नेपाल के रसुवा जिले में विनाशकारी भोटेकोशी बाढ़ के बाद लांगटांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 18 मजदूर पिछले तीन दिनों से फंसे हुए हैं. इन मजदूरों ने फोन के जरिए अधिकारियों से तत्काल बचाव की अपील की है. शुक्रवार को नेपाली सेना ने हेलीकॉप्टर के जरिए उन्हें निकालने की कोशिश की, लेकिन इलाके में हेलीकॉप्टर की लैंडिंग संभव नहीं हो सकी. एयरड्रॉप के जरिए मदद पहुंचाने की संभावना भी नहीं बन पाई.
फंसे मजदूर नरेंद्र रतोजी ने फोन पर बताया कि हेलीकॉप्टर जब उनके पास पहुंचा तो मजदूरों ने लाल कपड़े दिखाकर अपनी मौजूदगी का संकेत देने की कोशिश की. इसके बावजूद रेस्क्यू नहीं हो सका. उन्होंने बताया कि मजदूरों के पास फिलहाल कुछ समय के लिए पर्याप्त भोजन है, लेकिन उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित जगह पहुंचाने की जरूरत है.
यह भी पढ़ें: जिस लेक के फटने की साइंटिस्ट दे रहे वार्निंग वो भारत से कितनी दूर है? 72 घंटे में क्या होने वाला है
सुरंग से निकला मजदूर गंभीर रूप से घायल
रतोजी के मुताबिक, एक मजदूर करीब चार घंटे तक सुरंग के अंदर फंसा रहा था. बाद में उसे बाहर निकाल लिया गया, लेकिन उसकी हालत गंभीर है. उसके सिर और शरीर पर चोटें आई हैं, खून बह रहा है और वह अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पा रहा है. मजदूरों का कहना है कि उन्हें पहले भी मदद पहुंचने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अब तक रेस्क्यू टीम वहां नहीं पहुंच सकी है.
13 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी राहत अभियान में
भोटेकोशी बाढ़ के बाद नेपाल में बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है. नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के मुताबिक, रसुवा में 13000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया है. इनमें नेपाल पुलिस के 7,250, नेपाली सेना के 4,200 और सशस्त्र पुलिस बल के 1,845 जवान शामिल हैं. राहत और बचाव के लिए 15 हेलीकॉप्टर भी लगाए गए हैं, जिनमें छह नेपाली सेना और नौ निजी क्षेत्र के हैं. अब तक 1,976 लोगों को बचाया जा चुका है. वहीं 130 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 67 का अभी अस्पतालों में इलाज चल रहा है.
977 लोग अब भी संपर्क से बाहर
अधिकारियों के मुताबिक, गुरुवार रात तक 977 लोग अब भी संपर्क से बाहर थे और 389 शव बरामद किए जा चुके थे. इनमें बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की भी है. अधिकारियों के मुताबिक, 26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा के पास ल्हेंदे नदी के उत्तरी हिस्से में करीब एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में हिमस्खलन हुआ था. इससे भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के तटीय इलाकों में अचानक भीषण बाढ़ आई और बड़े पैमाने पर तबाही हुई. फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता फंसे लोगों तक पहुंचना, घायलों को निकालना और सड़क व संचार व्यवस्था बहाल करना है.