती है.
कैरम बॉल का आधुनिक नाम अजंता मेंडिस के दौर में पॉपुलर हुआ, लेकिन इस तरह की गेंद उनसे बहुत पहले भी फेंकी जा रही थी. ऑस्ट्रेलिया के जैक आइवरसन 1950 के दशक में अपनी बेहद अनोखी उंगली वाली गेंदबाजी के लिए फेमस हुए. वे अंगूठे और मुड़ी हुई मध्यमा उंगली के बीच गेंद पकड़कर उसे फ्लिक करते थे. उनकी गेंदों में ऐसी डिलीवरी भी थीं, जो आज की कैरम बॉल की तकनीक से काफी मिलती-जुलती थीं. यानी आइवरसन ने जिस तरह गेंद फेंकी, उसे अजंता के दौर में 'कैरम बॉल' के नाम से दोबारा पहचान मिली.