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गगनयान के लिए इसरो का बड़ा कदम, इसी साल अंतरिक्ष में जाएगा पहला मानवरहित मिशन

गगनयान की इंसानी उड़ान से पहले अब बारी सबसे अहम टेस्ट की है. इसरो इसी साल बिना इंसान के मिशन को अंतरिक्ष में भेजेगा. इस उड़ान से पता चलेगा कि गगनयान अंतरिक्ष जाने और सुरक्षित लौटने के लिए कितना तैयार है.

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इसरो चीफ ने कहा है कि इस साल गगनयान का मानवरहित मिशन लॉन्च किया जाएगा. (Photo: ISRO)
इसरो चीफ ने कहा है कि इस साल गगनयान का मानवरहित मिशन लॉन्च किया जाएगा. (Photo: ISRO)

इसरो इस साल गगनयान मिशन का पहला मानवरहित मिशन लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है. इसरो चेयरमैन वी. नारायणन ने शुक्रवार को श्रीहरिकोटा में बताया कि इस मिशन पर तेजी से काम चल रहा है. इस उड़ान में कोई इंसान अंतरिक्ष में नहीं जाएगा. पहले इस मिशन के जरिए गगनयान के सभी जरूरी सिस्टम को जांचा जाएगा. नारायणन ने GSLV-F17/EOS-05 की सफल लॉन्चिंग के बाद यह जानकारी दी. 

उन्होंने कहा कि इसरो के साथ कई कंपनियां और दूसरी संस्थाएं भी गगनयान की तैयारी में काम कर रही हैं. उन्होंने बताया कि इस वित्त वर्ष में इसरो छह और लॉन्च करने की तैयारी में है. इनमें NVS-03 नेविगेशन सैटेलाइट भी शामिल है.

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पहले बिना इंसान के क्यों भेजा जाएगा गगनयान?

गगनयान भारत का पहला ऐसा मिशन है, जिसके जरिए भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी है. योजना के मुताबिक अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर भेजा जाएगा और फिर उन्हें सुरक्षित वापस लाया जाएगा.

इंसानों को भेजने से पहले इसरो बिना इंसान के गगनयान को अंतरिक्ष में भेजकर उसकी जांच करेगा. इस दौरान देखा जाएगा कि रॉकेट सही तरीके से उड़ता है या नहीं और क्रू मॉड्यूल अंतरिक्ष में ठीक से काम करता है या नहीं.

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Gaganyaan Mission

वापस धरती पर आना भी जरूरी

गगनयान मिशन में सिर्फ अंतरिक्ष तक पहुंचना ही काफी नहीं है. अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित वापस धरती पर लाना भी उतना ही जरूरी है. इसके लिए क्रू मॉड्यूल में पैराशूट लगाए गए हैं. पैराशूट मॉड्यूल की रफ्तार कम करेंगे, ताकि वह समुद्र में सुरक्षित उतर सके. इसरो पहले ही पैराशूट सिस्टम के कई टेस्ट कर चुका है. आने वाले मानवरहित मिशन में भी इन सभी जरूरी सिस्टम को एक साथ जांचा जाएगा.

मिशन में क्या-क्या जांचा जाएगा?

पहले मानवरहित मिशन में रॉकेट की उड़ान से लेकर मॉड्यूल के वापस धरती पर आने तक कई चीजों की जांच होगी. वैज्ञानिक यह देखेंगे कि लॉन्च के दौरान सिस्टम ठीक काम कर रहे हैं या नहीं. इसके अलावा अंतरिक्ष में मॉड्यूल के काम करने, वापस पृथ्वी के वातावरण में आने और समुद्र में उतरने की पूरी प्रक्रिया भी देखी जाएगी. अगर टेस्ट के दौरान कोई कमी मिलती है तो इंसानों को भेजने से पहले उसे ठीक किया जा सकेगा.

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इस वित्त वर्ष में छह और लॉन्च

इसरो चेयरमैन ने बताया कि गगनयान के अलावा इस वित्त वर्ष में छह और लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है. इनमें NVS-03 नेविगेशन सैटेलाइट भी शामिल है. वहीं, EOS-05 को लेकर चल रही उन बातों को भी नारायणन ने खारिज किया, जिनमें इसे 'जासूसी सैटेलाइट' कहा जा रहा था. 

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उन्होंने बताया कि EOS-05 एक अर्थ ऑब्जर्वेशन यानी पृथ्वी की तस्वीरें और जानकारी जुटाने वाला सैटेलाइट है. इसकी काम करने की अवधि करीब 9 साल है. गगनयान के पहले मानवरहित मिशन का लक्ष्य इसी साल लॉन्च करना है. इसके सफल होने के बाद इसरो आगे इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने की दिशा में बढ़ेगा.

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