इंग्लैंड के युवा तेज गेंदबाज जॉन टर्नर ने महज 25 साल की उम्र में क्रिकेट को अलविदा कह दिया. इंग्लैंड के लिए ओडीआई और टी20 इंटरनेशनल खेल चुके टर्नर का करियर लगातार चोटों से प्रभावित रहा. पीठ में स्ट्रेस फ्रैक्चर के कारण वह एक साल से ज्यादा समय से मैदान से बाहर थे. आखिरकार उन्होंने मैदान पर कमबैक की बजाया जिंदगी की नई पारी शुरू करने का फैसला किया.
जॉन टर्नर का इतनी कम उम्र में संन्यास लेना इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि हैम्पशायर के साथ उनके कॉन्ट्रैक्ट में अभी दो साल बाकी थे. इसके अलावा वह पिछले साल के आखिर तक इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) के डेवलपमेंट कॉन्ट्रैक्ट का भी हिस्सा थे. जोहानिसबर्ग में जन्मे जॉन टर्नर ने 2024 में वेस्टइंडीज दौरे पर इंग्लैंड के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेला था. उन्हें दो ओडीआई और दो टी20 इंटरनेशनल मैच खेलने का मौका मिला, जिसमें उन्होंने कुल तीन विकेट अपने नाम किए.
हालांकि इंटरनेशनल क्रिकेट तक पहुंचने का उनका सफर इससे पहले ही शुरू हो गया था. घरेलू क्रिकेट में अपनी रफ्तार और प्रदर्शन से प्रभावित करने के बाद टर्नर को 2023 में पहली बार इंग्लैंड की टीम में बुलाया गया था. द हंड्रेड में उनके प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान खास तौर पर खींचा था. लेकिन जिस समय उनका करियर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा था, उसी दौरान चोटों ने उनकी राह रोक दी. टर्नर ने पिछले साल जून के बाद से कोई प्रतिस्पर्धी मैच नहीं खेला. पीठ में हुए स्ट्रेस फ्रैक्चर ने उन्हें लंबे समय तक क्रिकेट से दूर रखा. लगातार रिहैब और वापसी की कोशिशों के बावजूद वह मैदान पर नहीं लौट सके.
रिटायरमेंट पर हुए भावुक
आखिरकार अपनी चोटों के पुराने रिकॉर्ड और भविष्य को ध्यान में रखते हुए जॉन टर्नर ने महज 25 साल की उम्र में संन्यास लेने का कठिन फैसला किया. टर्नर ने अपने बयान में कहा, 'प्रोफेशनल और इंटरनेशनल क्रिकेट खेलना हमेशा से मेरा सपना था. हैम्पशायर और इंग्लैंड के लिए खेलना मेरे बचपन के उन्हीं सपनों को जीने जैसा रहा. हालांकि अब मैंने क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है और जैसा आप सोच सकते हैं, यह मेरे लिए सबसे मुश्किल फैसलों में से एक रहा.'
जॉन टर्नर ने माना कि एक साल से ज्यादा समय तक मैदान से बाहर रखने वाले स्ट्रेस फ्रैक्चर ने उनके फैसले में बड़ी भूमिका निभाई. उन्होंने कहा, 'स्ट्रेस फ्रैक्चर और मेरे इंजरी रिकॉर्ड ने स्वाभाविक रूप से मुझे एक क्रिकेटर के रूप में और क्रिकेट से बाहर अपने भविष्य के बारे में सोचने पर मजबूर किया. इसके बाद मैंने फैसला किया कि अब अपनी अगली चुनौती की तरफ बढ़ने का सही समय है.' यानी टर्नर ने सिर्फ मौजूदा चोट को देखते हुए यह फैसला नहीं लिया, बल्कि बार-बार चोटिल होने की समस्या को देखते हुए अपने लंबे भविष्य को प्राथमिकता दी.
जॉन टर्नर 2021 में एक सफल ट्रायल के बाद हैम्पशायर से जुड़े थे. इसके बाद उन्होंने तेजी से अपनी पहचान बनाई और कुछ ही वर्षों में इंग्लैंड की टीम तक पहुंच गए. उन्होंने हैम्पशायर के साथ बिताए पांच वर्षों को अपने जीवन का बेहद खास हिस्सा बताया. टर्नर ने कहा कि क्लब ने उन पर जो भरोसा दिखाया और जिस तरह उन्हें आगे बढ़ने के मौके दिए, उसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगे.
जॉन टर्नर की कहानी दिलचस्प रही है. उनका जन्म दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में हुआ और उन्होंने वहां हिल्टन कॉलेज में पढ़ाई की. उनकी मां इंग्लिश हैं, जिसके कारण उनके पास ब्रिटिश पासपोर्ट है. बाद में वह यूनिवर्सिटी की पढ़ाई के लिए साउथ अफ्रीका छोड़ ब्रिटेन चले आए. टर्नर ने यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर से इकोनॉमिक्स और फाइनेंस में ग्रेजुएशन किया. पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने क्रिकेट में भी अपना रास्ता बनाया और आखिरकार इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम तक पहुंचे.