बिहार के मुंगेर जिले में गंगा एक बार फिर उफान पर है. नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 9 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुका है. लगातार बढ़ते पानी ने निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. छह प्रखंडों के दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में हैं और कई जगह घरों के भीतर तक पानी पहुंच चुका है.
जानकारी के मुताबिक, सदर प्रखंड की जाफरनगर, टिकारामपुर, कुतलुपुर, तारापुर दियारा और नौवागढ़ी उत्तरी पंचायत प्रभावित हैं. बरियारपुर प्रखंड की हरिणमार, झौवा बहियार और करहरिया दक्षिणी पंचायत में भी पानी फैल गया है. धरहरा प्रखंड के शिवकुंड, हेरु दियारा और फरदा समेत कई इलाकों में बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है. असरगंज और जमालपुर के कुछ हिस्सों में भी जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है.
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हवेली खड़गपुर प्रखंड के तेलियाडीह, अग्रहण और बहिरा पंचायत में भी पानी फैलने लगा है. सठबिग्घी गांव की स्थिति बेहद गंभीर है. गांव चारों तरफ से पानी से घिर चुका है. कई मकान डूब गए हैं और घरों के बाहर करीब 5 फीट या उससे अधिक पानी जमा है. ग्रामीण सड़क भी पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है.
5 फीट तक पानी, थर्माकोल की नाव से आवाजाही
सठबिग्घी के ग्रामीणों के मुताबिक हर साल बाढ़ आती है, लेकिन इस बार पानी का बहाव काफी तेज है. गंगा का जलस्तर लगातार ऊपर जा रहा है, जिससे खतरा बढ़ता जा रहा है. सड़क डूबने के बाद लोगों ने थर्माकोल से नावनुमा साधन तैयार कर लिया है और इसी के सहारे जरूरी काम के लिए आवाजाही कर रहे हैं.
बाढ़ की वजह से खेतों में पानी भर गया है और फसलें डूब चुकी हैं. कई परिवारों के सामने घर और सामान बचाने की चुनौती है. कुछ लोग पहले ही अपने मकान खाली कर ऊंचे स्थानों की ओर चले गए हैं. वहीं कई ग्रामीण परिवार और उनके मवेशी अभी भी घरों में बनाए गए मचान पर रहने को मजबूर हैं.
आजतक से बातचीत में बाढ़ प्रभावित लोगों ने प्रशासन और सरकार से तत्काल नाव उपलब्ध कराने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो घरों से निकलना और मुश्किल हो जाएगा. सड़कों पर पानी भरने के कारण लोगों को जान जोखिम में डालकर सामान के साथ आवाजाही करनी पड़ रही है. ग्रामीणों ने आजतक के जरिए मदद की गुहार लगाई है.
कटाव से सड़क टूटी, प्रशासन ने शुरू कराया बचाव कार्य
गंगा की तेज धार और पानी के दबाव का असर सड़कों पर भी पड़ा है. नौवागढ़ी उत्तरी पंचायत के वार्ड नंबर 2 और 3 को जोड़ने वाली सड़क टूट गई है. इसके चलते दोनों वार्डों के बीच आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया. हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने गुरुवार से कटावरोधी काम शुरू कराया है.
जाफरनगर पंचायत के वार्ड नंबर 4 और 5 में भी कटाव की स्थिति बनी हुई है. यहां भी प्रशासन की ओर से कटावरोधी कार्य कराया जा रहा है. वहीं बरियारपुर प्रखंड में हरिणमार और झौवा बहियार को जोड़ने वाले बिचली पुल के पास बने डायवर्सन में गंगा का पानी भर गया है. इससे वहां से गुजरने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है.
ग्रामीणों की आवाजाही बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने यहां निशुल्क नाव की व्यवस्था की है. हालांकि, कई दूसरे प्रभावित इलाकों में भी पानी फैलने से स्थानीय लोगों को आवागमन और जरूरी सामान पहुंचाने में दिक्कत हो रही है. बाढ़ के साथ कटाव का खतरा भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ा रहा है.
घर छोड़कर घाट पर पहुंचे ग्रामीण, मवेशियों को भी सुरक्षित ले जा रहे
जाफरनगर पंचायत के सीताचरण गांव में गंगा का पानी पहुंचने के बाद ग्रामीण घर खाली करने को मजबूर हैं. कई परिवार बबुआ गंगा घाट पर शरण ले रहे हैं. ग्रामीण नाव के जरिए अपने मवेशियों और उनके चारे को भी सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा रहे हैं. दूसरे प्रभावित इलाकों में भी घरों में पानी घुसने के बाद लोग ऊंचे स्थानों पर जा चुके हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दिनों से गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. खेतों में पानी भरने के कारण खड़ी फसलें डूब गई हैं. सीताचरण में पानी पहुंचने के बाद लोग परिवार और पशुओं के साथ सुरक्षित जगहों की ओर निकल रहे हैं. उनका कहना है कि जलस्तर में वृद्धि इसी तरह जारी रही तो हालात और गंभीर हो सकते हैं.
जिला प्रशासन का कहना है कि गंगा के बढ़ते जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है. प्रभावित इलाकों का आकलन किया जा रहा है और प्रशासन बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है. जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया गया है. हालांकि जमीन पर मौजूद बाढ़ पीड़ित अब भी प्रशासन और सरकार की मदद का इंतजार कर रहे हैं.