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युगांडा ने खुद को घोषित किया इबोला मुक्त, कांगो में 1,437 लोगों की मौत

युगांडा ने सभी संक्रमितों के संपर्कों का क्वारंटीन पूरा होने और नए सामुदायिक संक्रमण का कोई मामला नहीं मिलने के बाद खुद को आधिकारिक तौर पर इबोला मुक्त घोषित कर दिया है. हालांकि, पड़ोसी कांगो में इबोला का प्रकोप अब भी तेजी से फैल रहा है.

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युगांडा ने खुद को इबोला मुक्त घोषित किया है( Photo- Pexels)
युगांडा ने खुद को इबोला मुक्त घोषित किया है( Photo- Pexels)

युगांडा ने खुद को इबोला मुक्त घोषित कर दिया है.स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि जून के मध्य में अंतिम मरीज के अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद सभी इंफेक्टेड के संपर्क में आए लोगों ने अनिवार्य क्वारंटीन पूरा कर लिया और इसके बाद किसी भी नए कम्युनिटी इंफेक्शन का मामला सामने नहीं आया. हालांकि, पड़ोसी देश कांगो में इबोला का प्रकोप अब भी तेजी से फैल रहा है.

युगांडा के हेल्थ मंत्रालय के मुताबिक, देश में सामने आए शुरुआती मामले कांगो से जुड़े थे. पूर्वी कांगो के इतुरी प्रांत से कुछ लोग अज्ञात बीमारी के इलाज के लिए सीमा पार कर युगांडा पहुंचे थे. बाद में पता चला कि वे इबोला से इंफेक्टेड थे. 15 मई को कांगो ने इबोला प्रकोप की घोषणा की थी और उसी दिन युगांडा ने भी दो मामलों की पुष्टि की थी, जिनमें एक मरीज की पहले ही मौत हो चुकी थी.

मंगलवार को जारी बयान में युगांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि 2026 का यह प्रकोप पूरी तरह से डॉक्यूमेंट इम्पोर्ट इंफेक्शन का मामला था. सभी पहचाने गए संपर्कों को संस्थागत क्वारंटीन में रखा गया और उन्होंने 21 दिन की निगरानी अवधि पूरी की. इस दौरान किसी भी नए इंफेक्शन या कम्युनिटी प्रसार के संकेत नहीं मिले, जिसके बाद देश को इबोला मुक्त घोषित किया गया.

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यह प्रकोप इबोला वायरस के बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के कारण हुआ था, जिसके लिए फिलहाल कोई मान्य वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं है. इस रिजनल प्रकोप को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया है. संक्रमण की पुष्टि के बाद युगांडा सरकार ने कई सख्त कदम उठाए थे. राष्ट्रपति ने लोगों से हाथ मिलाने से बचने की अपील की, कांगो से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं वाले वार्षिक धार्मिक आयोजन को स्थगित कर दिया गया और दोनों देशों के बीच सार्वजनिक परिवहन व उड़ानों को भी रोक दिया गया.

कांगो में हालात गंभीर 

दूसरी ओर, कांगो में हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं. वहां स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अब तक 3,262 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 1,437 लोगों की मौत हो चुकी है. अधिकारियों का कहना है कि यह देश के इतिहास का सबसे तेजी से फैलने वाला इबोला प्रकोप है. कई प्रभावित इलाकों तक हेल्थकर्मी नहीं पहुंच पा रहे हैं, क्योंकि कुछ स्थानों पर स्थानीय लोगों और विद्रोही समूहों के हमलों के कारण राहत कार्य प्रभावित हुआ है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इबोला वायरस का नेचुरल सोर्स फल खाने वाले चमगादड़ों को माना जाता है. यह संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों या संक्रमित वस्तुओं के संपर्क में आने से फैलता है.एक्सपर्ट का मानना है कि संक्रमित लोगों के संपर्कों की समय पर पहचान कर उन्हें अलग रखना संक्रमण रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है. युगांडा ने भले ही अपने यहां प्रकोप पर काबू पा लिया हो, लेकिन पड़ोसी कांगो में तेजी से बढ़ते मामलों ने पूरे क्षेत्र के लिए चिंता बरकरार रखी है.

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कांगो में जारी इबोला प्रकोप के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 3,262 हो गई है. यह जानकारी देश के स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी ताजा अपडेट में दी गई है. इसके साथ ही यह प्रकोप 2018-2020 के दौरान देश में दर्ज सबसे बड़े इबोला प्रकोप के आंकड़ों के करीब पहुंच गया है.

इतने लोगों की मौत 

कांगो में जारी इबोला प्रकोप के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 3,262 हो गई है. यह जानकारी देश के स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी ताजा अपडेट में दी गई है. इसके साथ ही यह प्रकोप 2018-2020 के दौरान देश में दर्ज सबसे बड़े इबोला प्रकोप के आंकड़ों के करीब पहुंच गया है. स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा प्रकोप में अब तक 1,437 लोगों की मौत हो चुकी है.

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