सिक्किम में ग्लेशियल झीलों से आने वाले खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने 40 ऐसी झीलों की पहचान की है, जिन्हें ज्यादा खतरनाक माना गया है. इनमें 16 झीलें सबसे ज्यादा खतरे वाली हैं. सरकार ने शाको चो झील को सबसे ज्यादा खतरे वाली झील बताया है. अगर इन झीलों का पानी अचानक बाहर निकलता है, तो नीचे के इलाकों में तेज बाढ़ आ सकती है.
यह जानकारी 4 सितंबर 2026 को सिक्किम में GLOF यानी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड के खतरे को लेकर हुए एक कार्यक्रम में दी गई. अधिकारियों ने बताया कि इन झीलों पर सैटेलाइट तस्वीरों और रिमोट सेंसिंग की मदद से नजर रखी जा रही है. इसका मकसद झीलों में होने वाले बदलाव को समय रहते पता करना और खतरा बढ़ने पर लोगों को पहले ही चेतावनी देना है.
यह भी पढ़ें: बेल्जियम के रॉकेट अब देश में बनेंगे, एयर स्ट्राइक में भारी पड़ेगा भारत
40 झीलों में 16 सबसे ज्यादा खतरे वाली
सिक्किम में पहचानी गई 40 झीलों में 16 को कैटेगरी A में रखा गया है. यह सबसे ज्यादा खतरे वाली कैटेगरी है. 2 झीलें कैटेगरी B यानी ज्यादा खतरे वाली हैं, जबकि 9 झीलें कैटेगरी C में हैं, जिनका खतरा कम से मध्यम है. बाकी 13 झीलों को अभी किसी कैटेगरी में नहीं रखा गया है.
अधिकारियों के मुताबिक हर झील का खतरा अलग है. इसलिए सभी झीलों के लिए एक ही तरह की योजना नहीं बनाई जा सकती. ल्होनक कॉम्प्लेक्स, शाको चो और गुरुडोंगमार कॉम्प्लेक्स के लिए अलग-अलग योजनाएं बनाई जा रही हैं.

क्या होता है GLOF?
ग्लेशियर जब पिघलते हैं तो उनका पानी कई जगह जमा हो जाता है और वहां ग्लेशियल झील बन जाती है. अगर किसी वजह से इस झील का पानी अचानक बाहर निकल जाए तो इसे GLOF कहते हैं. झील में बहुत ज्यादा पानी भर जाना, लैंडस्लाइड, बर्फ या चट्टान का झील में गिरना और भूकंप जैसी घटनाएं इसकी वजह बन सकती हैं. झील टूटने पर पानी बहुत तेजी से नीचे की ओर जाता है. इससे घरों, सड़कों, पुलों और दूसरी जगहों को नुकसान हो सकता है.
यह भी पढ़ें: सुपर अल-नीनो का कहर! इंडोनेशिया में जंगलों की आग से कई देशों में फैला जहरीला धुआं
2023 में दिख चुका है GLOF का खतरा
सिक्किम में अक्टूबर 2023 में GLOF की बड़ी घटना हो चुकी है. इसमें कम से कम 60 लोगों की मौत हुई थी. मंगन, गंगटोक, पाकयोंग और नामची जिलों में काफी नुकसान हुआ था. चुंगथांग बांध भी इस घटना में तबाह हो गया था. 2023 की इस घटना के बाद सिक्किम में GLOF से बचाव की तैयारी पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है. राज्य का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग फरवरी 2025 से GLOF के खतरे से जुड़ा काम देख रहा है.

शाको चो और ल्होनक पर खास नजर
सरकार ने शाको चो को सिक्किम की सबसे ज्यादा खतरे वाली झील बताया है. इसके लिए तैयार की गई विस्तृत रिपोर्ट राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजी जा चुकी है. जल शक्ति मंत्रालय को भी शुरुआती रिपोर्ट भेजी गई है. ल्होनक कॉम्प्लेक्स में मुगुथांग के पास डोलमा सांपा में बाढ़ का पानी रोकने के लिए एक ढांचा बनाने की योजना है. केंद्रीय जल आयोग और सिक्किम सरकार मिलकर इस पर काम कर रहे हैं.
यह भी पढ़ें: गगनयान के लिए इसरो का बड़ा कदम, इसी साल अंतरिक्ष में जाएगा पहला मानवरहित मिशन
झीलों का पानी कम करने की तैयारी
सरकार कुछ झीलों का पानी कम करने के तरीकों पर भी काम कर रही है. इसके लिए पाइप या पंप से पानी निकालने, पानी के रास्ते को बेहतर करने और जरूरत पड़ने पर नए रास्ते बनाने जैसे विकल्प देखे जा रहे हैं. कुछ जगहों पर सुरक्षा दीवार या सुरंग बनाने पर भी विचार हो रहा है. झीलों में पानी का स्तर और पानी के बहाव पर भी लगातार नजर रखी जा रही है. इसके लिए अलग-अलग वैज्ञानिक जांच और सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
सिक्किम में नए अर्ली वार्निंग सेंसर लगाने का प्रस्ताव भी रखा गया है. इससे झीलों में अचानक होने वाले बदलाव का पता जल्दी लगाया जा सकेगा. सरकार GLOF से बचाव के लिए एक खास नियम और व्यवस्था तैयार करने पर भी काम कर रही है, ताकि ऐसे खतरे से निपटने के लिए पहले से तैयारी की जा सके.