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नोएडा के छिजारसी में बिजली का बड़ा खेल! 13 हजार अवैध कनेक्शन, हर महीने 1.30 करोड़ की वसूली का अनुमान

नोएडा के छिजारसी डूब क्षेत्र में करीब 13 हजार अवैध बिजली कनेक्शनों का मामला सामने आने के बाद विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है. आरोप है कि निजी सिंडिकेट प्राइवेट मीटर और नेटवर्क के जरिए बिजली पहुंचा रहा था. न्यूनतम 1 हजार रुपये प्रति कनेक्शन के हिसाब से हर महीने करीब 1.30 करोड़ रुपये की वसूली का अनुमान है.

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2017 से नए कनेक्शन बंद हैं.(Photo: Screengrab)
2017 से नए कनेक्शन बंद हैं.(Photo: Screengrab)

नोएडा के छिजारसी के डूब क्षेत्र में अवैध बिजली कनेक्शनों का बड़ा मामला सामने आया है. यहां करीब 13 हजार अनधिकृत कनेक्शन संचालित होने की बात सामने आई है, जबकि वैध कनेक्शनों की संख्या करीब 3 हजार 800 बताई जा रही है. आरोप है कि एक निजी सिंडिकेट प्राइवेट मीटर और नेटवर्क के जरिए लोगों तक बिजली पहुंचाकर हर महीने बड़ी रकम वसूल रहा है.

शुरुआती अनुमान के मुताबिक, अगर एक कनेक्शन से न्यूनतम 1 हजार रुपये भी वसूले जाते हैं तो 13 हजार कनेक्शनों से यह रकम करीब 1.30 करोड़ रुपये प्रति माह बैठती है. हालांकि, वसूली की वास्तविक रकम और कथित सिंडिकेट से जुड़े लोगों की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट होगी.

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यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने भी उठाया गया है. बताया जा रहा है कि स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के CEO मनोज कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री के सामने छिजारसी में चल रहे कथित अवैध बिजली नेटवर्क का मुद्दा रखा. इसके बाद मुख्यमंत्री ने पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल को फटकार लगाते हुए मामले में जवाब तलब किया.

2017 से नए कनेक्शन बंद, फिर कैसे पहुंच रही बिजली?

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बिजली विभाग के अधिकारियों के मुताबिक छिजारसी का संबंधित इलाका डूब क्षेत्र में आता है. यहां वर्ष 2017 से नए बिजली कनेक्शन पर रोक है. इसके बावजूद बड़ी संख्या में अवैध निर्माणों में लोग रह रहे हैं और बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं. विभाग का कहना है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने विभागीय सिस्टम को अवैध तरीके से आगे बढ़ाकर अपना नेटवर्क तैयार कर लिया.

नोएडा बिजली विभाग के मुख्य अभियंता एसके जैन ने बताया कि 2017 से नए कनेक्शन बंद होने का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने सिस्टम को आगे बढ़ाया और अनधिकृत रूप से बिजली की सप्लाई शुरू कर दी. विभाग पहले भी कई बार ऐसे कनेक्शन काट चुका है, लेकिन कार्रवाई के बाद कथित तौर पर लाइन दोबारा जोड़ दी जाती है.

अधिकारी के मुताबिक, विभाग की कार्रवाई के बाद दबाव बनाने के लिए प्रदर्शन और घेराव तक किए जाते हैं. उन्होंने बताया कि कभी जिलाधिकारी आवास तो कभी जनप्रतिनिधियों के आवास का घेराव किया गया. बिजली विभाग में भी इस मुद्दे को लेकर करीब तीन महीने तक धरना दिया गया था.

कनेक्शन काटते ही फिर जोड़ देते हैं लाइन

एसके जैन का दावा है कि जब विभाग अवैध नेटवर्क को ध्वस्त करता है तो कानून-व्यवस्था का हवाला देकर दबाव बनाया जाता है और इसके बाद कथित तौर पर बिजली लाइन दोबारा जोड़ दी जाती है. अधिकारी के मुताबिक, इस नेटवर्क से जुड़े लोग अब इतने प्रशिक्षित हो चुके हैं कि विभाग की जानकारी के बिना भी कनेक्शन जोड़ लेते हैं.

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बिजली विभाग की टीम ने छिजारसी क्षेत्र में अभियान चलाकर कई अवैध नेटवर्क को ध्वस्त किया है. अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई लगातार जारी रहेगी. कथित सिंडिकेट में शामिल लोगों के खिलाफ थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.

मुख्य अभियंता एसके जैन ने कहा कि अभियान प्रतिदिन चलाया जाएगा और अवैध नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने का प्रयास किया जाएगा. जिन निजी सिंडिकेट के नाम सामने आए हैं और जो लोग इसमें शामिल पाए जा रहे हैं, उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई जा रही है.

बिजली कटने पर सड़कों पर उतरे लोग, पुलिस ने संभाला मोर्चा

बिजली विभाग की कार्रवाई के बाद बिजली कटने से नाराज स्थानीय निवासी भी परेशान नजर आए. शाम होते ही बड़ी संख्या में लोग कार्रवाई के विरोध में सड़कों पर उतर आए और प्रदर्शन शुरू कर दिया. हालात को देखते हुए पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराने की कोशिश की.

नोएडा और गाजियाबाद में यमुना किनारे के खादर और डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं. इन इलाकों में बड़ी इमारतों के साथ बड़ी संख्या में फार्म हाउस बने होने की शिकायतें सामने आती रही हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जहां निर्माण पर रोक है और नए बिजली कनेक्शन भी बंद हैं, वहां बिजली की सप्लाई किस नेटवर्क के जरिए पहुंच रही थी.

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अब बिजली विभाग की कार्रवाई और प्रस्तावित FIR के बाद कथित निजी बिजली सिंडिकेट पर शिकंजा कसने की तैयारी है. जांच के दौरान यह भी स्पष्ट होने की उम्मीद है कि अनधिकृत नेटवर्क किस तरह संचालित किया जा रहा था, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और बिजली के नाम पर वसूली गई रकम आखिर कहां जा रही थी.

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