दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में जंगलों की आग से निकला धुआं लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है. इंडोनेशिया के सुमात्रा और बोर्नियो में जुलाई के बीच से जंगल और जमीन में आग लगी हुई है. इसका धुआं अब मलेशिया, सिंगापुर और फिलीपींस तक पहुंच गया है. कई इलाकों में हवा इतनी खराब हो गई है कि प्रदूषण का स्तर WHO की सुरक्षित सीमा से 15 गुना ज्यादा पहुंच गया है. Photo: AFP
इस खराब हवा का असर लोगों की सेहत पर भी दिख रहा है. इंडोनेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक जुलाई और अगस्त के बीच जंगल और जमीन की आग से जुड़ी 50 हजार से ज्यादा सांस की बीमारी के मामले सामने आए. इनमें 12 हजार से ज्यादा बच्चे पांच साल से कम उम्र के हैं. इस बार हालात ज्यादा खराब होने की एक बड़ी वजह सुपर अल-नीनो है. इसके कारण इलाके में बारिश कम हुई है और सूखा बढ़ा है. सूखी जमीन और गर्म मौसम में आग तेजी से फैल रही है. Photo: AFP
इंडोनेशिया की आग का असर अब सिर्फ वहीं रहने वाले लोगों पर नहीं है. हवा के साथ धुआं दूसरे देशों तक भी पहुंच रहा है. दक्षिण कालीमंतन के बंजारबारू में रहने वाली 19 साल की रिज्मा नूर फातिमा ने बताया कि उनके स्कूल की क्लास में धुआं इतना ज्यादा था कि नीचे अपने पैर तक दिखाई नहीं दे रहे थे. घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखने के बाद भी धुआं अंदर आ रहा था. Photo: Reuters
फिलीपींस के पलावन में भी लोगों ने आंखों, नाक और गले में जलन की शिकायत की है. मलेशिया में भी खराब हवा के कारण अस्थमा और आंखों में संक्रमण के मामले बढ़ने की बात सामने आई है. यानी आग इंडोनेशिया में लगी है, लेकिन उसका धुआं कई देशों के लोगों को परेशान कर रहा है. जंगल की आग से निकलने वाले धुएं में बहुत छोटे प्रदूषण कण होते हैं. ये सांस के साथ शरीर के अंदर जा सकते हैं. इससे खांसी, गले में जलन, नाक बहना, आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है. Photo: AFP
खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी वाले लोगों को इससे ज्यादा परेशानी हो सकती है. इंडोनेशिया में सामने आए 50 हजार से ज्यादा मामलों में 12 हजार से ज्यादा बच्चे पांच साल से कम उम्र के हैं. इंडोनेशिया में जंगलों की आग की समस्या कई साल पुरानी है. यहां बड़े इलाकों में जंगलों और ऐसी जमीन को खेती, पेड़ लगाने और दूसरे कामों के लिए बदला गया है. कई जगह जमीन को साफ करने के लिए आग भी लगाई जाती है. जब मौसम सूखा और गर्म हो, तो ऐसी आग जल्दी फैल जाती है. इसलिए जानकारों का कहना है कि अल-नीनो आग को बढ़ाने का एक कारण है, लेकिन इंसानी गतिविधियां भी इसके लिए जिम्मेदार हैं. Photo: AFP
बोर्नियो में बड़े-बड़े पीटलैंड हैं. ये ऐसी जमीन होती है, जहां पेड़-पौधों का पुराना हिस्सा जमीन के अंदर जमा होता रहता है. इसमें काफी मात्रा में कार्बन जमा रहता है. जब पीटलैंड सूख जाता है और उसमें आग लगती है तो इसे बुझाना मुश्किल होता है. आग से जमीन के अंदर जमा कार्बन भी हवा में चला जाता है. वन आग के एक्सपर्ट प्रोफेसर बंबांग हीरो सहार्जो के मुताबिक पिछले साल इंडोनेशिया में करीब 3.59 लाख हेक्टेयर जमीन जंगल की आग से जली थी. उस समय अल-नीनो का असर नहीं था. Photo: AFP
इस साल अल-नीनो की वजह से आग काफी बड़े इलाके में फैल सकती है. कुछ शोध रिपोर्टों के आधार पर उन्होंने अनुमान लगाया है कि इस साल 1.1 करोड़ हेक्टेयर तक का इलाका आग से प्रभावित हो सकता है. अगर ऐसा हुआ तो यह 1997-98 के बाद इंडोनेशिया के सबसे खराब आग के मौसम में से एक हो सकता है. इंडोनेशिया के वानिकी मंत्री राजा जूली एंटोनी ने कहा है कि आग बुझाने की कोशिश अभी जारी है. उनके मुताबिक सितंबर अल-नीनो का सबसे अहम महीना है और इस दौरान आग को रोकना बड़ी चुनौती होगी. Photo: Reuters