scorecardresearch
 

21वीं सदी के अंत तक बढ़ जाएगा तापमान! उत्तराखंड की इस नदी पर मंडराया खतरा, IIT रुड़की और जीबी पंत की डरावनी रिपोर्ट

जलवायु परिवर्तन के चलते 21वीं सदी के अंत तक उत्तराखंड की कोसी नदी बेसिन के तापमान में बढ़ोतरी की चेतावनी दी गई है. यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि पहाड़ी समुदाय मुख्य रूप से प्राकृतिक और स्थानीय जल स्रोतों पर ही निर्भर हैं.

Advertisement
X
 क्लाइमेट चेंज के कारण उत्तराखंड की कोसी नदी बेसिन में जल सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. (Photo: PIB)
क्लाइमेट चेंज के कारण उत्तराखंड की कोसी नदी बेसिन में जल सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. (Photo: PIB)

दुनिया भर के वैज्ञानिक क्लाइमेट चेंज को लेकर लगातार चिंता जता रहे हैं. इसका गंभीर असर पूरे विश्व में दिखाई देने लगा है. आईआईटी रुड़की और जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के शोधकर्ताओं ने क्लाइमेट चेंज के कारण उत्तराखंड की कोसी नदी बेसिन में जल सुरक्षा पर बड़े खतरे की चेतावनी दी है. तापमान बढ़ने के साथ भूजल रिचार्ज में गिरावट और सूखे का जोखिम बढ़ सकता है.

1800 के दशक से इंसानी गतिविधियां क्लाइमेट चेंज यानी जलवायु परिवर्तन की सबसे बड़ी वजह बनी हुई हैं. 200 करोड़ लोगों को भोजन-पानी देने वाले हिंदूकुश हिमालय से लेकर समुद्र की गहराई तक पृथ्वी गर्म हो रही है. विश्व के सभी पहाड़ पृथ्वी की सतह के लगभग 20% क्षेत्रफल पर फैले हुए हैं.

पहाड़ दुनिया का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन पिछले कुछ दशकों में जलवायु परिवर्तन और बढ़ती जनसंख्या, जंगलों की कटाई, प्राकृतिक संसाधनों का अधिक इस्तेमाल और अवैज्ञानिक कृषि पद्धति के कारण पर्वतीय क्षेत्रों के मौसम को गंभीर संकटों का सामना करना पड़ रहा है.

वहीं, उत्तराखंड में भी जिन ठंडे पहाड़ों पर कभी एसी-कूलर की जरूरत नहीं पड़ती थी, वहां अब लोग तेज गर्मी महसूस कर रहे हैं. मौसम के पैटर्न में बदलाव आ रहे हैं.

Advertisement

आईआईटी रुड़की और जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के शोधकर्ताओं की एक नई स्टडी ने चेतावनी दी है कि क्लाइमेट चेंज के कारण उत्तराखंड की कोसी नदी बेसिन में जल सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. 

यह भी पढ़ें: भारत के मॉनसूनी बादलों को खा रहा है चीन का 'डॉल्फिन'! 3 लाख लोग हटाए गए

यहां तापमान बढ़ने, भूजल रिचार्ज में गिरावट और सूखे का जोखिम बढ़ने से क्षेत्र की खेती, पीने के पानी की सप्लाई और नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकते हैं.

शोधकर्ताओं ने पांच प्रमुख वैश्विक जलवायु मॉडलों के पूर्वानुमानों को सोइल एंड वाटर असेसमेंट टूल मॉडल का उपयोग करके भविष्य की जलवायु परिस्थितियों का कोसी नदी बेसिन के हाइड्रोलॉजिकल व्यवहार पर संभावित प्रभावों का आकलन किया. 

अध्ययन के अनुसार, 21वीं शताब्दी के दौरान बेसिन के जलवैज्ञानिक चक्र में बड़े बदलाव आ सकते हैं, वर्तमान में लगभग 38.4°C रहने वाला अधिकतम तापमान, शताब्दी के अंत तक मध्यम उत्सर्जन परिदृश्य (एमिशन सिनेरियो) में लगभग 41.6°C व उच्च एमिशन सिनेरियो में लगभग 43.2°C तक पहुंच सकता है.

अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमानों में काफी बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे वाष्पीकरण में वृद्धि होगी और समग्र जल उपलब्धता प्रभावित होगी.

यह भी पढ़ें: 144 घंटे तक नहीं थमेगी बारिश! MP-छत्तीसगढ़ से यूपी तक आफत की आशंका

Advertisement

जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के डायरेक्टर डॉ. आई. डी. भट्ट का कहना है, यह स्टडी हिमालयी जलग्रहण क्षेत्रों के हाइड्रोलॉजी में एक बड़े बदलाव को रेखांकित करती है, जहां गर्म तापमान के कारण वाष्पोत्सर्जन बढ़ने और भूजल के पुनर्भरण में कमी आने की आशंका है. पहाड़ी समुदाय मुख्य रूप से प्राकृतिक स्रोतों और स्थानीय जल स्रोतों पर निर्भर हैं, इसलिए भविष्य के जलवायु परिवर्तन और सूखे के जोखिमों से निपटने के लिए सक्रिय अनुकूलन उपाय और विज्ञान आधारित जल प्रबंधन रणनीतियां बेहद जरूरी होंगी.

बता दें, दुनिया इस वक्त क्लाइमेट चेंज का असर देख रही है. यूरोप में भीषण हीटवेव से तबाही देखने को मिली है. वैज्ञानिकों के अनुसार, यूरोप के 12 बड़े शहरों में भीषण गर्मी के कारण 2 हजार से अधिक लोगों की जान चली गई, जिनमें से करीब 1,500 मौतों की सीधी वजह क्लाइमेट चेंज बताई गई.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement