
झारखंड मंत्रालय (प्रोजेक्ट भवन) के बाहर का माहौल इस वक्त पूरी तरह गमगीन और आक्रोश से भरा हुआ है. राज्य सरकार द्वारा TDPL (टीडीपीएल) एजेंसी के जरिए हुई सभी परीक्षाओं को रद्द करने की अधिसूचना जारी होते ही अभ्यर्थियों के सब्र का बांध टूट गया. सालों की मेहनत, रेलवे व अन्य केंद्रीय सेवाओं की नौकरी छोड़कर आए अभ्यर्थियों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.
कैमरे के सामने बिलखते अभ्यर्थियों का कहना है कि धांधली और भ्रष्टाचार के आरोपों का कलंक झेलना सबसे ज्यादा तकलीफदेह है.
'स्टेशन मास्टर की नौकरी छोड़ी थी...' कैमरे के सामने बेहोश हुईं मनीषा
हजारीबाग की रहने वाली अभ्यर्थी मनीषा का रो-रोकर बुरा हाल है. वे पहले भारतीय रेलवे में स्टेशन मास्टर के पद पर तैनात थीं. JSSC CGL क्रैक करने के बाद उन्होंने रेलवे की नौकरी छोड़ दी और वित्त विभाग में सहायक प्रशाखा अधिकारी (ASO) के पद पर योगदान दिया. उनका चयन महिला सुपरवाइजर के पद पर भी हुआ था और वे कर्नाटक में ट्रेनिंग ले रही थीं.
पिछले 15 दिनों से जारी मानसिक तनाव और नौकरी जाने के सदमे के कारण मनीषा आजतक के कैमरे के सामने ही बेहोश होकर गिर पड़ीं, जिन्हें उनके साथी अभ्यर्थियों ने संभाला.

'प्रतिभा रो रही है और भीड़तंत्र के आगे सरकार झुक रही है'
साहिबगंज के रहने वाले गुड्डू कुमार राय की कहानी भी ऐसी ही है. वे भारतीय रेल में सीनियर गुड्स ट्रेन मैनेजर की सरकारी नौकरी छोड़कर झारखंड पुलिस मुख्यालय में सहायक प्रशाखा अधिकारी (ASO) बने थे. लेकिन आज आलम यह है कि जिस दफ्तर में वे अफसर थे, उसी के दरवाजे पर उन्हें रोक दिया गया.
पीड़ित गुड्डू कुमार राय ने बताया कि शादी हो चुकी है, परिवार की जिम्मेदारी है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि सबूत मिलने पर केवल दोषियों पर कार्रवाई होगी, लेकिन सरकार का यह फैसला कोर्ट की अवमानना है.
मिनी IAS की चाह में गंवा दी शिक्षक की नौकरी
एक अन्य अभ्यर्थी ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि वे 2014 से टीजीटी (TGT) शिक्षक के रूप में कार्यरत थे. ग्रामीण विकास विभाग में ASO के पद को 'मिनी IAS' माना जाता है, इसी उम्मीद में उन्होंने शिक्षक की नौकरी छोड़ दी. आज सरकार के एक फैसले ने उन्हें सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है.
वहीं, रेलवे में ऑफिस सुपरिटेंडेंट रहे श्याम सुंदर मंडल ने बताया कि रांची में रहकर सेवा देने के लिए उन्होंने केंद्रीय नौकरी छोड़ी थी. बहन की शादी के लिए कर्ज ले रखा है, परिवार का बोझ है और अब सिर पर बेरोजगारी का खतरा. अभ्यर्थियों ने साफ किया है कि वे इस फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे.
'मां को नहीं बताया, सदमा लग जाएगा'
हजारीबाग के विकास कुमार, जो श्रम प्रवर्तन अधिकारी के पद पर चयनित हुए थे, उन्होंने रुंधे गले से बताया कि उनकी मां की तबियत अक्सर खराब रहती है. उन्होंने बताया कि मैंने मां को नौकरी रद्द होने की बात नहीं बताई है. अगर उन्हें पता चला तो सदमे से हार्ट अटैक भी आ सकता है. क्या इसकी जिम्मेदारी सरकार लेगी?
लग रहे 'न्याय दो या फांसी दो' के नारे
रांची में मंत्रालय के बाहर सरकार के द्वारा कई परीक्षाएं रद्द करने की वजह से जिन लोगों की नौकरी गई है, उन लोगों के द्वारा सरकार के खिलाफ भारी नारेबाजी की जा रही है.