scorecardresearch
 

...कहानी उस शहर की जिसने झेले हैं 100 से अधिक युद्ध, 44 बार हुआ तबाह!

तबाहियों का भी अपना एक इतिहास होता है. आज की दुनिया लगातार युद्धों को झेल रही है. ईरान अमेरिका-इजरायल के सामने है, गाजा इजरायली हमले झेल रहा, यूक्रेन और रूस कई सालों से आमने-सामने हैं. हर तरफ तबाही है लेकिन क्या युद्ध किसी शहर को मिटा सकता है? नहीं इसी धरती पर एक ऐसा शहर है जिसने 115 युद्ध देखे, बल्कि सिर्फ देखे नहीं झेले भी, 44 बार तबाही के कगार पर पहुंचा लेकिन आज भी मुस्करा रहा है. क्योंकि जिंदगी कहीं रुकती नहीं.

Advertisement
X
100 से अधिक जंग झेल चुका है बेलग्रेड (Photo: ITG)
100 से अधिक जंग झेल चुका है बेलग्रेड (Photo: ITG)

आज जब गाजा के मलबे से उठता धुएं का गुबार, यरूशलम के पुराने पत्थरों पर गूंजती सायरन की आवाजें और कीव की ठंडी रातों में बरसती मिसाइलों की खबर दुनिया का ध्यान खींचती है, तो लगता है कि युद्ध की यह विभीषिका सिर्फ आज की सदी की देन है. लेकिन इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि जमीन के एक टुकड़े के लिए तबाह होने की यह कहानी बहुत पुरानी है.

अगर आज गाजा, यरूशलम और कीव बारूद के धुएं में अपनी सांसें गिन रहे हैं, तो यूरोप के केंद्र में एक ऐसा शहर बसा है जिसने इन सबसे कहीं ज्यादा दर्द झेला है. एक ऐसा शहर जो 115 से अधिक युद्धों का गवाह बना और जिसे 44 बार तबाही झेलनी पड़ी, लेकिन हर बार अपनी ही राख से उठकर फिर खड़ा हो गया- यह कहानी है सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड की.

यह शहर दो नदियों के संगम पर बसा है- सावा और डैन्यूब. इन दो महान नदियों के संगम पर बसा यह शहर अपनी मातृभाषा में बेओग्राद यानी 'सफेद शहर' कहलाता है. लेकिन इसका इतिहास सफेद रंगों से ज्यादा खून के लाल रंग से लिखा गया है. लगभग 10,000 साल पुरानी मानव सभ्यता के अवशेष समेटे बेलग्रेड की सबसे बड़ी ताकत ही उसकी सबसे बड़ी त्रासदी बन गई- इसकी रणनीतिक स्थिति. पूर्व और पश्चिम के चौराहे पर बसे होने के कारण यह हर साम्राज्य की पहली पसंद रहा.

Advertisement

ईसा पूर्व चौथी सदी में केल्ट्स द्वारा बसाए जाने से लेकर रोमनों के 'सिंगिदुनम' तक, बेलग्रेड पर हर किसी की नजर रही. 5वीं सदी में अत्तिला द हुन ने इसे तबाह किया, फिर यह गॉथ, बाइजैन्टाइन, फ्रैंक्स और बुल्गारियाई शासकों के हाथों में घूमता रहा. 1521 में जब ऑटोमन सुल्तान ने इस पर कब्जा किया, तो बेलग्रेड ऑटोमन और ऑस्ट्रियाई साम्राज्य के बीच खूनी जंग का अखाड़ा बन गया. ऑटोमन काल में तो इसे युद्ध का घर तक कहा जाने लगा. 19वीं सदी में ऑटोमन शासन से मुक्ति मिली, लेकिन तबाही का दौर खत्म नहीं हुआ.

फिर प्रथम विश्व युद्ध में यह भीषण बमबारी का शिकार हुआ और द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी ने इसे तहस-नहस कर दिया. कम्युनिस्ट युगोस्लाविया की राजधानी बनने से लेकर 1990 के दशक में युगोस्लाविया के विघटन और 1999 की नाटो बमबारी तक बेलग्रेड ने आधुनिक काल में भी युद्ध का दंश झेला. अपने इतिहास में 15 बार अपना नाम बदलने वाला यह शहर हर बार युद्ध की आग में तपा और दोबारा बसाया गया. नामों का ये सिलसिला सिंगिदुनम, दार अल-जिहाद, बीओग्राद, एल्बा ग्रेका आदि कई नामों से होता हुआ बेलग्रेड पर रुका.

आज इस शहर की आबादी लगभग 17 लाख है. यहां 300 से अधिक सांस्कृतिक स्मारक, 50 संग्रहालय, 30 थिएटर और 700 से अधिक पुरातात्विक स्थल मौजूद हैं. सावा नदी के उत्तरी तट पर बसा 'न्यू बेलग्रेड' आज इस शहर का नया चेहरा है. गगनचुंबी इमारतें, वैश्विक कंपनियों के कार्यालय और आधुनिक शॉपिंग मॉल्स यह साबित करते हैं कि बेलग्रेड अतीत की कड़वाहट को पीछे छोड़कर भविष्य की ओर बढ़ चुका है.

Advertisement

लेकिन, तबाहियों की यादें आज भी जिंदा हैं. बेलग्रेड का हर पत्थर अपने अंदर युद्ध की किसी न किसी कहानी को समेटे हुए है. दो नदियों के संगम पर खड़ा यह प्राचीन किला शहर की सहनशक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक है. इसकी दीवारों के नीचे रोमनों, सर्बों, हंगेरियन, तुर्कों और ऑस्ट्रियाई सैनिकों की पीढ़ियों की यादें दफन हैं. किले के भीतर स्थित सैन्य संग्रहालय में रखे 3,000 से अधिक प्राचीन हथियार, भारी बख्तरबंद और युद्धकालीन उपकरण इस रक्तरंजित इतिहास के सीधे गवाह हैं.

लेकिन, कभी युद्ध की मार से झुलसे इस शहर का बोहेमियन मोहल्ला 'स्काडारलिया' अपनी 19वीं सदी की पत्थर की सड़कों और पारम्परिक रेस्तरां जैसे त्राई शेशिरा के साथ आज भी पुराने दौर की संगीतमय शामों की याद दिलाता है. जिस शहर को इतिहास ने 44 बार मिटाने की कोशिश की, आज वही बेलग्रेड दक्षिण-पूर्वी यूरोप का एक बेहद सुरक्षित, जीवंत और आर्थिक रूप से समृद्ध केंद्र बन चुका है.

आज यहां की नाइटलाइफ काफी मशहूर है. कभी तोपों की गूंज से कांपने वाला यह शहर आज 'कभी न सोने वाले शहर' के रूप में जाना जाता है. सावा और डैन्यूब नदियों के पानी पर तैरते हुए रेस्तरां और क्लब जिन्हें 'स्पलावोवी' कहा जाता है, दुनिया भर के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं.

Advertisement

आज युद्ध से जूझ रही दुनिया के लिए बेलग्रेड एक उम्मीद की किरण है. 115 युद्ध झेलने और 44 बार तबाह होने के बाद भी आज बेलग्रेड सिर्फ जिंदा नहीं है, बल्कि पूरी शान से मुस्कुरा रहा है. यह शहर दुनिया को सिखाता है कि युद्ध इमारतें गिरा सकते हैं, सड़कें उजाड़ सकते हैं और नाम बदल सकते हैं- लेकिन वे किसी शहर की आत्मा और उसके लोगों के जीने के जज्बे को कभी खत्म नहीं कर सकते.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement