रायबरेली (Raebareli) उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख शहर है और रायबरेली जिले का प्रशासनिक मुख्यालय भी है. यह लखनऊ मंडल का हिस्सा है और उत्तर प्रदेश राज्य राजधानी क्षेत्र में शामिल है. शहर सई नदी के किनारे बसा है. रायबरेली की भौगोलिक स्थिति भी खास है, क्योंकि यह लखनऊ, प्रयागराज, अयोध्या और कानपुर जैसे चार बड़े शहरों के बीच स्थित है.
रायबरेली के इतिहास को लेकर कई मान्यताएं मिलती हैं. माना जाता है कि इस शहर की स्थापना भर समुदाय ने की थी और इसका शुरुआती नाम भरौली या बरौली था. बाद में क्षेत्र के कायस्थ शासकों की उपाधि ‘राय’ के कारण शहर के नाम के साथ राय जुड़ गया. इसके बाद जौनपुर सल्तनत के शासक इब्राहिम शाह ने इस क्षेत्र पर कब्जा किया और इसे शेखों तथा सैयदों को सौंप दिया.
इब्राहिम शाह के समय रायबरेली में एक मजबूत किले का निर्माण कराया गया था. यह किला अब काफी हद तक खंडहर में बदल चुका है, लेकिन इसका पश्चिमी दरवाजा आज भी मौजूद है. किले के बाहर मुस्लिम संत मखदूम सैयद जाफरी की दरगाह है. स्थानीय कहानी के अनुसार, किले का निर्माण दिन में होता था, लेकिन रात में उसकी दीवारें गिर जाती थीं. इसके बाद संत को जौनपुर से बुलाया गया और उनके पहुंचने के बाद निर्माण का काम बिना किसी परेशानी के पूरा हुआ.
इब्राहिम शाह ने रायबरेली में कम से कम दो मस्जिदें भी बनवाई थीं. इनमें जामा मस्जिद आज भी मौजूद है, जिसका बाद में औरंगजेब के शासनकाल में जीर्णोद्धार कराया गया था. समय के साथ शहर में अलग-अलग समुदायों की बस्तियां भी विकसित हुईं. इनमें कासबाना, नेजा अंदाज, सैयद राजन, बांस टोला और पीराई हमीद जैसी मुस्लिम बस्तियां शामिल थीं. वहीं जौनपुरी, खली सहत और सूरजीपुर जैसे मोहल्ले ब्राह्मण समुदाय से जुड़े थे.
1857 के विद्रोह के दौरान रायबरेली और आसपास के क्षेत्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही. राजा हर प्रसाद, जिन्हें नसीराबाद का तालुकेदार बताया जाता है, अवध के खैराबाद डिवीजन में नाजिम या आयुक्त रहे थे. उन्होंने विद्रोहियों का साथ दिया और अवध की बेगम हजरत महल के साथ नेपाल तक गए. 31 दिसंबर 1858 को नेपाल से लौटते समय अंग्रेजी सेना के साथ हुई लड़ाई में उनकी मृत्यु हो गई. इस क्षेत्र के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों में राणा बेनी माधव बख्श सिंह का नाम भी लिया जाता है.
अंग्रेजों ने 1858 में रायबरेली जिले का गठन किया और इसका नाम जिला मुख्यालय के नाम पर रखा. इसके बाद रायबरेली को नए जिले के मुख्यालय के रूप में विकसित किया गया. 1867 में शहर को नगरपालिका का दर्जा दिया गया था.
20वीं सदी की शुरुआत तक रायबरेली आसपास के क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र बन चुका था. रेलवे आने के बाद इसका व्यापार और बढ़ा. उस समय शहर रायबरेली और जहांनाबाद नाम के दो हिस्सों में बंटा हुआ था. यहां पुराना बाजार, जहांनाबाद, कैपरगंज, बैलीगंज, ग्रेसीगंज और विशगंज जैसे प्रमुख बाजार थे. मुंशीगंज भी शहर के पास एक महत्वपूर्ण बाजार था.
बैलीगंज उस दौर में जिले का मुख्य थोक बाजार माना जाता था. यहां सामान पर चुंगी नहीं लगती थी, इसलिए यह एक तरह के भंडारण और व्यापार केंद्र की तरह काम करता था. 1899-1900 के अकाल के दौरान मुंबई क्षेत्र में अनाज की मांग बढ़ने से रायबरेली में अनाज का व्यापार भी तेजी से बढ़ा.
रायबरेली में कई ऐतिहासिक मस्जिदें, पुल, सराय और पुराने शिक्षण संस्थान भी रहे हैं. सई नदी पर बनाया गया बड़ा पत्थर का पुल भी शहर की पुरानी पहचान का हिस्सा रहा है. यहां सरकारी हाई स्कूल, किले के भीतर स्कूल, नगरपालिका का मिडिल स्कूल और संस्कृत पाठशाला जैसे शिक्षण संस्थान भी मौजूद थे.
आज रायबरेली अपने लंबे इतिहास, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत तथा प्रशासनिक महत्व के कारण उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में गिना जाता है. पुराने किले, मस्जिदों, बाजारों और नदी से जुड़ी इसकी पहचान शहर के अतीत की झलक देती है.
रायबरेली की हरचंदपुर, चंदापुर और साइबर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने मैट्रिमोनियल साइट्स पर फर्जी विदेशी प्रोफाइल बनाकर लड़कियों से ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अरविंद, प्रसून, शिवा और मिथिलेश को दतौली लिंक रोड से गिरफ्तार कर लिया.
रायबरेली के लालगंज क्षेत्र में 16 वर्षीय किशोरी की निर्मम हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है. 14 दिन से लापता किशोरी का सड़ा-गला शव आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना के पास सूखी नहर की झाड़ियों से बरामद हुआ. पुलिस ने मुख्य आरोपी रौनक यादव को गिरफ्तार कर लिया है.
लखनऊ-प्रयागराज मार्ग पर निगोहां-बछरावां टोल प्लाजा के पास ऑक्सीजन सिलेंडरों से लदा एक लोडर डिवाइडर से टकराकर पलट गया. हादसे के बाद सिलेंडरों से गैस लीक होने लगी, जिससे वहां से गुजर रहे वाहनों में सवार लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई.
रायबरेली में रवि उर्फ कबीर ने डीह थाने की पुलिस पर मंदिर में चोरी कबूल कराने के लिए थर्ड डिग्री देने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि उन्हें पट्टे, लाठी से पीटा गया और रस्सी से बांधकर लटकाया गया. उन्होंने इलाज के लिए पैसे नहीं होने की बात कही. पुलिस ने आरोपों की जांच कराने की बात कही है.
रायबरेली के जगतपुर थाना क्षेत्र के उड़वा गांव में अपनी मासूम बेटी को स्कूल छोड़ने जा रही महिला की कार पर कुछ दबंगों ने ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया. इस हमले में मां और बेटी दोनों घायल हो गईं. पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है.
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अराधना मिश्रा ने आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर रायबरेली और अमेठी में पार्टी की स्थिति पर चर्चा की. उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधा और कहा कि जनता धर्म, जाति से ऊपर उठकर असल मुद्दों पर वोट करेगी.
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग को लेकर सबसे बड़ा पेच पांच जिलों में फंस गया है सहारनपुर, रायबरेली, अमेठी, बाराबंकी और सीतापुर की सीटों पर दोनों दल अपनी-अपनी मजबूत दावेदारी कर रहे हैं कांग्रेस 105-115 सीटों की मांग कर रही है, जबकि सपा 85-90 सीटों के फॉर्मूले पर अड़ी बताई जा रही है आखिर गठबंधन में कुर्बानी कौन देगा?
यूपी में आगामी चुनाव से पहले 'इंडिया' गठबंधन के घटकों में रार बढ़ गई है. अखिलेश यादव के रायबरेली दौरे पर भड़के कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने पलटवार कर कन्नौज-इटावा जाने की चेतावनी दी. सपा ने इसे भाजपा के दमन के खिलाफ लड़ाई बताया, तो वहीं भाजपा ने इसे हताश गठबंधन की आपसी ललकार करार दिया है.
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उत्तर प्रदेश के चुनावी समर का शंखनाद करते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रायबरेली से अपनी पीडीए रथ यात्रा की शुरुआत कर दी है. लखनऊ से चलकर अखिलेश यादव का काफिला रायबरेली पहुंचा, जहां सपा कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया. अखिलेश यादव ने इस यात्रा के जरिए साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों का बिगुल फूंक दिया है.
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रायबरेली के बछरावां से विशेष 'पीडीए रथ यात्रा' का आगाज कर 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव का शंखनाद कर दिया है. कांग्रेस के इस अभेद्य गढ़ से यात्रा शुरू कर अखिलेश यादव ने जहां एक ओर लोधी और पासी वोट बैंक को साधने की रणनीति अपनाई है, वहीं दूसरी ओर सहयोगी दलों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने का बड़ा दांव भी खेला है.
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रायबरेली के फिरोज गांधी कॉलेज में छात्र सभा और ABVP विवाद ने राजनीतिक मोड़ ले लिया है. विधायक राहुल लोधी पर कथित पुलिस कार्रवाई को अखिलेश यादव ने "PDA पर प्रहार" बताते हुए 24 सितंबर को 'PDA रथ' से रायबरेली जाने और उनके घर चाय पीने का ऐलान किया है, जिससे 2027 चुनाव की सरगर्मी बढ़ गई है.
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रायबरेली सदर से बीजेपी विधायक अदिति सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लखनऊ में शिष्टाचार भेंट की. 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गलियारों में उनके कांग्रेस में वापसी की चर्चा थी, लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा साझा तस्वीर ने सियासी माहौल को बदल दिया है.