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कौन हैं एडवर्ड रुकिडी? न्यूज एंकर से सीधे बन गए किंग, युगांडा को मिला नया राजा

युगांडा के नए राजा के तौर पर चुने गए 56 साल के एडवर्ड रुकिडी की कहानी काफी दिलचस्प है. पहले वह पत्रकार थे लेकिन जड़ें शाही परिवार से जुड़ी थीं. किंग ओयो की मौत के बाद शुरू हुए उत्तराधिकार के विवाद ने आखिर उन्हें गद्दी तक पहुंचा दिया.

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न्यूज एंकर से राजा बने एडवर्ड रुकिडी (Photo-Reuters)
न्यूज एंकर से राजा बने एडवर्ड रुकिडी (Photo-Reuters)

युगांडा के 56 साल के एडवर्ड रुकिडी कियानांगोमा अब टूरो किंगडम के नए राजा हैं. 29 सितंबर को फोर्ट पोर्टल में उनकी ताजपोशी हुई. इसके साथ ही उन्होंने अपना नया नाम एडवर्ड रुकिडी न्याबोंगो रख लिया और बटूरो समुदाय के 13वें राजा बन गए. लेकिन राजगद्दी तक पहुंचने से पहले रुकिडी की पहचान कुछ और थी. वह युगांडा के सरकारी ब्रॉडकास्टर में लंबे समय तक न्यूज एंकर और एडिटर रहे.

अपने दो दशक से ज्यादा लंबे पत्रकारिता करियर में उन्होंने पड़ोसी देश रवांडा में भी ब्रॉडकास्टिंग में काम किया. रुकिडी का शाही परिवार से पुराना नाता रहा है. उनकी जड़ें टूरो के बबीतो शाही वंश से जुड़ी हुई हैं. वह दिवंगत प्रिंस क्रिस्टोफर पॉल किजानंगोमा के बेटे और पूर्व राजा सर जॉर्ज डेविड रुकिडी के पोते हैं. दिवंगत राजा ओयो न्यिम्बा कबम्बा इगुरु रुकीदी उनके चचेरे भाई थे.

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जानकारी के मुताबिक, रुकिडी फोर्ट पोर्टल के पास किडुकुरु गांव में पले-बढ़े और उन्होंने मेकरेरे यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने पत्रकारिता को करियर के तौर पर चुना.

Uganda King
(Photo- Reuters)

 

राजा ओयो की मौत के बाद खुला गद्दी का रास्ता

27 अगस्त को 34 साल के राजा ओयो की अमेरिका में कैंसर के इलाज के दौरान मौत हो गई. ओयो सिर्फ तीन साल की उम्र में 1995 में राजा बने थे और लंबे समय तक “बॉय किंग” के नाम से पहचाने गए. उनकी मौत के बाद ही अगला राजा चुनने को लेकर विवाद शुरू हुआ.

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राजा ओयो की मां बेस्ट केमिगिसा और बहन प्रिंसेस रूथ कोमुन्टाले का कहना था कि ओयो ने 2022 की वसीयत में अपने एक छोटे बेटे को उत्तराधिकारी बताया था. हालांकि, उस बच्चे की पहचान सार्वजनिक नहीं हुई थी. दूसरी तरफ, 21 सदस्यीय बबीतो शाही समिति ने रुकिडी को अपना नया राजा चुन लिया.

Uganda King
(Photo- Reuters)

 

ताजपोशी के साथ बदल गई पहचान

29 सितंबर को पारंपरिक रस्मों के बीच रुकिडी की ताजपोशी हुई. आधी रात से सुबह करीब 3 बजे तक चली परंपराओं में वह करुज़िका पैलेस की तरफ पैदल गए और राजगद्दी के लिए प्रतीकात्मक लड़ाई का हिस्सा बने. इसके बाद उनका राजकीय नाम एडवर्ड रुकिडी न्याबोंगो हो गया.

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बता दें कि युगांडा में राजा के पास राजनीतिक सत्ता नहीं है. ब्रिटिश शासन से आजादी के बाद युगांडा ने 1960 के दशक में पारंपरिक राजशाहियों पर प्रतिबंध लगा दिया था. लेकिन 1993 में इसे फिर से बहाल कर दिया गया. हालांकि, पारंपरिक रूप से यहां राजा को संस्कृति के संरक्षक के तौर पर देखा जाता है और समाज में उनका काफी प्रभाव होता है.

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