भारतीय फुटबॉल में शुक्रवार को बड़ा बदलाव हुआ. गोवा का चर्चिल ब्रदर्स अब इंडियन सुपर लीग (ISL) में जमशेदपुर एफसी की जगह लेगा. टाटा स्टील ने जमशेदपुर फुटबॉल क्लब में अपनी पूरी हिस्सेदारी चर्चिल ब्रदर्स को हस्तांतरित करने का फैसला किया है. मात्र 100 रुपये के सांकेतिक मूल्य पर हुए इस सौदे में क्लब के 12 खिलाड़ियों और दो कोच का स्थानांतरण भी शामिल है.
ISL का आगामी सीजन 4 सितंबर से शुरू होना है और चर्चिल ब्रदर्स को शुक्रवार तक अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) को 1.1 करोड़ रुपये की पूरी भागीदारी फीस जमा करनी होगी. समझौते के मुताबिक क्लब के खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के अनुबंध 1 सितंबर 2026 से चर्चिल ब्रदर्स के अधीन होंगे. पूरी स्वामित्व प्रक्रिया 31 अगस्त तक पूरी होने की उम्मीद है.
सात दिन में बदली तस्वीर
जमशेदपुर एफसी का ISL से बाहर होना कुछ दिन पहले तक तय नजर आ रहा था. 31 जुलाई को क्लब ने पहली किस्त के 55 लाख रुपये की भागीदारी फीस जमा करने की समयसीमा निकलने के कुछ घंटों बाद अपनी पहली टीम को भंग कर दिया था. इसके बाद टाटा स्टील और AIFF के बीच क्लब के भविष्य को लेकर तस्वीर साफ नहीं थी.
अब चर्चिल ब्रदर्स के आने से जमशेदपुर को ISL में नई जिंदगी मिल गई है. AIFF के मुताबिक बाकी 13 ISL क्लब अपनी भागीदारी फीस जमा कर चुके हैं.
टाटा स्टील ने कहा कि यह हस्तांतरण AIFF के नियमों के तहत किया गया है. कंपनी के मुताबिक सौदे में क्लब का ISL स्पोर्टिंग लाइसेंस, 12 खिलाड़ियों और दो कोचों का स्थानांतरण शामिल है. हालांकि अंतिम हस्तांतरण AIFF की जरूरी मंजूरियों और अन्य औपचारिकताओं के पूरा होने पर निर्भर है.
चर्चिल की वापसी, लेकिन कहानी आसान नहीं
चर्चिल ब्रदर्स के लिए यह सौदा भारतीय फुटबॉल के शीर्ष स्तर पर वापसी का रास्ता खोलता है. गोवा का यह क्लब 2008-09 और 2012-13 में देश की दूसरी श्रेणी की लीग आई-लीग का चैम्पियन रह चुका है. इस सीजन से आई-लीग का नाम बदलकर इंडियन फुटबॉल लीग कर दिया गया है.
हालांकि चर्चिल का हालिया सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है. क्लब ने 2025-26 की आई-लीग से अपना नाम वापस लिया था, जिसके बाद AIFF ने उसे आई-लीग 2 में भेज दिया था.
इससे पहले 2024-25 सीजन में चर्चिल ब्रदर्स को AIFF ने शुरुआती तौर पर आई-लीग का चैम्पियन घोषित किया था. लेकिन बाद में स्विट्जरलैंड स्थित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट (CAS) ने यह फैसला पलटते हुए इंटर काशी को चैम्पियन घोषित किया, जिससे वाराणसी की टीम को ISL में प्रमोशन मिला.
टाटा स्टील फुटबॉल से दूर नहीं, सिर्फ ISL से बाहर
जमशेदपुर एफसी से बाहर निकलने के बावजूद टाटा स्टील ने साफ किया है कि वह फुटबॉल से अपना रिश्ता खत्म नहीं कर रही. कंपनी ने कहा कि उसका फोकस अब ग्रासरूट और युवा फुटबॉल पर और मजबूत होगा.
1987 में स्थापित टाटा फुटबॉल अकादमी (TFA) ने अब तक 300 से ज्यादा कैडेट तैयार किए हैं, जिनमें से करीब 150 भारतीय राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. कंपनी के मुताबिक झारखंड की अंडर-14 और अंडर-16 टीमों के बड़ी संख्या में खिलाड़ी टाटा स्टील फाउंडेशन के फुटबॉल प्रशिक्षण केंद्रों से निकले हैं, जो खास तौर पर आदिवासी समुदायों के साथ काम करते हैं.
टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट कॉरपोरेट सर्विसेज डीबी सुंदर रामम ने कहा कि कंपनी स्थानीय और आदिवासी समुदायों के युवा खिलाड़ियों की पहचान और उन्हें निखारने का काम जारी रखेगी. उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी टाटा फुटबॉल अकादमी की तर्ज पर लड़कियों के लिए फुटबॉल अकादमी शुरू करने की योजना बना रही है.
JRD टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के दरवाजे खुले रहेंगे
जमशेदपुर से ISL टीम का नाम भले बदल जाए, लेकिन JRD टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का फुटबॉल से रिश्ता कायम रहेगा. रामम ने कहा कि अगर ISL का कोई मुकाबला इस मैदान पर खेला जाता है तो टाटा स्टील उसका स्वागत करेगी और कंपनी स्टेडियम के बुनियादी ढांचे का रखरखाव जारी रखेगी.
उन्होंने यह भी कहा कि जमशेदपुर एफसी स्थानीय टूर्नामेंटों में खेलना जारी रख सकता है. जो खिलाड़ी जमशेदपुर में रहना चाहते हैं, उनके मौजूदा अनुबंधों का सम्मान करने की बात भी टाटा स्टील ने कही है.
32.23 करोड़ रुपये का कारोबार, 5.8 करोड़ की नेटवर्थ
टाटा स्टील और चर्चिल ब्रदर्स के बीच हुए समझौते में जमशेदपुर एफसी की वित्तीय तस्वीर भी सामने आई है. 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में JFSPL (Jamshedpur Football & Sporting Private Limited ) का टर्नओवर 32.23 करोड़ रुपये था, जो टाटा स्टील लिमिटेड के कुल समेकित कारोबार का सिर्फ 0.01 प्रतिशत है. वहीं 31 मार्च 2026 तक JFSPL की कुल नेटवर्थ 5.8 करोड़ रुपये आंकी गई थी.