बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को एंटीलिया बम केस के मुख्य आरोपी और मुंबई पुलिस के बर्खास्त अधिकारी सचिन वाझे की जेल से रिहाई पर 7 अक्टूबर तक रोक लगा दी है. वाझे पांच साल से अधिक समय से ठाणे सेंट्रल जेल में बंद हैं. विशेष NIA अदालत ने उन्हें जमानत दी थी, जिसके खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया.
एक दिन पहले ही मिली थी जमानत
जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की बेंच ने वाझे की रिहाई पर अंतरिम रोक लगाई. अब 7 अक्टूबर को बेंच NIA की उस याचिका पर सुनवाई करेगी, जिसमें वाझे को जमानत देने के विशेष अदालत के आदेश को चुनौती दी गई है. NIA मंगलवार शाम से ही वाझे की रिहाई रुकवाने के लिए अदालतों का रुख कर रही थी. एजेंसी ने पहले विशेष NIA अदालत से जमानत आदेश पर रोक लगाने की मांग की, लेकिन यह मांग खारिज हो गई. इसके बाद NIA ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की.
शुरू होने वाली थी रिहाई प्रक्रिया
मामला पहले जस्टिस सारंग वी. कोतवाल और जस्टिस आरआर भोंसले की बेंच के सामने पहुंचा. जस्टिस कोतवाल ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया. इसके बाद NIA जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस आशीष चव्हाण की बेंच के पास पहुंची, लेकिन यह बेंच भी मामले की सुनवाई नहीं कर सकी. इस बीच विशेष NIA अदालत की ओर से जारी वाझे का रिलीज मेमो उनकी कानूनी टीम को मिल चुका था और इसे ठाणे जेल के बाहर निर्धारित बॉक्स में डाल दिया गया था, ताकि उनकी रिहाई की प्रक्रिया शुरू हो सके.
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NIA ने दिए ये तर्क
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने अदालत को बताया कि वाझे कभी भी जेल से बाहर आ सकते हैं. इसके बाद उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से मामले की तत्काल सुनवाई के लिए दूसरी बेंच तय करने का अनुरोध किया. मामला चीफ जस्टिस एमसी त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच के सामने भी रखा गया. इसके बाद जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की बेंच को सुनवाई का निर्देश दिया गया.
NIA ने अपनी याचिका में विशेष अदालत के 29 सितंबर के जमानत आदेश को तथ्यों और कानून के लिहाज से गलत बताया. एजेंसी ने कहा कि विशेष अदालत ने UAPA की धारा 43D के प्रावधानों की अनदेखी की और मामले में वाझे की भूमिका केंद्रीय है.
हाई कोर्ट ने हालांकि कहा कि वाझे की तरफ से कोई वकील मौजूद नहीं था, इसलिए मामले पर विस्तृत सुनवाई उनकी गैरमौजूदगी में नहीं की जा सकती. इसके बाद अदालत ने फिलहाल जमानत आदेश के अमल पर 7 अक्टूबर तक अंतरिम रोक लगा दी और जेल अधिकारियों को इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया.