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बारिश में धंसी जमीन... नीचे निकली 2 हजार साल पुरानी दुनिया! रायबरेली की रहस्यमय सुरंग ने बढ़ाई हलचल

रायबरेली के एक खेत में बारिश के बाद अचानक जमीन धंस गई. गांव वालों ने पास जाकर देखा तो नीचे पक्की दीवारों वाली एक सुरंग जैसी संरचना नजर आई. सूचना मिलते ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम पहुंची. शुरुआती जांच में मिले अवशेष करीब दो हजार साल पुराने कुषाणकाल के होने की संभावना है.

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रायबरेली के खेत में खुला इतिहास का दरवाजा. (Photo: Screengrab)
रायबरेली के खेत में खुला इतिहास का दरवाजा. (Photo: Screengrab)

पहले खेत में गड्ढा दिखा... फिर नीचे झांका तो लगा जैसे इतिहास ने खुद दरवाजा खोल दिया हो. बारिश थमी तो गांव वाले खेत देखने निकले. यहां दरकी हुई जमीन की खबर मिली थी. खेत के बीचों-बीच करीब एक मीटर चौड़ा गड्ढा बन चुका था. लोगों ने उत्सुकता में झांककर देखा तो मिट्टी के नीचे पक्की ईंटों से बनी एक संरचना दिखाई दी. कुछ लोगों ने इसे सुरंग बताया. देखते ही देखते गांव में खबर फैल गई और खेत के आसपास भीड़ जुटने लगी.

यह मामला उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के हरचंदपुर थाना क्षेत्र के ओई गांव का है. खबर मिलते ही प्रशासन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण लखनऊ मंडल की टीम पहुंची. सहायक पुरातत्वविद डॉ. मनोज कुमार यादव की देखरेख में टीम सीढ़ी के सहारे खेत के उस गड्ढे में नीचे उतरी और जायजा लिया.

raebareli mysterious tunnel found rain asi suspects 2000 year old kushan era

इस दौरान टीम को कई प्राचीन अवशेष मिले. इनमें पुरानी ईंटें, मिट्टी की सुराही और एक हैंडल वाली धूपदानी थी. पुरातत्व विशेषज्ञों के शुरुआती आकलन के मुताबिक, ये अवशेष कुषाणकाल से मैच होते हैं, यानी इनकी उम्र करीब दो हजार साल हो सकती है.

डॉ. मनोज कुमार यादव ने बताया कि नीचे मिली ईंटों का आकार 40×28×8 सेंटीमीटर है, जो कुषाणकालीन निर्माण शैली से मिलता-जुलता है. उन्होंने यह भी कहा कि आसपास के लोगों के पास पहले से सुरक्षित कुछ मूर्तियां और अन्य पुरातात्विक अवशेष भी हैं, जिनकी स्टडी की जा रही है.

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यह भी पढ़ें: Rajgir Bihar: 5000 साल से गुफा का दरवाजा खुलने का इंतजार, क्या कहते हैं पुरातत्व विभाग के दावे?

इस दौरान ASI की टीम गांव के अशोक प्रताप मौर्य के घर भी पहुंची. अशोक का कहना है कि वे 1985 से इस इलाके से मिले प्राचीन अवशेषों को सहेजकर रखे हुए हैं. उनका कहना है कि 'ओई भीट' पहले से ही पुरातत्व विभाग के अभिलेखों में एक ऐतिहासिक स्थल के रूप में दर्ज है.

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फिलहाल प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से पूरे इलाके को सील कर दिया है. मौके पर पुलिस बल तैनात है और लोगों को गड्ढे के पास जाने से रोका गया है, ताकि किसी तरह का नुकसान न हो और वैज्ञानिक जांच प्रभावित न हो.

हालांकि सोशल मीडिया पर इस सुरंग को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन ASI का कहना है कि अभी किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. डिटेल में साइंटिफिक रिपोर्ट तैयार की जा रही है. उसके बाद ही तय होगा कि यह संरचना असल में क्या है और इसके नीचे कोई बड़ा पुरातात्विक परिसर या प्राचीन बस्ती मौजूद है या नहीं.

फिलहाल इतना जरूर है कि रायबरेली के एक छोटे से गांव में बारिश के बाद बना एक गड्ढा इतिहास की ऐसी परत खोल गया है, जिसने पुरातत्व विभाग की दिलचस्पी बढ़ा दी है.

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