
नेपाल में बुधवार की विनाशकारी बाढ़ के बाद अब एक नई आफत का खतरा पैदा हो गया है. नेपाल-चीन सीमा के पास ग्यिरोंग बॉर्डर पोर्ट के ऊपर ग्लेशियर टूटने से बनी एक झील अब ओवरफ्लो होने लगी है. चीन की सरकारी मीडिया सीसीटीवी ने शुक्रवार को बताया कि झील का पानी उसके किनारे से बाहर निकलना शुरू हो गया है. इसके बाद नदी का जलस्तर भी बढ़ता दिखाई दे रहा है.
यही वह झील है, जिसे लेकर पिछले 24 घंटे से चीन और नेपाल में अलर्ट जारी था. आशंका थी कि अगर प्राकृतिक मलबे से बनी यह झील अचानक टूटती है तो बड़ी मात्रा में पानी और मलबा नीचे की ओर आ सकता है और पहले से तबाह इलाकों में दूसरी बड़ी बाढ़ ला सकता है.
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नेपाल में अगले डेढ़ घंटे बेहद अहम
झील से पानी बाहर निकलने की खबर के बाद खतरे को देखते हुए नेपाली सेना ने राहत और बचाव अभियान अस्थायी तौर पर रोक दिया है. नेपाली सेना के एक अधिकारी के मुताबिक रेस्क्यू ऑपरेशन अगले करीब 1 घंटे 30 मिनट तक रोका गया है. इस दौरान प्रभावित इलाके में हालात पर नजर रखी जा रही है.

स्थानीय जिला अधिकारी ने भी बताया कि उन्हें झील के किनारे से पानी निकलने की सूचना मिली है. अधिकारी के मुताबिक नदी का जलस्तर बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है. ऐसे में नदी के आसपास मौजूद रेस्क्यू टीमों और लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है.
झील में 25 लाख क्यूबिक मीटर से ज्यादा पानी
चीन की ओर से किए गए सर्वे में पता चला है कि झील में अब करीब 25 लाख क्यूबिक मीटर से ज्यादा पानी जमा हो चुका है. एक दिन पहले चीनी इंजीनियरिंग टीम ने इसमें करीब 15 से 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी होने का अनुमान लगाया था. यानी थोड़े ही समय में जलस्तर और पानी की मात्रा में काफी बढ़ोतरी हुई है.

चीन ने पहले अनुमान लगाया था कि अगले तीन दिनों में करीब 30 लाख क्यूबिक मीटर अतिरिक्त पानी इस झील में पहुंच सकता है. यह करीब 1,200 ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल के बराबर पानी है. अधिकारियों ने इसी वजह से झील के टूटने या उसके किनारे से बड़े पैमाने पर पानी निकलने को लेकर गंभीर चेतावनी दी थी.
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चीन ने भी रेस्क्यू टीमें हटाईं
खतरा बढ़ने के बाद चीन ने अपने बचावकर्मियों और वाहनों को भी प्रभावित क्षेत्र से हटाकर सुरक्षित जगह पर भेज दिया है. चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक संभावित झील टूटने के साथ पहाड़ों के खिसकने और हिमस्खलन जैसी दूसरी आपदाओं का खतरा भी है.

चीनी इंजीनियरों ने झील का हवाई सर्वे और 3D मॉडलिंग की है. उनके मुताबिक झील करीब 150 मीटर लंबी और 40 से 50 मीटर गहरी है. खतरा कम करने के लिए झील के प्राकृतिक बांध में नीचे की तरफ एक निकासी चैनल बनाने का विकल्प भी देखा गया है, ताकि पानी को नियंत्रित तरीके से बाहर निकाला जा सके.
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि झील से निकल रहा पानी कितनी तेजी से नीचे की ओर पहुंचेगा. नेपाल में पहले ही सैकड़ों लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के बाद राहत अभियान चल रहा है. ऐसे में आने वाला डेढ़ घंटा बेहद अहम माना जा रहा है.
झील में 25 लाख क्यूबिक मीटर से ज्यादा पानी
चीन की आठ सदस्यीय इंजीनियरिंग टीम के सर्वे के मुताबिक, झील में जमा पानी की मात्रा अब 25 लाख क्यूबिक मीटर से ज्यादा हो चुकी है. एक दिन पहले इसका अनुमान करीब 15 से 20 लाख क्यूबिक मीटर लगाया गया था. चीन ने 27 बीते दिन ही चेतावनी दी थी कि अगले तीन दिनों में झील में करीब 30 लाख क्यूबिक मीटर और पानी पहुंच सकता है, जो लगभग 1,200 ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल के बराबर है. इससे प्राकृतिक बांध के टूटने का खतरा काफी बढ़ गया है. अधिकारियों के मुताबिक, पानी का बहाव 1 सितंबर के आसपास अपने चरम पर पहुंचने की आशंका है.

त्रिशूली में पुलिस की चेतावनी
नेपाल के त्रिशूली इलाके में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद पुलिस ने लोगों को अलर्ट कर सुरक्षित जगहों पर जाने को कहा है. नेपाल पुलिस अधिकारी पी. चौधरी ने बताया कि पानी का स्तर और बढ़ने की आशंका है, इसलिए इलाके में चल रहे सभी काम रोक दिए गए हैं. रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे वाहनों को भी वापस बुलाया जा रहा है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है. पुलिस के मुताबिक “अभी और भी भयंकर बाढ़ आना बाकी है”, इसलिए किसी भी जोखिम से बचने के लिए पूरे इलाके में सतर्कता बढ़ा दी गई है.