इलाहाबाद हाईकोर्ट के हिजाब को लेकर दिए गए फैसले पर मुरादाबाद के पूर्व सांसद और समाजवादी पार्टी नेता डॉ. एसटी हसन ने असहमति जताई है. हाईकोर्ट ने प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल की एक मुस्लिम छात्रा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब या सिर पर स्कार्फ पहनने की अनुमति मांगी गई थी. कोर्ट ने कहा कि हिजाब को इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है और समान रूप से लागू ड्रेस कोड का पालन जरूरी है.
एसटी हसन ने कहा कि वह हाईकोर्ट के इस फैसले से सहमत नहीं हैं. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी स्कूल में ड्रेस कोड नहीं है और कोई छात्रा हिजाब पहनकर स्कूल जा रही है, तो इसमें परेशानी क्या है?
एसटी हसन ने धार्मिक विविधता का उदाहरण देते हुए कहा कि मुस्लिम महिलाएं हिजाब पहनती हैं, वहीं दूसरे धर्मों में भी अपनी-अपनी धार्मिक पहचान और परंपराएं हैं. उन्होंने सिख समुदाय की पगड़ी और हिंदू समुदाय में तिलक, कड़ा और कलावा जैसी धार्मिक परंपराओं का जिक्र किया.
हसन ने कहा कि भारत की खूबसूरती उसकी विविधता में है और अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग एक-दूसरे से प्रेम और भाईचारे के साथ रहते हैं. उनके मुताबिक धार्मिक पहचान को लेकर समाज में विभाजन पैदा नहीं किया जाना चाहिए.
एसटी हसन ने यह भी कहा कि अगर किसी स्कूल में निर्धारित यूनिफॉर्म है तो बच्चे स्कूल के गेट तक अपनी धार्मिक पोशाक पहनकर आ सकते हैं और स्कूल के ड्रेस कोड के मुताबिक उसे उतार सकते हैं, लेकिन किसी की धार्मिक पहचान या आस्था को जबरन बदलने की कोशिश नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि किसी पर जबरदस्ती हिजाब पहनाना भी गलत है और किसी को जबरदस्ती हिजाब उतारने के लिए कहना भी उचित नहीं है.
सपा नेता ने देश की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे का हवाला देते हुए कहा कि भारत किसी एक धर्म का देश नहीं है, बल्कि सभी धर्मों के लोगों का देश है और संविधान सभी को बराबर अधिकार देता है.